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Hindi News ›   Chandigarh ›   Independence Day 2020: Beating retreat ceremony at Attari-Wagah Border

अमृतसर: जवानों के बूटों की धमक से भयजदा हुआ दुश्मन, जोश व उमंग के साथ हुई रिट्रीट सेरमनी

Sun, 16 Aug 2020 01:40 PM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 16 Aug 2020 01:40 PM IST
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Independence Day 2020: Beating retreat ceremony at Attari-Wagah Border
अटारी बॉर्डर

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अटारी सीमा पर राष्ट्रीय ध्वज समारोह में इस बार न तो मुटियारों के गिद्दा का धमाल था और न पंजाब की लोक बोलियों में शामिल देशभक्ति के टप्पे व बोलियां सुनाई दी। कभी हजारों पर्यटकों की मौजूदगी में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक देखने को यहां मिलती थी। 

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स्वतंत्रता दिवस की रीट्रीट समारोह में तिरंगा लेकर अटारी सीमा पर दौड़ने वाले पर्यटक भी नहीं दिखे। बीते पांच महीनों से कोरोना महामारी ने जिंदगी के हर पल को प्रभावित किया। अटारी सीमा पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह भी इससे अछूता नहीं रहा।
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इसके बावजूद परेड के दौरान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की दहाड़ ने दुश्मनों को यह अहसास करवा दिया की मां भारती की रक्षा के लिए खून का अंतिम कतरा भी न्योछावर करने में पीछे नहीं हटने वाले हैं। उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में परेड करने वाले जवानों में जज्बा और जोश से भरी भाव भंगिमाएं दिखाई थी। महिला व पुरुष जवानों ने अपने पावं को सिर के ऊपर से जब जमीन पर पटका तो उस तरफ देख रहा दुश्मन खौफजदा हो गया। बीएसएफ की परेड की अगुवाई जतिंदर सिंह, नितिन शर्मा और महिला जवान बलजीत कौर व साक्षी ने की।
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बीएसएफ डीजी सुरजीत सिंह देसवाल ने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित भी किया। दर्शक दीर्घा में अपने अधिकारीयों के साथ बैठे डीजी सहित सभी अधिकारी मुहं में मास्क बंधे हुए थे। सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया गया। बीएसएफ के बैंड ने मुख्य प्रवेश गेट से लेकर जीरो लाइन तक देशभक्ति की धुनों के साथ मार्च पास्ट किया। इससे पूर्व स्वतंत्रता दिवस की सुबह डीजी बीएसएफ ने जेसीपी स्थित बीएसएफ मुख्यालय में तिरंगा फहराया। 

बीएसएफ देश की सीमाओं की रक्षा में सक्षम

डीजी ने कहा की देश की सीमाओं पर तैनात बीएसएफ जवान अतिआधुनिक हथियारों से लैस हैं। देश की सीमाओं की रक्षा में सुरक्षा बल काबिल है। बीएसएफ ने पंजाब के साथ सटी पाकिस्तान सीमा से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर नकेल कसी है। बीएसएफ ने सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों को बरामद किया है। हमारे जवानों का जज्बा बहुत ऊंचा है।   
   
देश की आजादी में लाखों लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उनके इस बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। उनके द्वारा बताये मार्ग पर चल कर देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया त्रस्त है। इसके बावजूद भी बीएसएफ के जवान सीमा पर पहरा दे रहे हैं। इन बहादुर जवानों पर गर्व है। 

पाकिस्तान ने रिट्रीट समारोह से पहले गेट खोलने के नियमों का नहीं किया पालन

बौखलाए पाकिस्तान ने रिट्रीट समारोह के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार ध्वजारोहण समारोह शुरू करने से पहले अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर लगे गेटों को खोल दिया जाता है। पाकिस्तान ने अपने आजादी दिवस 14 अगस्त को भी रिट्रीट से पहले गेट नहीं खोले थे। 15 अगस्त को भी उन्होंने गेट नहीं खोले। भारत ने भी पाकिस्तान को इसका जवाब दिया और स्वतंत्रता दिवस की रिट्रीट समारोह से पहले गेट नहीं खोले।

यह गेट उस समय खोले गए जब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राष्ट्रीय झंडे उतारने थे। ध्वजारोहण के दौरान जब बीएसएफ व पाकिस्तान रेंजर के जवान झंडा उतारते है, तब दोनों देशों के जवान एक लय से झंडा उतारते है। इस बार पाकिस्तान रेंजर ने जल्दबाजी से अपना झंडा उतारा। इसलिए यह यादगार पल देखने को नहीं मिला। पाकिस्तान दर्शक दीर्घा में सन्नाटा पसरा हुआ था।

इस बार भी मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ
इस बार दोनों देशों के सीमा रक्षक दलों ने अटारी-वाघा सीमा पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मिठाई का आदान-प्रदान नहीं किया। पाकिस्तान रेंजर ने  14 अगस्त को बीएसएफ को मिठाई नहीं दी। बीएसएफ ने 15 अगस्त को रेंजर अधिकारियों को मिठाई नदी दी। बीते वर्ष पुलवामा हमले के बाद दोनों देशो के सीमा रक्षक दलों ने एतिहासिक व धार्मिक महत्व के दिनों में मिठाई का आदान-प्रदान करना बंद कर दिया है।    

डीजीपी ने अधिकारी सहित सचखंड में माथा टेक की अरदास

सीमा सुरक्षा बल व इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस फोर्स के डीजी सुरजीत सिंह देसवाल ने सचखंड श्री हरिमंदर साहिब में माथा टेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आगे नतमस्तक होकर अरदास की। उन्होंने कुछ समय तक गुरुबाणी कीर्तन श्रवण किया।

एसजीपीसी अधिकारियों ने उन्हें सचखंड की मर्यादायों व परिसर में स्थित इतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर उनके साथ बीएसएफ के एडीजीपी एसएस पंवार, आईजी महिपाल यादव, एमएस रावत, दलजीत चौधरी व डीआईजी डीके बुरा भी मौजूद रहे। एसजीपीसी ने सभी अधिकारियों को सिरोपा व सचखंड का मॉडल देकर सम्मानित किया। डीजी ने कहा की सचखंड के दर्शन कर उन्हें मानसिक शांति मिली है। यह पावन अस्थान पूरी दुनिया की संगत के लिए बहुत ही श्रद्धा का प्रतीक है।

1959 में शुरू हुई थी रिट्रीट सेरेमनी
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी की शुरुआत वर्ष 1959 में शुरू की गई थी। हर रोज शाम को दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज समारोह के साथ उतारे जाते थे। इसमें भारत से बीएसएफ के जवान और पाकिस्तान की ओर से पाक रेंजर्स शामिल होते हैं। दोनों देशों के हजारों लोग पहुंचते हैं और अपने जवानों का जोश बढ़ाने के लिए देशभक्ति के नारे लगाते हैं। रिट्रीट सेरेमनी 15 से 20 मिनट की होती है।

कब-कब बंद हुई रिट्रीट सेरेमनी
1965 में भारत और पाक के बीच युद्ध के दौरान रिट्रीट सेरेमनी को पहली बार रद्द किया गया था। 1971 में भारत और पाक के बीच फिर युद्ध हुआ और बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन बंद कर दिया गया था। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भी रिट्रीट सेरेमनी बंद कर दी गयी थी। दिसंबर 2014 में पाकिस्तान वाघा में हुए फिदायनी हमले के बाद रिट्रीट सेरेमनी बंद हो गयी थी। सितंबर 2016 में उड़ी हमले के बाद भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त भी सेरेमनी को रद्द किया गया। 1 मार्च 2019 को पाकिस्तान की ओर से विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के समय रिट्रीट सेरेमनी रद्द की गई। 7 मार्च 2020 को कोरोना वायरस के बाद से ही रिट्रीट सेरेमनी बंद है।

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