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Punjab: चढ़दे-लहंदे पंजाब के पर्यावरण प्रेमी आए साथ, नदियों में प्रदूषण कम करने के लिए मिलाया हाथ

Mon, 26 Feb 2024 03:29 PM IST
निवेदिता वर्मा राजीव शर्मा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
राजीव शर्मा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 26 Feb 2024 03:29 PM IST
सार

आलमी पंजाबी संगत के गंगवीर सिंह राठौर ने कहा कि नदियां हमारी धरोहर हैं और उनमें प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है। यदि इसे रोका न गया तो गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि संस्था इसके लिए काम कर रही है। वहीं रावी में प्रदूषण रोकने के लिए पाकिस्तानी पंजाब के युवा भी सक्रिय हैं।  

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India Punjab and Pakistan Punjab joined hands to reduce pollution in rivers
नदियों में बढ़ता प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1947 में अंग्रेज देश को दो हिस्सों में बांटकर चले गए, लेकिन दोनों देशों भारत एवं पाकिस्तान के लोगों के दिल आज भी एक-दूसरे के लिए धड़कते हैं। यहां तक कि दोनों देशों की समस्याएं भी लगभग एक जैसी हैं। बदलते दौर में चल रही विकास की आंधी में शहर कंक्रीट में बदल रहे हैं और प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। नदियां भी इससे अछूती नहीं हैं।
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चढ़दे यानी भारतीय पंजाब एवं लहंदे यानी पाकिस्तानी पंजाब के पर्यावरण प्रेमियों ने नदियों में प्रदूषण को कम करने के लिए हाथ मिलाया है और भविष्य में भी पूर्वी एवं पश्चिमी पंजाब की नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए संकल्प लिया है, ताकि पंज दरियावां दी धरती के तौर पर पहचान बनाने वाले पंजाब की इन धरोहरों एवं आर्थिकता की रीढ़ को संभालने के लिए आगे बढ़ा जा सके और आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण सौंपा जा सके।
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पर्यावरण प्रेमियों ने पंजाब में बहने वाली सतलुज एवं ब्यास नदी में प्रदूषण को लेकर काम कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी पंजाब के युवा रावी में प्रदूषण कम करने के लिए प्रयासरत हैं। इसी दिशा में रविवार को पाकिस्तान के लाहौर में रावी यात्रा का आयोजन किया गया। यह इस्तांबुल चौक माल रोड से रावी पुल लाहौर, पंजाब पाकिस्तान तक गई और लोगों को जागरूक किया। इसका आयोजन रावी बचाओ तहरीक के अबुजर मधु के नेतृत्व में किया गया।
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भारतीय पंजाब में भूमित्रा बेड़ा यात्रा के सन्नी संधू के नेतृत्व में ब्यास यात्रा का आयोजन किया गया। यह नौशहरा डल्ला से सराय अमानत खान-कमरूवाला तरनतारन-भारतीय पंजाब में हुई, जबकि सतलुज यात्रा लुधियाना में सतलुज नदी पर राहों माछीवाड़ा पुल पर की गई। इसका नेतृत्व आलमी पंजाबी संगत के गंगवीर सिंह राठौर ने किया। इस यात्राओं के दौरान पर्यावरण प्रेमियों एवं बुद्विजीवियों ने लोगों को पर्यावरण संभाल के बारे में अपडेट किया।

आलमी पंजाबी संगत के गंगवीर सिंह राठौर ने कहा कि नदियां हमारी धरोहर हैं और उनमें प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है। यदि इसे रोका न गया तो गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि संस्था इसके लिए काम कर रही है। वहीं रावी में प्रदूषण रोकने के लिए पाकिस्तानी पंजाब के युवा भी सक्रिय हैं। एक ब्लाॅगर के माध्यम से उनके साथ संपर्क हुआ और मिलकर काम करने की ठानी। उन्होंने कहा नदियों का अपना अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नदी में 25 फीसद तक पानी बहना चाहिए, लेकिन अपने हितों के लिए इसका पालन नहीं हो रहा है, नतीजतन नदियां सिकुड़ रही हैं और जंगली जीव एवं पक्षियों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है।


पब्लिक एक्शन कमेटी के जसकीरत सिंह का कहना है कि चढ़दे एवं लहंदे पंजाब के पर्यावरण प्रेमियों ने संयुक्त रूप से यह सार्थक प्रयास शुरू किया है और यह आगे भी जारी रहेगा। नदियों को बचाना आज के वक्त की जरूरत है।
 
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