गलवां घाटी में 23 साल के गुरतेज सिंह शहीद, अधूरी रह गई पिता की ये ख्वाहिश

जगतार सिंह, मानसा(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 18 Jun 2020 09:25 AM IST

सार

  • कहा- बेटे से आखिरी बार बात करने की इच्छा भी मन में ही रह गई
  • भारत-चीन बार्डर पर हिंसक झड़प में मानसा का जवान हुआ शहीद 
  • ट्रेनिंग के बाद सिख रेजिमेंट में पहली बार लद्दाख में लगी थी ड्यूटी
सैनिक गुरतेज सिंह
सैनिक गुरतेज सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भारत-चीन बार्डर पर पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिक के साथ हुई हिंसक झड़प में मानसा के गांव बीरेवाला डोगरा का सैनिक गुरतेज सिंह (23) पुत्र विरसा सिंह भी शहीद हुए हैं। तीन भाइयों में सबसे छोटा गुरतेज सिंह करीब 2 साल पहले की फौज में भर्ती हुए थे। फौज में ट्रेनिंग के बाद सिख रेजिमेंट में पहली बार लेह-लद्दाख में ड्यूटी लगी थी।
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गुरतेज सिंह के पिता विरसा सिंह और माता प्रकाश कौर ने बताया कि गुरतेज फौज में बचपन से ही भर्ती होना चाहता था। भर्ती के बाद उसने देश के लिए सेवा करने का संकल्प लिया। बेटे से उनकी 20 दिन पहले बात हुई थी। कुछ दिन पहले उन्होंने बात करनी चाही लेकिन उससे बात नहीं हो पाई।

बेटे से आखिरी बार बात करने की इच्छा भी मन में ही रह गई। उन्होंने बताया कि गुरतेज सिंह के शहीद होने की खबर उन्हें बुधवार को सुबह 5 बजे फोन पर मिली। उनका कहना है कि गुरतेज उनका ही नहीं देश का बेटा था, जिस पर उन्हें हमेशा गर्व रहेगा। 

नेहरू कॉलेज मानसा के प्रो. अंबेश भारद्वाज ने बताया कि वह कॉलेज में स्थापित पीआईटी केंद्र में नान मेडिकल का सभी का चहेता विद्यार्थी था। उन्होंने कहा कि गुरतेज सिंह के शहीद होने पर उन्हें गर्व है। मानसा के नवनियुक्त डीसी महेंद्र पाल गुप्ता व एसएसपी डॉ. नरिंदर भार्गव ने शहीद के परिवार के साथ दुख साझा किया। 

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