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International Youth Day: बुलंद इरादों से 'फतेह' किया मैदान और लिखी नई इबारत, 10 कहानियां
Wed, 12 Aug 2020 12:14 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 12 Aug 2020 12:14 PM IST
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अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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ये कहानियां उन युवाओं की हैं, जिन्होंने चुनौतियों और मुश्किलों को मात देकर कामयाबी की नई इबारत लिखी। शिक्षा का क्षेत्र हो या विज्ञान का। खेल का मैदान हो राजनीति की पिच। इन्होंने अपनी काबिलियत को न केवल साबित किया बल्कि युवाओं के लिए नई मिसाल पेश की। मुसीबतों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया।
फूड कोर्ट खोलने वाले अमित
- फोटो : अमर उजाला
अमित करना चाहते थे कुछ अलग, खोला अंतरराष्ट्रीय फूड कोर्ट
युवाओं के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं अमित। फाइनेंस में एमबीए करने के बाद उन्हें कई नौकरियों के ऑफर मिले, लेकिन वह खुद का काम करना चाहते थे इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का एक फूड कोर्ट खोल दिया। अपनी मेहनत के बल पर आज उनका फूड कोर्ट किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
सेक्टर-8 में उनके द एग कंपनी वर्ल्ड कैफे में अंडे से बने विभिन्न व्यंजन उपलब्ध हैं, जिन्हें खाने के लिए सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि ट्राइसिटी समेत हरियाणा, पंजाब व हिमाचल के लोग आते हैं। चंडीगढ़ के लेक अपार्टमेंट निवासी 32 वर्षीय अमित मूलरूप से पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले हैं। पिता श्रीचरण दास पेशे से डॉक्टर हैं, वह फिरोजपुर में ही खेती का कार्य देखने के साथ निजी प्रेक्टिस करते हैं।
पिता की इच्छा थी कि बेटा भी उन्हीं की तरह डॉक्टर बने लेकिन अमित ने कारोबार में अपना रास्ता चुना। अब अमित जल्द अपना ही एक ब्रांड बाजार में लाने वाले हैं। अमित ने बताया कि पापा चाहते थे कि वह घर में रहकर ही नौकरी के साथ ही खेती का काम देखें, लेकिन मुझे बचपन से कुछ अपना और अलग करना था। इसलिए फूड कैफे की ओर मुड़ गया।
युवाओं के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं अमित। फाइनेंस में एमबीए करने के बाद उन्हें कई नौकरियों के ऑफर मिले, लेकिन वह खुद का काम करना चाहते थे इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का एक फूड कोर्ट खोल दिया। अपनी मेहनत के बल पर आज उनका फूड कोर्ट किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
सेक्टर-8 में उनके द एग कंपनी वर्ल्ड कैफे में अंडे से बने विभिन्न व्यंजन उपलब्ध हैं, जिन्हें खाने के लिए सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि ट्राइसिटी समेत हरियाणा, पंजाब व हिमाचल के लोग आते हैं। चंडीगढ़ के लेक अपार्टमेंट निवासी 32 वर्षीय अमित मूलरूप से पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले हैं। पिता श्रीचरण दास पेशे से डॉक्टर हैं, वह फिरोजपुर में ही खेती का कार्य देखने के साथ निजी प्रेक्टिस करते हैं।
पिता की इच्छा थी कि बेटा भी उन्हीं की तरह डॉक्टर बने लेकिन अमित ने कारोबार में अपना रास्ता चुना। अब अमित जल्द अपना ही एक ब्रांड बाजार में लाने वाले हैं। अमित ने बताया कि पापा चाहते थे कि वह घर में रहकर ही नौकरी के साथ ही खेती का काम देखें, लेकिन मुझे बचपन से कुछ अपना और अलग करना था। इसलिए फूड कैफे की ओर मुड़ गया।
प्रोफेसर गौरव
- फोटो : अमर उजाला
प्रो. गौरव ने उठाया महामारी में महिलाओं को बीमारी मुक्त रखने का बीड़ा
पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क के युवा प्रोफेसर गौरव ने महिलाओं को महामारी के दौरान अस्वच्छता से होने वाली बीमारियों से मुक्त रखने को अपना लक्ष्य बना रखा है। वह अपने विद्यार्थियों के साथ मिलकर ट्राइसिटी के स्कूल, कॉलेज और स्लम एरिया में लड़कियों और महिलाओं को महामारी में स्वच्छता के महत्व से जुड़ी भ्रांतियों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
प्रो. गौरव ने बताया जब भी कोई आपदा आती है तो महिलाएं मासिक धर्म को अनदेखा कर परिवार की देखभाल को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं। प्रो. गौरव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पीयू में काम करने वाले 270 मजदूरों को खाना मुहैया करवाने के साथ महिलाओं व युवतियों को सैनेटरी किट भी बांटी।
एसडीएम नाजुक कुमार की अपील के बाद उनकी टीम ने धनास कच्ची कॉलोनी में लॉकडाउन के दौरान नियमित रूप से सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाए। उन्होंने बताया कि अब उनकी टीम री-यूज होने वाले पैड को प्रमोट कर रही है। इस कार्य में एमए सोशल वर्क की पूरी क्लास उनकी मदद करती है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क के युवा प्रोफेसर गौरव ने महिलाओं को महामारी के दौरान अस्वच्छता से होने वाली बीमारियों से मुक्त रखने को अपना लक्ष्य बना रखा है। वह अपने विद्यार्थियों के साथ मिलकर ट्राइसिटी के स्कूल, कॉलेज और स्लम एरिया में लड़कियों और महिलाओं को महामारी में स्वच्छता के महत्व से जुड़ी भ्रांतियों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
प्रो. गौरव ने बताया जब भी कोई आपदा आती है तो महिलाएं मासिक धर्म को अनदेखा कर परिवार की देखभाल को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं। प्रो. गौरव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पीयू में काम करने वाले 270 मजदूरों को खाना मुहैया करवाने के साथ महिलाओं व युवतियों को सैनेटरी किट भी बांटी।
एसडीएम नाजुक कुमार की अपील के बाद उनकी टीम ने धनास कच्ची कॉलोनी में लॉकडाउन के दौरान नियमित रूप से सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाए। उन्होंने बताया कि अब उनकी टीम री-यूज होने वाले पैड को प्रमोट कर रही है। इस कार्य में एमए सोशल वर्क की पूरी क्लास उनकी मदद करती है।
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गौरी श्योराण
- फोटो : अमर उजाला
लक्ष्य को साधकर अंतरराष्ट्रीय शूटर बनीं गौरी श्योराण
अंतरराष्ट्रीय शूटर गौरी श्योराण इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चंडीगढ़ के साथ भारत का नाम विदेश में रोशन करती आ रहीं हैं। इस मुकाम तक पहुंचने में सिर्फ उनकी मेहनत ही काम आई। गौरी ने जब शूटिंग करनी शुरू की तो इस खेल में कई बेहतरीन खिलाड़ी उनके सामने थे।
उनका लक्ष्य शीर्ष महिला शूटर्स की लिस्ट में शामिल होना था। इसके लिए उन्होंने कई घंटे मेहनत की। दिन, महीने और साल लगातार शूटिंग का अभ्यास करती रहीं। जीतोड़ मेहनत का परिणाम रहा कि उनकी झोली में खूब सारे मेडल आने लगे। गौरी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल शूटिंग की चैंपियन बनीं।
आज गौरी श्योराण का नाम देश की टॉप 10 महिला शूटिंग खिलाड़ियों की लिस्ट में शुमार हैं। बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर गौरी को स्विट्जरलैंड में एक समारोह में इंटरनेशनल वुमन क्लब की अध्यक्ष मिशेल बोउलाडे की ओर से सम्मानित किया गया। गौरी कोविड-19 में लोगों की मदद के लिए पीएम फंड में पैसे भी दे चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय शूटर गौरी श्योराण इंटरनेशनल शूटिंग प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चंडीगढ़ के साथ भारत का नाम विदेश में रोशन करती आ रहीं हैं। इस मुकाम तक पहुंचने में सिर्फ उनकी मेहनत ही काम आई। गौरी ने जब शूटिंग करनी शुरू की तो इस खेल में कई बेहतरीन खिलाड़ी उनके सामने थे।
उनका लक्ष्य शीर्ष महिला शूटर्स की लिस्ट में शामिल होना था। इसके लिए उन्होंने कई घंटे मेहनत की। दिन, महीने और साल लगातार शूटिंग का अभ्यास करती रहीं। जीतोड़ मेहनत का परिणाम रहा कि उनकी झोली में खूब सारे मेडल आने लगे। गौरी वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल शूटिंग की चैंपियन बनीं।
आज गौरी श्योराण का नाम देश की टॉप 10 महिला शूटिंग खिलाड़ियों की लिस्ट में शुमार हैं। बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर गौरी को स्विट्जरलैंड में एक समारोह में इंटरनेशनल वुमन क्लब की अध्यक्ष मिशेल बोउलाडे की ओर से सम्मानित किया गया। गौरी कोविड-19 में लोगों की मदद के लिए पीएम फंड में पैसे भी दे चुकी हैं।
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काश्वी गौतम
- फोटो : अमर उजाला
वनडे मैच में अकेले दस विकेट लेकर काश्वी ने रचा इतिहास
सामान्य सी दिखने वालीं काश्वी गौतम उस समय दुनिया की निगाहों में छा गईं, जब उन्होंने वनडे मैच की एक ही पारी में दस विकेट झटक लिए। बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद वुमन अंडर-19 वनडे ट्राफी में चंडीगढ़ की टीम से खेलते हुए काश्वी गौतम ने अरुणाचल प्रदेश की टीम के सभी 10 खिलाड़ियों को आउट कर इतिहास रच दिया था।
वह वनडे मैच में अकेले दस विकेट लेने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काश्वी गौतम ने कड़ी मेहनत की है और जमकर अभ्यास किया है। उनके बारे में यह प्रसिद्ध है कि अभ्यास के लिए जब लड़कियां नहीं होती थीं तो वह लड़कों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करतीं थीं।
उनका हेयर स्टाइल भी लड़कों जैसा है, ऐसे में लड़के उन्हें लड़का ही समझते रहे। जब वह क्रिकेट की दुनिया में छाईं तो उनकी फोटो देखकर वह लड़के भी दंग रह गए, जो उनके साथ खेला करते थे। काश्वी गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-26 में 12वीं की छात्रा हैं।
सामान्य सी दिखने वालीं काश्वी गौतम उस समय दुनिया की निगाहों में छा गईं, जब उन्होंने वनडे मैच की एक ही पारी में दस विकेट झटक लिए। बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद वुमन अंडर-19 वनडे ट्राफी में चंडीगढ़ की टीम से खेलते हुए काश्वी गौतम ने अरुणाचल प्रदेश की टीम के सभी 10 खिलाड़ियों को आउट कर इतिहास रच दिया था।
वह वनडे मैच में अकेले दस विकेट लेने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काश्वी गौतम ने कड़ी मेहनत की है और जमकर अभ्यास किया है। उनके बारे में यह प्रसिद्ध है कि अभ्यास के लिए जब लड़कियां नहीं होती थीं तो वह लड़कों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करतीं थीं।
उनका हेयर स्टाइल भी लड़कों जैसा है, ऐसे में लड़के उन्हें लड़का ही समझते रहे। जब वह क्रिकेट की दुनिया में छाईं तो उनकी फोटो देखकर वह लड़के भी दंग रह गए, जो उनके साथ खेला करते थे। काश्वी गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-26 में 12वीं की छात्रा हैं।