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बिल्डर को 48 लाख रुपये लौटाने के निर्देश

Wed, 22 Sep 2021 02:23 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 02:23 AM IST
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Instructions to return Rs 48 lakh to builder
चंडीगढ़। एक बड़ी राशि लेकर फ्लैट का पजेशन नहीं देने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिला आयोग ने बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 48 लाख 14 हजार चार सौ रुपये लौटाए। लौटाई जाने वाली राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करे। यही नहीं, परेशानी और मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये मुआवजा और 35 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करना होगा।
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आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के अंदर निर्देश का पालन नहीं करने पर लौटाई जाने वाली राशि और मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज अदा करना होगा। यह निर्देश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-1 चंडीगढ़ ने सुनवाई के बाद दिया है।
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शिकायतकर्ता पूनम मलिक और उनके पति आकाश दीप निवासी सीएसआईओ कॉलोनी, सेक्टर-30 चंडीगढ़ ने नई दिल्ली और नोएडा स्थित एटीएस एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, इसके मैनेजिंग डायरेक्टर और मेसर्स डायनेमिक क्लोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-1 चंडीगढ़ में शिकायत दी थी।
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यह था मामला
शिकायतकर्ता पूनम मलिक और उनके पति आकाश दीप ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी कि उन्होंने एटीएस गोल्फ मीडोज एंड लाइफस्टाइल चंडीगढ़ और डेराबस्सी के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि 14 दिसंबर 2012 को उन्होंने 15,30,701 रुपये बुकिंग राशि जमा कराई। फ्लैट की कुल कीमत 54 लाख 50 हजार रुपये थी। बिल्डर ने शिकायतकर्ता से वादा किया था कि बुकिंग की तारीख से तीन वर्ष के अंदर फ्लैट का पजेशन दे दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं फ्लैट की राशि शिकायतकर्ता के अकाउंट से नियमित रूप से कटती रहा। शिकायतकर्ता ने कुल 48 लाख 14 हजार चार सौ रुपये की राशि जमा करा दिए। यह कुल राशि की करीब 90 प्रतिशत राशि है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि उसने घर का किराया देने के साथ ही एक बड़ी राशि ब्याज में चुकाई, जिसका लाभ दूसरे पक्ष को मिला।

दिल्ली और नोएडा स्थित एटीएस एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, इसके मैनेजिंग डायरेक्टर ने उपभोक्ता आयोग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। वहीं मेसर्स डायनेमिक क्लोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पक्ष न रखे जाने पर उपभोक्ता आयोग ने उसे एकतरफा करार दिया।
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