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चीन के हाई टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी सिस्टम को टक्कर देगा भारत, ये तकनीक अपनाई जाएगी

Fri, 16 Jun 2017 09:20 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 16 Jun 2017 09:20 AM IST
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India will hit China's high technology security system
चीन बॉर्डर पर तैनात ITBP निगरानी करते हुए - फोटो : File Photo
भारत अब ड्रैगन की चाल का हर जवाब देने को तैयार है। चीन बार्डर और एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर सिक्योरिटी मजबूत करने के लिए भारत अपग्रेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा। ताकि बार्डर पर चीन के हाई टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी सिस्टम को टक्कर दी जा सके।
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इसके लिए सरकार ने चीन बार्डर पर सिक्योरिटी सिस्टम और उपकरणों को अपग्रेड करने का फैसला किया है। बार्डर की सुरक्षा अब सुपर सर्विलांस सिस्टम से होगी। वहीं सीमा सुरक्षा में जुटे जवानों को अत्याधुनिक हथियारों और निगरानी उपकरणों से लैस किया जाएगा। साथ ही वहां तैनात जवानों के लिए हाई पावर फोर व्हीलर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे जवानों को सुविधा होगी। 
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चंडीगढ़ आए आईटीबीपी फोर्स के डीजीपी कृष्णा चौधरी ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि चीन बार्डर पर सुरक्षा के लिए जवानों की संख्या बढ़ाने के बजाय अब एक नई रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। जिससे चीनी जवानों की हरकत पर आसानी से पैनी नजर रखी जा सकेगी।
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कठोर मौसम से बचाएंगी आधुनिक चौकियां

India will hit China's high technology security system
भारत- चीन बॉर्डर की फाइल फोटो
डीजीपी ने बताया कि चीन बार्डर पर सबसे ऊंची पोस्ट 18750 फुट पर (ओपी दोर्जिला) मौजूद है, जहां आईटीबीपी के जवान तैनात हैं। इसके अलावा 12 हजार फुट से अधिक ऊंचाई वाली 70 से अधिक चौकियां चीन बार्डर पर मौजूद हैं। उनके अनुसार, यहां बर्फीले मौसम से लड़ना ही जवानों के लिए बड़ी चुनौती होती है, इसलिए अब जवानों की बार्डर आउट पोस्ट को कंपोजिट तरीके से तैयार की जा रही है, जो कि तापमान नियंत्रित होंगी और इनमें फ्रीज प्रूफ  टॉयलेट बनेंगे।

खास बात यह कि यहां शून्य से भी बहुत कम तापमान में भी जवानों को हमेशा रनिंग वाटर मिलेगा, उन्हें बर्फ पिघलाकर पानी का इंतजाम नहीं करना पड़ेगा। इससे चीन बार्डर पर तैनात चौकियों में जवानों के लिए रहने व काम करने के स्थिति में काफी सुधार होगा।

छोटे से टुकड़े पर उलझा है भारत-चीन
डीजीपी के अनुसार, चीन बार्डर पर पैंगोंग नदी के पास कुछ एरिया ऐसा है, जिस पर चीन अपना दावा जताता है और भारत भी दावा करता है। इसको लेकर कई बार तनाव की स्थिति बन जाती है और यहीं घुसपैठ के मामले सामने आते हैं। लेकिन देखा जाए तो वर्ष 2015 के बाद से चाइनिज पीपल्स लिब्रेशन आर्मी की ओर से ऐसी उल्लंघनाओं के मामलों में कमी आई है।

उनके अनुसार, वर्ष 2014 में ऐसे 500 मामले सामने आए, लेकिन वर्ष 2015 में इनकी संख्या 350 के करीब आई और वर्ष 2016 में ये मामले 200 रह गए। जबकि इस साल इसकी संख्या और कम होगी।
 
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