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देश की सबसे अमीर पार्टी BJP की पंजाब इकाई कंगाल, फंड जोड़े नहीं, करते रहे खर्च
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 25 May 2018 11:11 AM IST
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श्वेत मलिक
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देश की सबसे अमीर सियासी पार्टी भाजपा की पंजाब इकाई बुरी तरह कंगाल हो गई है। पूर्व प्रधानों ने फंड जोड़ा नहीं, खर्च करते रहे। जिसके चलते नए प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ने वर्करों से लेकर पदाधिकारियों को फंड देने और चंदा लेने में झोंक दिया है। एक तरफ केंद्र पर काबिज होने के बाद भाजपा की कमाई बेतहाशा बढ़ी। दूसरी तरफ दस सत्ता में रहने के बाद भी प्रदेश भाजपा का खजाना खाली हो गया। पार्टी का फरमान है कि छोटे से छोटे पदाधिकारी को भी बारह सौ रुपये देने ही होंगे, चाहे वह मंडल कार्यकारिणी का सदस्य ही क्यों न हो।
इसमें से हजार रुपये आजीवन आयोग निधि और दो सौ रुपये पार्टी की पत्रिका कमल सुनेहा के हैं। जिला पदाधिकारियों को 5200 देने को कहा गया है। सबसे ज्यादा बोझ मौजूदा व पूर्व जिला प्रधानों मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन और प्रदेश पदाधिकारियों पर डाला गया है। इनको पद के मुताबिक कई हजार से कई लाख रुपये खुद देने को कहा गया है। साथ ही उतने ही पैसे लोगों से चंदा लेने को कहा गया है। पदाधिकारियों को मोटिवेट करने में लगे नेता साफ कह रहे हैं कि दस साल भाजपा सत्ता में थी।
उस दौरान अहम पदों पर रहने वाले नेताओं ने आम लोगों के काम भी करवाए होंगे। अब उनसे पार्टी के लिए चंदा लें। जो अच्छे पदों पर रहे हैं, उन्होंने मलाई भी खाई है, अब पार्टी को जरूरत है तो फंड दें। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने लुधियाना, अमृतसर, जालंधर जैसे बड़े जिलों से एक करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। पंजाब में भाजपा के 33 संगठनात्मक जिले हैं। बाकी तीस जिलों से बीस लाख से ज्यादा जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। पूरे पंजाब से करीब दस करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट है। इसके लिए तीस मई की डेडलाइन रखी गई है।
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भाजपा में प्रदेश प्रधान, तीन महामंत्री और संगठन महामंत्री का सारा खर्च प्रदेश इकाई उठाती है। पिछले दो-तीन प्रधानों के कार्यकाल में फंड जुटाने के लिए कुछ नहीं किया गया, सिर्फखर्च किया जाता रहा। जिसके चलते आज ऐसी स्थिति है और 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है।
काम कराया नहीं, कौन देगा चंदा
भाजपा की मुहिम से आम पदाधिकारियों में खासा रोष है। उनका कहना है कि दस साल सत्ता में जरूर रहे पर अकालियों केआगे उनकी चली ही नहीं। किसी का काम नहीं कराया तो चंदा कौन देगा। जो लोग अच्छे पदों पर रहे, उन्होंने मलाई भी खाई। अब पार्टी को जरूरत है तो उनसे लेना चाहिए, आम वर्कर पर इतना बोझ क्यों डाला जा रहा है। दूसरी समस्या यह भी है कि जीएसटी और नोटबंदी से व्यापारी वर्ग वैसे ही नाराज है, मार्केट में कैश है नहीं, कौन चंदा देगा।
आज होगी समीक्षा
भाजपा द्वारा फंड जुटाओ मुहिम की समीक्षा के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़ मुख्यालय में बैठक होगी। प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक पहले प्रदेश कार्यकारिणी और उसके बाद जिला प्रधानों के साथ अलग-अलग बैठक कर फीडबैक लेंगे। फंड जुटाने के फरमान के बाद पहली बार पता चलेगा कि रिस्पॉन्स क्या है। क्या उम्मीद के मुताबिक फंड इकट्ठा हो रहा है या फिर लक्ष्य पूरा नहीं हो सकेगा।
इससे पहले कई साल से किसी पूर्व प्रधान ने ऐसी गतिविधि नहीं की। पार्टी के लिए फंड भी जरूरी है। लेकिन किसी से जबरदस्ती नहीं की जा रही। स्वेच्छा से जो भी पार्टी केलिए देना चाहते हैं, दे रहे हैं। मकसद यह है कि कोई गड़बड़ न हो, पारदर्शिता से फंड पार्टी तक पहुंचे।
- मेजर आरएस गिल, मीडिया इंचार्ज, पंजाब भाजपा
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इसमें से हजार रुपये आजीवन आयोग निधि और दो सौ रुपये पार्टी की पत्रिका कमल सुनेहा के हैं। जिला पदाधिकारियों को 5200 देने को कहा गया है। सबसे ज्यादा बोझ मौजूदा व पूर्व जिला प्रधानों मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन और प्रदेश पदाधिकारियों पर डाला गया है। इनको पद के मुताबिक कई हजार से कई लाख रुपये खुद देने को कहा गया है। साथ ही उतने ही पैसे लोगों से चंदा लेने को कहा गया है। पदाधिकारियों को मोटिवेट करने में लगे नेता साफ कह रहे हैं कि दस साल भाजपा सत्ता में थी।
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उस दौरान अहम पदों पर रहने वाले नेताओं ने आम लोगों के काम भी करवाए होंगे। अब उनसे पार्टी के लिए चंदा लें। जो अच्छे पदों पर रहे हैं, उन्होंने मलाई भी खाई है, अब पार्टी को जरूरत है तो फंड दें। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने लुधियाना, अमृतसर, जालंधर जैसे बड़े जिलों से एक करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। पंजाब में भाजपा के 33 संगठनात्मक जिले हैं। बाकी तीस जिलों से बीस लाख से ज्यादा जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। पूरे पंजाब से करीब दस करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट है। इसके लिए तीस मई की डेडलाइन रखी गई है।
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भाजपा में प्रदेश प्रधान, तीन महामंत्री और संगठन महामंत्री का सारा खर्च प्रदेश इकाई उठाती है। पिछले दो-तीन प्रधानों के कार्यकाल में फंड जुटाने के लिए कुछ नहीं किया गया, सिर्फखर्च किया जाता रहा। जिसके चलते आज ऐसी स्थिति है और 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है।
काम कराया नहीं, कौन देगा चंदा
भाजपा की मुहिम से आम पदाधिकारियों में खासा रोष है। उनका कहना है कि दस साल सत्ता में जरूर रहे पर अकालियों केआगे उनकी चली ही नहीं। किसी का काम नहीं कराया तो चंदा कौन देगा। जो लोग अच्छे पदों पर रहे, उन्होंने मलाई भी खाई। अब पार्टी को जरूरत है तो उनसे लेना चाहिए, आम वर्कर पर इतना बोझ क्यों डाला जा रहा है। दूसरी समस्या यह भी है कि जीएसटी और नोटबंदी से व्यापारी वर्ग वैसे ही नाराज है, मार्केट में कैश है नहीं, कौन चंदा देगा।
आज होगी समीक्षा
भाजपा द्वारा फंड जुटाओ मुहिम की समीक्षा के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़ मुख्यालय में बैठक होगी। प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक पहले प्रदेश कार्यकारिणी और उसके बाद जिला प्रधानों के साथ अलग-अलग बैठक कर फीडबैक लेंगे। फंड जुटाने के फरमान के बाद पहली बार पता चलेगा कि रिस्पॉन्स क्या है। क्या उम्मीद के मुताबिक फंड इकट्ठा हो रहा है या फिर लक्ष्य पूरा नहीं हो सकेगा।
इससे पहले कई साल से किसी पूर्व प्रधान ने ऐसी गतिविधि नहीं की। पार्टी के लिए फंड भी जरूरी है। लेकिन किसी से जबरदस्ती नहीं की जा रही। स्वेच्छा से जो भी पार्टी केलिए देना चाहते हैं, दे रहे हैं। मकसद यह है कि कोई गड़बड़ न हो, पारदर्शिता से फंड पार्टी तक पहुंचे।
- मेजर आरएस गिल, मीडिया इंचार्ज, पंजाब भाजपा