इनेलो में काम नहीं होगी रार, चाचा और भतीजों में अब विरासत को लेकर छिड़ेगी जंग
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हरियाणा की चौधर के दम पर देश के उप प्रधानमंत्री का पद हासिल करने वाले जननायक ताऊ देवीलाल की विरासत को लेकर उनकी ही बनाई इंडियन नेशनल लोकदल में जंग तेज हो गई है। पिछले करीब एक साल से दोराहे पर खड़ी इनेलो में चाचा-भतीजा के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। सांसद दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय को निष्कासित कर पार्टी ने साफ कर दिया है कि पार्टी की कमान अभय चौटाला के हाथ में रहेगी।
पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के इस निर्णय के बाद पार्टी में भीतरी युद्ध तेज हो जाएगा। जिसकी बानगी निर्णय लेने के साथ ही दिखनी शुरू हो गई है। दोनों नेताओं के समर्थक अलग-अलग हो जाएंगे। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय पार्टी के कितने हित में होगा, यह चुनाव के दौरान पता चलेगा। फिलहाल पार्टी के लोग अंदरूनी तौर पर इस फैसले को आत्मघाती फैसला बता रहे है।
सांसद दुष्यंत चौटाला देवीलाल की नीतियों का हवाला देकर आगे बढ़ने के प्रयास में हैं। जबकि नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला ने जननायक की कमान संभाली है। एसवाईएल के मुद्दे को लेकर पिछले चार साल से वे पूरी तरह सक्रिय हैं।
हरियाणा में बनेंगे नए सियासी हालात
इनेलो में चल रही आंतरिक कलह के बाद पार्टी दो धड़ों में बंट जाएगी। चाचा और भतीजों के समर्थक अलग-अलग हो जाएंगे। लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है। जबकि विधानसभा चुनाव भी करीब है। ऐसे में दोनों धड़ों के लिए चुनाव में जनता की नब्ज टटोलना और समर्थन जुटाना अहम होगा।
नैना चौटाला के उग्र होने के बाद हुआ फैसला
पिछले दो तीन दिन से दुष्यंत और दिग्विजय की मां नैना चौटाला ने अपनी जनसभाओं में सीधे हमला बोलना शुरू कर दिया है। झोंझू कला में हुई हरी चुनरी चौपाल के माध्यम से नैना ने खुलकर पार्टी में हो रही अनुशासन हीनता पर अपनी भड़ास निकाली। सूत्र बताते हैं कि नैना के उग्र होने के बाद पार्टी ने अचानक यह फैसला लिया।
सियासत की जंग में पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के लिए अपने पौत्रों को पार्टी से अलग करना आसान नहीं था, लेकिन लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच जनता के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी था कि पार्टी की कमान किसके हाथ में रहेगी। एक तरह से चुनाव से पहले यह संदेश देना भी आवश्यक हो गया था जिससे मतदाताओं के बीच पारिवारिक कलह को लेकर कोई असमंजस न रहे।