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बुरी खबरः 5000 कर्मियों को वापस देना होगा तीन साल का दिवाली बोनस, पीजीआई के निर्देश
Tue, 05 Nov 2019 12:44 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2019 12:44 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक आदेश से पीजीआई के पांच हजार कर्मियों के होश उड़ गए हैं। मंत्रालय ने पीजीआई को निर्देश दिया है कि वे ग्रुप बी, सी और डी के कर्मियों से साल 2015-16 से 2017-2018 तक दिवाली पर दिए गए बोनस को वापस ले। इस आदेश के बाद पीजीआई को भी समझ में नहीं आ रहा है कि वह इस पर कैसे अमल करे।
इस निर्देश के खिलाफ पीजीआई की यूनियनें सख्त हो गई हैं। उनका कहना है कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है। दिवाली पर बोनस हर कर्मी का अधिकार होता है। यदि इस तरह की कोई रिकवरी की गई तो इसका कड़ा विरोध जताया जाएगा।पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने कहा कि वे इस समय बाहर हैं। वापस आने पर इस पर कोई बात कह पाएंगे।
पीजीआई प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि मामले पर राय ली जा रही है। बताया जा रहा है कि पांच हजार कर्मियों से करीब 10-12 करोड़ की रिकवरी की जाएगी। ग्रुप बी की कैटेगरी में नर्सिंग आफिसर, आफिस सुपरिंटेंडेंट व पर्सनल असिस्टेंट आते हैं, जबकि ग्रुप सी में क्लर्क व ग्रुप डी में हॉस्पिटल व सेनिटेशन अटेडेंट्स शामिल हैं।
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बताया जा रहा है कि साल 2015 में वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को बोनस देने के पत्र पर रोक लगा दी थी। स्थायी वित्त समिति की बैठक में यह मुद्दा उठा था, लेकिन स्थायी वित्त समिति ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकाय कर्मचारियों के कर्मचारियों को बोनस के भुगतान के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है।
साथ ही निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह के बोनस का भुगतान तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि इस संबंध में आदेश विशेष रूप से पारित नहीं किए जाते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता वाली गवर्निंग बॉडी की बैठक में भी बोनस को रेगुलर दिए जाने के पीजीआई के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था।
दूसरी तरफ कर्मचारियों ने भी संस्थान पर बोनस दिए जाने का दबाव बनाया। इस साल भी दिवाली के मौके पर बोनस जारी कर दिया गया, लेकिन शर्त रखी गई कि यदि केंद्र सरकार बोनस की वसूली के लिए कॉल करती है तो रुपया बिना किसी नोटिस के वापस ले लिया जाएगा। अब वसूली के निर्देश जारी हो गए हैं।
यह निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय से आया है, जबकि वित्त मंत्रालय से ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है। यह पहली बार होगा कि कांट्रैक्ट कर्मचारियों को बोनस का भुगतान किया जाएगा, जबकि नियमित कर्मचारियों से वसूली की जाएगी।
-अश्विनी मुंजाल, अध्यक्ष, पीजीआई कर्मचारी संघ
यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। बोनस तो कर्मचारियों का हक होता है। इस मुद्दे पर पीजीआई को कर्मचारियों का साथ देना चाहिए और इस मसले पर मंत्रालय से मजबूती से बात करे।
- सत्यवीर डागर, महासचिव, पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन
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इस निर्देश के खिलाफ पीजीआई की यूनियनें सख्त हो गई हैं। उनका कहना है कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है। दिवाली पर बोनस हर कर्मी का अधिकार होता है। यदि इस तरह की कोई रिकवरी की गई तो इसका कड़ा विरोध जताया जाएगा।पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने कहा कि वे इस समय बाहर हैं। वापस आने पर इस पर कोई बात कह पाएंगे।
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पीजीआई प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि मामले पर राय ली जा रही है। बताया जा रहा है कि पांच हजार कर्मियों से करीब 10-12 करोड़ की रिकवरी की जाएगी। ग्रुप बी की कैटेगरी में नर्सिंग आफिसर, आफिस सुपरिंटेंडेंट व पर्सनल असिस्टेंट आते हैं, जबकि ग्रुप सी में क्लर्क व ग्रुप डी में हॉस्पिटल व सेनिटेशन अटेडेंट्स शामिल हैं।
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बताया जा रहा है कि साल 2015 में वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को बोनस देने के पत्र पर रोक लगा दी थी। स्थायी वित्त समिति की बैठक में यह मुद्दा उठा था, लेकिन स्थायी वित्त समिति ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकाय कर्मचारियों के कर्मचारियों को बोनस के भुगतान के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है।
साथ ही निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह के बोनस का भुगतान तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि इस संबंध में आदेश विशेष रूप से पारित नहीं किए जाते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता वाली गवर्निंग बॉडी की बैठक में भी बोनस को रेगुलर दिए जाने के पीजीआई के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था।
दूसरी तरफ कर्मचारियों ने भी संस्थान पर बोनस दिए जाने का दबाव बनाया। इस साल भी दिवाली के मौके पर बोनस जारी कर दिया गया, लेकिन शर्त रखी गई कि यदि केंद्र सरकार बोनस की वसूली के लिए कॉल करती है तो रुपया बिना किसी नोटिस के वापस ले लिया जाएगा। अब वसूली के निर्देश जारी हो गए हैं।
यह निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय से आया है, जबकि वित्त मंत्रालय से ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है। यह पहली बार होगा कि कांट्रैक्ट कर्मचारियों को बोनस का भुगतान किया जाएगा, जबकि नियमित कर्मचारियों से वसूली की जाएगी।
-अश्विनी मुंजाल, अध्यक्ष, पीजीआई कर्मचारी संघ
यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। बोनस तो कर्मचारियों का हक होता है। इस मुद्दे पर पीजीआई को कर्मचारियों का साथ देना चाहिए और इस मसले पर मंत्रालय से मजबूती से बात करे।
- सत्यवीर डागर, महासचिव, पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन