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भारत के योगदान को कम आंका गया : कैप्टन
ब्यूराे/अमर उजाला, पटियाला
Updated Thu, 04 Sep 2014 10:36 PM IST
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लोकसभा में कांग्रेस पक्ष के उप नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार शाम प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लेने वाले और अपनी जान कुर्बान करने वाले भारतीय सैनिकों की याद में लंदन के रॉयल हास्पिटल चेल्सिया में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पहले विश्व युद्ध में करीब एक मिलियन भारतीय सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिसमें से करीब 74 हजार की मौत हो गई थी और 67 हजार गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। बावजूद इसके इस युद्ध में देश के योगदान का कहीं भी प्रमुखता से जिक्र नहीं किया गया।
कैप्टन ने कहा कि भारतीय सेना ने इस लड़ाई में महान योगदान दिया था, जिसको सही तरीके से दर्ज किया जाना और सामने लाना जरूरी है। कैप्टन ने कहा कि आज भी यह बड़े स्तर पर सामने न आ सकी कहानी है, जिसमें एक मिलियन वालंटियर आगे बढ़े और लड़ाई के नतीजे को बदलने में सहायता की। इस योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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उन्होंने खुलासा किया कि भारत ने किसी भी ब्रिटिश कॉलोनी से सबसे ज्यादा वालंटियर भेजे, जो उस युद्ध में लड़े। इनमें भी सिखों का विशेष योगदान रहा। लड़ाई की शुरुआत में भारतीय फौज का 22 प्रतिशत हिस्सा सिख थे जिनमें 28 हजार पटियाला के सैनिक थे, जो भारत की कुल जनसंख्या के दो प्रतिशत से भी कम थे।
उन्होंने कहा कि भारत से जाने वाले ज्यादातर सैनिकों को यह भी नहीं पता था कि इस लड़ाई के कारण क्या थे। वह अपने देश और रेजीमेंट के सम्मान के लिए लड़े व मरे। इस अवसर पर समारोह के मेहमानों में फील्ड मार्शल सर जोहन चैपल, विंबलडन के लार्ड सिंह और सरकार की ओर से एमपी पॉल उप्पल मौजूद रहे।
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इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पहले विश्व युद्ध में करीब एक मिलियन भारतीय सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिसमें से करीब 74 हजार की मौत हो गई थी और 67 हजार गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। बावजूद इसके इस युद्ध में देश के योगदान का कहीं भी प्रमुखता से जिक्र नहीं किया गया।
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कैप्टन ने कहा कि भारतीय सेना ने इस लड़ाई में महान योगदान दिया था, जिसको सही तरीके से दर्ज किया जाना और सामने लाना जरूरी है। कैप्टन ने कहा कि आज भी यह बड़े स्तर पर सामने न आ सकी कहानी है, जिसमें एक मिलियन वालंटियर आगे बढ़े और लड़ाई के नतीजे को बदलने में सहायता की। इस योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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उन्होंने खुलासा किया कि भारत ने किसी भी ब्रिटिश कॉलोनी से सबसे ज्यादा वालंटियर भेजे, जो उस युद्ध में लड़े। इनमें भी सिखों का विशेष योगदान रहा। लड़ाई की शुरुआत में भारतीय फौज का 22 प्रतिशत हिस्सा सिख थे जिनमें 28 हजार पटियाला के सैनिक थे, जो भारत की कुल जनसंख्या के दो प्रतिशत से भी कम थे।
उन्होंने कहा कि भारत से जाने वाले ज्यादातर सैनिकों को यह भी नहीं पता था कि इस लड़ाई के कारण क्या थे। वह अपने देश और रेजीमेंट के सम्मान के लिए लड़े व मरे। इस अवसर पर समारोह के मेहमानों में फील्ड मार्शल सर जोहन चैपल, विंबलडन के लार्ड सिंह और सरकार की ओर से एमपी पॉल उप्पल मौजूद रहे।