नई तकनीकों से लैस होगा इंडियन एयरफोर्स का रिपेयर डिपो, कई पार्ट्स यहीं हो रहे डिजाइन
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भारतीय वायुसेना के बेडे़ में शामिल रशियन ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स और हेलीकाप्टर्स की रिपेयर के लिए देश का एकमात्र थ्री बेस रिपेयर डिपो (3 बीआरडी) को अब और अपग्रेड किया जाएगा। इंडियन एयरफोर्स इसे लेकर पूरी तरह से गंभीर है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत यहां रिपेयर होने वाली एमआई सीरिज के हेलीकाप्टर के कई पार्टस इसी रिपेयर डिपो की वर्कशॉप में इंजीनियर्स तैयार कर रहे हैं, जिससे इन पार्ट्स को बाहर देशों से मंगवाने का सरकारी खर्च कुछ हद तक कम होगा। इसके अलावा इससे जुड़ी और भी कई नई तकनीकों से 3 बीआरडी को लैस करने की तैयारी है।
थ्री बीआरडी के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कोमोडोर संजीव गुराटिया ने बताया कि डिपो को अपग्रेड करने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इंडियन एयरफोर्स का यह बहुत ही महत्वपूर्ण रिपेयर डिपो है, जो अपग्रेडेशन के बूते अपनी तमाम चुनौतियों पर विजयी पा रहा है। उनके अनुसार डिपो के स्किल्स लेवल डेवलप करना पहली, मौजूदा मशीनरी को मेनटेन कर उन्हें अपग्रेड करना दूसरी और आए दिन सामने आ रही नई तकनीकों के साथ डिपो का संचालन तीसरी बड़ी चुनौती है।
उनके अनुसार कई तरह की पुरानी तकनीके आज भी इस्तेमाल में लाई जा रही हैं, लेकिन आज के परिवेश में इसे संतोषजनक नहीं माना जा सकता, लिहाजा नई मैन्युफैक्चरिंग और रिपेयर टेक्नोलॉजी को तेजी से अडॉप्ट किया जा रहा है। इससे डिपो अब शार्ट नोटिस में हेलीकाप्टर्स को रिपेयर करने की टास्क को आसानी से पूरा कर सकेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बढ़ाया हौसला
अपने कार्यशैली को लेकर पिछले तीन साल में चार अवार्ड व प्रशंसा पत्र हासिल कर चुका थ्री बीआरडी का हौसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बढ़ाया है। इस डिपो के ‘एंटी सुपिरियर फायर वार्निंग सिस्टम’ की प्रशंसा करते हुए इस डिपो को बाकायदा अवार्ड से नवाजा गया है। दिल्ली में इसकी प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। पीएम की हौसला अफजाई से डिपो के अधिकारी और इंजीनियर्स खासे उत्साहित है।
अब तक 900 हेलीकाप्टर्स की हो चुकी ओवरहॉलिंग रिपेयर
एयरफोर्स का सबसे महत्वपूर्ण थ्री बीआरडी डिपो में अब तक 900 हेलीकाप्टर्स की ओवरहॉलिंग रिपेयर हो चुकी है। 01 फरवरी 1962 को एयरफोर्स ने इस 3 बेस रिपेयर डिपो को स्थापित किया था। सन 1965 व 1971 के युद्ध में सभी प्रकार की वार वेगिंग मशीनरी को एक्टेनसिव रिपेयर व ओरवहॉलिंग सपोर्ट इस डिपो द्वारा दी गई थी।
शुरूआत में इस डिपो एएन-12, आईएल-14, एमआई-4 हेलीकाप्टर्स की ओवरहॉलिंग रिपेयर होती थी। सन 1980 के दौर में यहां एमआई-8 हेलीकाप्टर, टीवी-2 एरो इंजन, वीआर-8 एमजीबी की रिपेयर हुई। सन 1991 में यहां एमआई-17 के साथ-साथ इंडियन नेवी के एएन-32 व आईएल-38 विमान के इंजन की भी ओवरहॉलिंग शुरू की गई। वर्तमान में मीडियम लाइट हेलीकाप्टर, एमआई-17आईवी हेलीकाप्टरर्स फ्लीट की ओवरहॉलिंग रिपेयर की जाती है।