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पाक से जंग के लिए फौज में बुलाया, नहीं दिए सेवा लाभ
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 03 Feb 2016 01:50 PM IST
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भारत-पाक युद्ध 1971 (द्वितीय राष्ट्रीय इमरजेंसी) के नाम पर लोगों को सेना में भर्ती करने के लिए बुला लिया गया, लेकिन इसके एवज में किए वादे पंजाब सरकार ने अभी तक पूरे नहीं किए। हालांकि, पंजाब सरकार ने बाकायदा नियम बनाकर विशेष लाभ देने की नोटिफिकेशन भी जारी कर दी थी, लेकिन पूर्व सैनिक अब तक पेंशन लाभ की राह देख रहे हैं।
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लगभग 15 पूर्व फौजियों ने यह लाभ हासिल करने के लिए पंजाब सरकार को मांग पत्र भी दिया, लेकिन कोई फैसला नहीं लेने के कारण उन्हें आखिरकार एडवोकेट पवन खन्ना के माध्यम से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जस्टिस जीएस संधावालिया ने एक ही दिन में याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब सरकार को पूर्व सैनिकों के इस मांग पत्र पर 15 दिन में निपटारा करने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने कहा है कि विवाद छोटा है, इसलिए सरकार से जवाब मांगने की जरूरत नहीं है। सरकार को निर्देश दिया है कि तीन महीने में मांग पत्र का निपटारा करे। जो पेंशन लाभ का हकदार है, उसे एक महीने में पेंशन जारी की जाए। यदि वह हकदार नहीं है तो पेंशन नहीं देने का कारण बताकर दावेदार को सूचित किया जाए।
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यह है मामला
चीन से युद्ध के दौरान 26 अक्तूबर 1962 से लेकर नौ जनवरी 1968 तक पहली राष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित कर पंजाब सरकार ने लोगों को सेना में भर्ती का न्योता दिया था। इसके एवज में वर्ष 1982 में रिक्रूटमेंट ऑफ एक्ससर्विसमैन नियम बनाए थे।
नियम के तहत प्रावधान था कि इमरजेंसी के दौरान सेना में भर्ती हुए सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद उस नौकरी के लिए पेंशन का लाभ दिया जाएगा, जिन्होंने सरकार की सामान्य नौकरी ज्वाइन की है, लेकिन सेना से सेवानिवृत्ति और सरकार की नौकरी ज्वाइनिंग में एक साल से अधिक की अवधि न हो और वह सेना की पेंशन न ले रहे हो।
सरकार के नियम बनाने से पहले पाकिस्तान से 1971 की जंग के दौरान भी सरकार ने द्वितीय राष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित की थी। यह इमरजेंसी तीन दिसंबर 1971 से लेकर 15 मार्च 1977 तक चली थी। सरकार ने एक्ससर्विस रिक्रूटमेंट नियम में संशोधन कर द्वितीय इमरजेंसी के दौरान भर्ती हुए सैनिकों के लिए भी सामान्य सेवा में पेंशन लाभ देने का प्रावधान बनाया था।
इसी द्वितीय इमरजेंसी की अवधि के करीब 15 पूर्व सैनिकों ने राज्य सरकार की नौकरी के लिए पेंशन लाभ हासिल करने को सरकार को मांग पत्र दिया था, लेकिन कोई फैसला नहीं होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना है कि वह सेना की नौकरी की अवधि राज्य सरकार की नौकरी में गिने जाने के हकदार हैं और नियमानुसार पेंशन लाभ के हकदार हैं।