गलवां घाटी में पटियाला के नायब सूबेदार मनदीप सिंह शहीद, बच्चों को बनाना चाहते थे अफसर
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पटियाला के गांव सील के नायब सूबेदार मनदीप सिंह गलवां घाटी में शहीद हो गए हैं। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची तो परिवार वालों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मनदीप सिंह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पत्नी गुरदीप कौर ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पति मनदीप सिंह का सपना था कि उनके बच्चे बड़े अफसर बनें लेकिन अब उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा। यह कहकर वह बिलख पड़ीं।
गुरदीप ने बताया कि लॉकडाउन के कारण मनदीप कुछ दिन पहले ही छुट्टी काटकर लेह-लद्दाख में यूनिट 3 आर्टिलरी मीडियम में गए थे। मनदीप सिंह अपनी यूनिट में गनर इंस्ट्रक्टर (एआईजी) थे। गौरतलब है कि 20 मार्च 1980 में जन्मे शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह 24 दिसंबर 1997 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
गुरदीप कौर ने बताया कि कुछ दिन पहले ही मनदीप सिंह से बात हुई थी। लेकिन अब गलवां घाटी में संपर्क साधन न होने कारण बात भी नहीं हो सकी। आखिरी दिनों में पति के साथ बात न करने का गम अब उनके साथ ही जाएगा। उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि उनके बहादुर पति शहीद हो गए हैं। उधर, मनदीप सिंह के दोनों बच्चों जोबनप्रीत सिंह (12) और बेटी महकप्रीत कौर (15) का भी रो-रो कर बुरा हाल है।
विधवा मां एकटक देख रही थी बेटे की फोटो, केंद्र से चीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
शहीद की 65 साल की विधवा मां शंकुतला तो बस एकटक अपने बेटे की तस्वीर की तरफ देख रही हैं। पड़ोस की महिलाओं ने जब बेटे के बारे में पूछा तो वह फूट-फूट कर रोने लगीं। कहा कि उनका तो बुढ़ापे का सहारा भगवान ने छीन लिया। उन्होंने केंद्र सरकार से चीन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की।
डीसी व एसएसपी ने शोक व्यक्त किया
गांव सील में डीसी कुमार अमित व एसएसपी मनदीप सिंह पहुंचे और शहादत पर शोक व्यक्त किया। डीसी ने कहा कि शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचेगा, उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उधर, सांसद परनीत कौर, कैबिनेट मंत्रियों साधु सिंह धर्मसोत व ब्रह्म मोहिंदरा ने भी शहीद मनदीप सिंह को श्रद्धांजलि दी।