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अलर्टः जीएसटीआर-1 दो महीने नहीं भरा तो बंद हो जाएंगे फर्मों के खाते, झेलनी होंगी कई दिक्कतें
Thu, 23 Jan 2020 10:55 AM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 23 Jan 2020 10:55 AM IST
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जीएसटीआर 3बी की तरह ही अब जीएसटीआर-1 की रिटर्न दो महीने तक फाइल नहीं करने वाली फर्मों के खाते भी बंद हो जाएंगे। इससे फर्मों के ईवे बिल नहीं बन पाएंगे और व्यापारी अपना सामान अन्य जगह बिक्री के लिए नहीं ले जा पाएंगे। हालांकि विभाग ने इसमें व्यापारियों को राहत देने के लिए यह व्यवस्था की है कि फर्म का बकाया रिटर्न दाखिल करते ही बंद खाता खुल जाएगा।
गौरतलब है कि जीएसटी रिटर्न फाइल करने की दर को बढ़ाने के लिए चंडीगढ़ वस्तु एवं सेवाकर विभाग लगातार नई नई नीतियां लागू कर रहा है। हाल ही में जीएसटीआर 3बी दो महीने तक फाइल नहीं करने वाली फर्मों के खातों को बंद करने का निर्णय किया गया था। अब इसी की तर्ज पर जीएसटीआर-1 भी लगातार दो महीने तक फाइल नहीं करने वाली फर्मों के खाते बंद कर दिए जाएंगे।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी रिटर्न की दरों को बढ़ाने के लिए यह निर्णय किया गया है। कई बार व्यापारियों द्वारा भूल वश रिटर्न नहीं भर पाते हैं जिस कारण इसमें एक महीने की छूट दी गई है। यदि व्यापारी दो माह तक लगातार रिटर्न नहीं भरेगा तभी फर्म का एकाउंट ब्लॉक होगा। यदि फर्म का बकाया जीएसटीआर-1 जमा कर देता है तो बंद खाता खुल जाएगा और ई वे बिल बनना शुरू हो जाएगा।
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गौरतलब है कि जीएसटी रिटर्न फाइल करने की दर को बढ़ाने के लिए चंडीगढ़ वस्तु एवं सेवाकर विभाग लगातार नई नई नीतियां लागू कर रहा है। हाल ही में जीएसटीआर 3बी दो महीने तक फाइल नहीं करने वाली फर्मों के खातों को बंद करने का निर्णय किया गया था। अब इसी की तर्ज पर जीएसटीआर-1 भी लगातार दो महीने तक फाइल नहीं करने वाली फर्मों के खाते बंद कर दिए जाएंगे।
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विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी रिटर्न की दरों को बढ़ाने के लिए यह निर्णय किया गया है। कई बार व्यापारियों द्वारा भूल वश रिटर्न नहीं भर पाते हैं जिस कारण इसमें एक महीने की छूट दी गई है। यदि व्यापारी दो माह तक लगातार रिटर्न नहीं भरेगा तभी फर्म का एकाउंट ब्लॉक होगा। यदि फर्म का बकाया जीएसटीआर-1 जमा कर देता है तो बंद खाता खुल जाएगा और ई वे बिल बनना शुरू हो जाएगा।
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क्या है जीएसटीआर-1
जीएसटीआर-1 अंतिम बिक्री रिटर्न को कहा जाता है। जीएसटी रिटर्न भरने की प्रक्रिया में इसका पहला नंबर आता है। इसमें पिछले महीने में हुई सभी तरह की बिक्री का ब्योरा भरा जाता है। जीएसटी सिस्टम में कंपोजीशन स्कीम लेने वाले और कुछ अन्य विशेष श्रेणियों के कारोबारियों को छोड़कर सबको जीएसटीआर-1 भरना अनिवार्य होता है।
क्या होगा लाभ
इस व्यवस्था के लागू होने का सीधा लाभ खरीददारों को मिलेगा, जो रिटर्न के मिस मैच होने की वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को लेकर परेशान रहते हैं। जीएसटी लागू हुए ढाई वर्ष बीत गए हैं लेकिन अभी तक रिटर्न की मिस मैच की समस्या चली आ रही है।
बड़ी संख्या में विक्रेता माल बेचने के बाद भी अपना जीएसटीआर-1 रिटर्न फाइल नहीं करते। ऐसा न करने की वजह से खरीददार उस खरीद को अपने रिटर्न में दिखा नहीं पाते क्योकि जीएसटीआर-1 दाखिल न होने के कारण से उनके जीएसटीआर 2ए में यह इसकी इनवाइस नजर नहीं आती है। इस कारण से जीएसटी में उनकी आईटीसी फंस जाती है।
इन्हें नहीं भरना है जीएसटीआर-1
- कंपोजिशन स्कीम अंतर्गत पंजीकृत कारोबारी
- ई-कॉमर्स ऑपरेटर
- इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर
- विदेशी कारोबारी
- टीडीएस काटने वाले कारोबारी
क्या होगा लाभ
इस व्यवस्था के लागू होने का सीधा लाभ खरीददारों को मिलेगा, जो रिटर्न के मिस मैच होने की वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को लेकर परेशान रहते हैं। जीएसटी लागू हुए ढाई वर्ष बीत गए हैं लेकिन अभी तक रिटर्न की मिस मैच की समस्या चली आ रही है।
बड़ी संख्या में विक्रेता माल बेचने के बाद भी अपना जीएसटीआर-1 रिटर्न फाइल नहीं करते। ऐसा न करने की वजह से खरीददार उस खरीद को अपने रिटर्न में दिखा नहीं पाते क्योकि जीएसटीआर-1 दाखिल न होने के कारण से उनके जीएसटीआर 2ए में यह इसकी इनवाइस नजर नहीं आती है। इस कारण से जीएसटी में उनकी आईटीसी फंस जाती है।
इन्हें नहीं भरना है जीएसटीआर-1
- कंपोजिशन स्कीम अंतर्गत पंजीकृत कारोबारी
- ई-कॉमर्स ऑपरेटर
- इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर
- विदेशी कारोबारी
- टीडीएस काटने वाले कारोबारी