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भतीजी ने खोली वाजपेयी जी की अटल सच्चाइयां

Wed, 31 Dec 2014 07:13 PM IST
अर्जुन निराला/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
अर्जुन निराला/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Wed, 31 Dec 2014 07:13 PM IST
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interview: talk with niece of bharat ratna atal bihari vajpayee

'भारत रतन' अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी पूर्व सांसद करुणा शुक्ला ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में उनके कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठाया।

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करुणा कहती हैं, हम तो छोटे थे। वास्तव में तो वे प्रचारक हैं। बहुत समय बाद घर आते थे। हम सब उनका इंतजार करते। वे हमें बहुत प्यार करते। जैसे ही वे बहुत दिनों के बाद घर आते तो घर का माहौल त्यौहर जैसा होता। उनसे हम कई विषयों पर बातचीत करते। वे अपने अनुभव सुनाते। मैंने जीवन में उनसे बहुत सीखा।
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बच्चों को उन्होंने कभी नहीं डांटा
वे कहती हैं, अटल जी बच्चों से बहुत प्यार करते हैं। मुझे याद ही नहीं कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी किसी बच्चे को डांटा हो। वे हमेशा बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे। जब बहुत दिनों बाद घर आते थे तो बच्चों से घंटों बाते करते हैं। वे कहा करते हैं, बच्चे सबसे अच्छे शिक्षक और आलोचक होते हैं।
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उनके मन में कोई ईर्ष्या या द्वेष नहीं होता। वे मन की बात करते हैं। कई बार वे ऐसी शिक्षा दे जाते हैं कि बड़े केवल मुंह ताकते रह जाते हैं।

'कवि ह्दय, बहुत ही भावुक इंसान'

interview: talk with niece of bharat ratna atal bihari vajpayee

अटल जी को मेलों में जाना बहुत भाता है। उन्होंने पारंपरिक मेलों और अपनी विरासत से बहुत प्यार है। वे हमेशा बच्चों को और लोगों से इस बारे में लगातार चर्चा करते रहते हैं।

उन दिनों ग्लावियर में बहुत बड़ा मेला लगता था। वे उसमें जाना कभी नहीं भूलते थे। कोशिश करते कि सभी बच्चों को भी वे साथ लेकर जाएं। अटल जी कहा करते हैं, मेलों में बहु संस्कृति के दर्शन होते हैं।

उनके लिए देश पहले
करुणा अटल जी के साथ बिताए हुए पलों को याद करते हुए कहती हैं, उनका तो तन, मन सब कुछ देश के लिए ही है। हर वक्त देश के बारे में सोचते हैं। जब भी कोई बात करो तो यही कहते थे कि अभी बहुत काम हैं, जो करने हैं। कभी अपने बारे में कुछ नहीं सोचा।

भावुक हैं अटल जी
अटल जी बहुत ही भावुक इनसान हैं। वास्तव में वे कवि ह्दय व्यक्ति हैं। वे किसी का भी किसी का दु:ख नहीं देख पाते। उनकी कविताओं से उनकी भावुकता का पता चलता है।

खाने में खीर पसंद
वे बताती हैं, अटल जी को बचपन से ही खीर खाना बहुत पसंद है। जब भी वे घर आते उनके लिए कुछ बने या नहीं बने लेकिन खीर जरूर बनती। इसके अलावा गुलाब जामुन, करायल, कड़ी और अन्य भारतीय व्यंजन बहुत पसंद करते। हां, यह बिल्कुल ठीक है कि वे खाने के बहुत शौकिन रहे हैं।

त्याग की प्रतिमूर्ति हैं अटल जी
14वीं लोकसभा में मैंने उनके साथ पांच साल गुजारे। यह मेरे लिए स्वर्णिम काल है मेरे जीवन का। उनके साथ मिलकर काम करने का और उनके राजनीतिक विचारधारा को बहुत करीब से जानने का मौका मिला। वे त्याग के प्रतिमूर्ति हैं। जीवन में उन्होंने कभी किसी चीज का मोह नहीं किया। चाहे वह प्रधानमंत्री का पद ही क्यों ना हो। पूरे देश ने उनके त्याग और बलिदान को देखा है।

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