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सत्ता संग्रामः खोई जमीन तलाशने निकली इनेलो; गठबंधन टूटा तो जगी पुराने साथियों के लौटने की आस; जानें नफा-नुकसान
Fri, 15 Mar 2024 11:36 AM IST
शाहरुख खान
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 15 Mar 2024 11:36 AM IST
सार
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) खोई जमीन तलाशने निकली है। भाजपा-जजपा गठबंधन टूटने से पुराने लोगों के लौटने की आस जगी है। सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ने का खम ठोका है। अभय चौटाला कुरुक्षेत्र के रण में उतरेंगे। वहीं, ओम प्रकाश चौटाला स्टार प्रचारक होंगे।
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Indian National Lok Dal
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन टूटने से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को राजनीतिक संजीवनी मिलने की आस है। हरियाणा में साढ़े चार साल पहले जो जमीन पार्टी खो चुकी है, उसे दोबारा तलाशने निकली है। गठबंधन टूटने के दो दिन बाद ही इनेलो ने लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है।
कोई करिश्मा करने की संभावना बेशक न हो, लेकिन इनेलो ने प्रदेश की दसों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का खम ठोका है। खास बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला एक बार फिर उसी कुरुक्षेत्र से अपना भाग्य आजमाएंगे जहां से इंडिया गठबंधन की ओर से आम आदमी पार्टी मैदान में उतरी है।
इससे पहले अभय चौटाला 2009 में और अर्जुन चौटाला 2019 में यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी सुप्रीमो और पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे, वह पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर फील्ड में काम संभालेंगे। पिछले कुछ समय से वह कार्यकर्ताओं के बीच जा रहे हैं।
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साढ़े चार साल पहले इनेलो से टूटकर जननायक जनता दल (जजपा) का गठन हुआ है। इसलिए पिछली बार इनेलो के कार्यकर्ता दो पार्टियों में बंट गए। मौजूदा स्थिति में जजपा के दस विधायक हैं और इनेलो के पास एक। अचानक भाजपा और जजपा का गठबंधन टूटने से इनेलो भी सक्रिय हो गई है। क्योंकि जजपा और इनेलो दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता एक ही सोच के हैं।
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कोई करिश्मा करने की संभावना बेशक न हो, लेकिन इनेलो ने प्रदेश की दसों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का खम ठोका है। खास बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला एक बार फिर उसी कुरुक्षेत्र से अपना भाग्य आजमाएंगे जहां से इंडिया गठबंधन की ओर से आम आदमी पार्टी मैदान में उतरी है।
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इससे पहले अभय चौटाला 2009 में और अर्जुन चौटाला 2019 में यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी सुप्रीमो और पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे, वह पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर फील्ड में काम संभालेंगे। पिछले कुछ समय से वह कार्यकर्ताओं के बीच जा रहे हैं।
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साढ़े चार साल पहले इनेलो से टूटकर जननायक जनता दल (जजपा) का गठन हुआ है। इसलिए पिछली बार इनेलो के कार्यकर्ता दो पार्टियों में बंट गए। मौजूदा स्थिति में जजपा के दस विधायक हैं और इनेलो के पास एक। अचानक भाजपा और जजपा का गठबंधन टूटने से इनेलो भी सक्रिय हो गई है। क्योंकि जजपा और इनेलो दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता एक ही सोच के हैं।
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जजपा के सरकार से बाहर निकलने से इनेलो को आस है कि अब जजपा का कार्यकर्ता इनेलो के पाले में आ सकता है। इनेलो नेताओं का मानना है कि काफी संख्या में लोग सत्ता में भागीदारी की वजह से जजपा में गए थे। इनेलो के कुछ पुराने नेताओं को भी पार्टी से जोड़ने की तैयारी चल रही है।
ये है उम्मीद
लोकसभा चुनाव में इनेलो को उम्मीद है कि जजपा का वोट बैंक इनेलो की तरफ आएगा। पार्टी के नेताओं का मानना है कि सत्ता में होने के चलते भाजपा और जजपा को एंटी इंकम्बेंसी का सामना करना पड़ेगा और इनेलो को इसका लाभ मिलेगा। खासतौर पर इनेलो प्रदेश की तीन सीटों कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम और अपने गढ़ सिरसा में जीत के लिए ताकत झोंकेगी।
लोकसभा चुनाव में इनेलो को उम्मीद है कि जजपा का वोट बैंक इनेलो की तरफ आएगा। पार्टी के नेताओं का मानना है कि सत्ता में होने के चलते भाजपा और जजपा को एंटी इंकम्बेंसी का सामना करना पड़ेगा और इनेलो को इसका लाभ मिलेगा। खासतौर पर इनेलो प्रदेश की तीन सीटों कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम और अपने गढ़ सिरसा में जीत के लिए ताकत झोंकेगी।
ये है चुनौती
इनेलो के लिए लोकसभा चुनाव इतने आसान नहीं हैं। उसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पार्टी सुप्रीमो उम्रदराज हो चुके हैं और स्वास्थ्य कारणों के चलते वह ताबड़तोड़ प्रचार नहीं कर पाएंगे। खुद अभय चौटाला के मैदान में उतरने से वह प्रदेश की अन्य सीटों पर प्रचार कम कर पाएंगे। इन दोनों के अलावा पार्टी के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जिसकी पूरे प्रदेश में पकड़ हो।
इनेलो के लिए लोकसभा चुनाव इतने आसान नहीं हैं। उसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पार्टी सुप्रीमो उम्रदराज हो चुके हैं और स्वास्थ्य कारणों के चलते वह ताबड़तोड़ प्रचार नहीं कर पाएंगे। खुद अभय चौटाला के मैदान में उतरने से वह प्रदेश की अन्य सीटों पर प्रचार कम कर पाएंगे। इन दोनों के अलावा पार्टी के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जिसकी पूरे प्रदेश में पकड़ हो।
दावेदावों में कई पूर्व विधायक
कुुरुक्षेत्र से अभय चौटाला के चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी है, हालांकि, यहां पर पूर्व सीपीएस रामपाल माजरा और शेर सिंह बड़शामी के नाम भी चल रहे हैं। गुरुग्राम से मोहम्मद इलियास के भाई पूर्व विधायक हबीबुर रहमान, फरीदाबाद से चौधरी सुनील तेवतिया, भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से तीन पूर्व विधायक दावेदार हैं। इनमें ओमप्रकाश गोरा, मास्टर धमपाल और रणबीर मंदोला के नाम शामिल हैं।
कुुरुक्षेत्र से अभय चौटाला के चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी है, हालांकि, यहां पर पूर्व सीपीएस रामपाल माजरा और शेर सिंह बड़शामी के नाम भी चल रहे हैं। गुरुग्राम से मोहम्मद इलियास के भाई पूर्व विधायक हबीबुर रहमान, फरीदाबाद से चौधरी सुनील तेवतिया, भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से तीन पूर्व विधायक दावेदार हैं। इनमें ओमप्रकाश गोरा, मास्टर धमपाल और रणबीर मंदोला के नाम शामिल हैं।
हिसार से कर्ण चौटाला हो सकते हैं उम्मीदवार
हिसार से कर्ण चौटाला, राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेद लोहान, पूर्व विधायक सरोज मोर के पति राज सिंह मोर, अंबाला से बसपा के पूर्व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे प्रकाश भारती के नाम चर्चा में हैं। इसी प्रकार इनेलो के गढ़ सिरसा में पूर्व विधायक डॉ. सीताराम, नरवाना के पूर्व विधायक पृथ्वी सिंह नंबरदार, पूर्व सांसद आत्मा सिंह गिल के बेटे गुरदीप सिंह गिल और पूर्व मंत्री रामस्वरूप रामा, करनाल से पूर्व विधायक रेखा राणा, जिलाध्यक्ष यशवीर राणा, फूल सिंह मंजूरा के नाम हैं।
हिसार से कर्ण चौटाला, राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेद लोहान, पूर्व विधायक सरोज मोर के पति राज सिंह मोर, अंबाला से बसपा के पूर्व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे प्रकाश भारती के नाम चर्चा में हैं। इसी प्रकार इनेलो के गढ़ सिरसा में पूर्व विधायक डॉ. सीताराम, नरवाना के पूर्व विधायक पृथ्वी सिंह नंबरदार, पूर्व सांसद आत्मा सिंह गिल के बेटे गुरदीप सिंह गिल और पूर्व मंत्री रामस्वरूप रामा, करनाल से पूर्व विधायक रेखा राणा, जिलाध्यक्ष यशवीर राणा, फूल सिंह मंजूरा के नाम हैं।
रोहतक में राठी परिवार को मिल सकता है टिकट
रोहतक से इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष रहे नफे सिंह राठी के परिवार को टिकट मिल सकती है। हाल ही में राठी की हत्या हो गई थी, इसके बाद से प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली है। राठी का बहादुरगढ़, झज्जर में खासा प्रभाव है। हालांकि, इनके अलावा पूर्व सांसद कैप्टन इंद्र सिंह और पूर्व विधायक नरेश शर्मा भी दावेदार हैं। सोनीपत सीट से पूर्व विधायक रामफल कुंडू व अन्य दावेदार हैं।
रोहतक से इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष रहे नफे सिंह राठी के परिवार को टिकट मिल सकती है। हाल ही में राठी की हत्या हो गई थी, इसके बाद से प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली है। राठी का बहादुरगढ़, झज्जर में खासा प्रभाव है। हालांकि, इनके अलावा पूर्व सांसद कैप्टन इंद्र सिंह और पूर्व विधायक नरेश शर्मा भी दावेदार हैं। सोनीपत सीट से पूर्व विधायक रामफल कुंडू व अन्य दावेदार हैं।
इनेलो प्रदेश की दसों सीटों पर चुनाव लड़ेगा। अभी आवेदनों पर मंथन किया जाएगा और आचार संहिता लगने के बाद सभी दसों प्रत्याशियों के नाम फाइनल किए जाएंगे। सदस्यता अभियान के तहत इनेलो ने पांच लाख नए सदस्य बनाए हैं और अब भी लोग सदस्य बनने की मांग कर रहे हैं। पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़े जाएंगे और हमें उम्मीद है कि परिणाम सकारात्मक आएंगे।-अभय चौटाला, राष्ट्रीय महासचिव, इनेलो