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किसान आंदोलनः बेनतीजा बैठकों से बढ़ रहा दबाव, दिल्ली की सीमाओं पर बढ़ेगी किसानों की तादाद
Sun, 06 Dec 2020 02:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 06 Dec 2020 02:21 AM IST
सार
- किसान संगठनों के आह्वान पर हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों से किसानों के जत्थे दिल्ली के लिए रवाना
- लंबा खिंच सकता है किसानों का आंदोलन, इस लिहाज से तैयारियों में जुटे किसान संगठन
- विपक्षी दलों के साथ-साथ कर्मचारी और मजदूर संगठन किसानों के समर्थन में उतरने लगे
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सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध
- फोटो : शुभम बंसल
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विस्तार
किसानों और सरकार के बीच बेनतीजा खत्म हो रही बैठकों के सिलसिले से न केवल दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि इस आंदोलन के लंबा खिंचने के आसार भी प्रबल होते जा रहे हैं। पांच दौर की बैठकें खत्म हो चुकी हैं, लेकिन किसानों की मांगों पर कोई सहमति नहीं बनी। न किसान झुकने को तैयार हैं और न ही सरकार।
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इसी के मद्देनजर किसान संगठनों के आह्वान पर अब दिल्ली की सीमाओं पर किसानों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। इसके लिए आंदोलनरत सभी किसान संगठनों के नेता पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इसके बाद हरियाणा व पंजाब समेत अन्य राज्यों से किसानों के कई और जत्थे दिल्ली बॉर्डर के लिए रवाना हो गए हैं। ये जत्थे अपने साथ ट्रालियों में कई दिनों के लिए ईंधननुमा लकड़ियां, सिलिंडर, सर्दी के लिए जरूरी सामान, बिस्तर व रसद इत्यादि चीजें लेकर दिल्ली की विभिन्न सीमाओं की ओर बढ़ रहे हैं।
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किसान संगठनों का इरादा अब दिल्ली की सीमाओं को पूरी तरह से सील करने का है और इसी लिहाज से तैयारियां भी की जा रही हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हरियाणा और पंजाब से काफी संख्या में किसानों के जत्थे दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश के किसानों ने हरियाणा में पलवल के नजदीक दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम कर दिया है। मध्यप्रदेश के काफी किसानों को ट्रैक्टर-ट्रालियों समेत उत्तरप्रदेश के मथुरा और कोसीकलां में रोका गया है। 7 दिसंबर तक काफी संख्या में किसानों का जत्था हरियाणा के पलवल पहुंचने वाला है।
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बंद प्रभावशाली बनाने के समर्थन में उतरे संगठन
किसानों के 8 दिसंबर के राष्ट्रव्यापी बंद को हरियाणा में पूरी तरह प्रभावशाली बनाने के लिए कई संगठन किसानों के समर्थन में उतर गए हैं। सर्व कर्मचारी संघ के साथ-साथ अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन, सीटू, एसकेएस और रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने भी किसान आंदोलन को खुला समर्थन दे दिया है। नेता जरनैल सिंह, मास्टर रामपाल, शिव दत्त, रामकुमार, सीटू नेता जयप्रकाश शास्त्री, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के नेता अशोक शर्मा, धूप सिंह, विक्रम खेड़ी, कामरेड प्रेम चंद, रेखा व मीना के अनुसार उनके संगठन किसानों के साथ खड़े हैं और आठ तारीख के बंद को भी प्रदेश में पूरी तरह प्रभावशाली बनाया जाएगा।
फिर प्रभावित होगा रेल यातायात, रेलवे सतर्क
पांचवें दौर की बैठक भी बेनतीजा रहने के बाद किसान आंदोलन के और तेज होने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। जिसे लेकर रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया है। इसी के चलते अब रेल यातायात फिर प्रभावित रहेगा। आंदोलन के मौजूदा हालात को देखते हुए रेलवे ने पंजाब व हरियाणा से होकर देश के विभिन्न राज्यों में जाने वाले कुछ ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट और शार्ट टर्मिनेट करने का फैसला लिया है। सहरसा-अमृतसर एक्सप्रेस (6 दिसंबर) व अमृतसर-सहरसा (7 दिसंबर) रद्द रहेगी। इसी तरह छह ट्रेनें शार्ट टर्मिनेट रहेंगी और चार ट्रेनों के रूट बदले गए हैं।
लंगर से खाना मंगवाया, फर्श पर बैठक खाया
किसान संगठन अभी तक दिल्ली में अपने विरोध के कई शांतिपूर्ण तरीके अपना रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को जब विज्ञान भवन में किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत चल रही थी, तो हरियाणा व पंजाब के कई किसान नेताओं ने वहां दोपहर भोज का बहिष्कार किया। इन किसान नेताओं ने धरना स्थल पर लगे किसान लंगरों से खाना मंगवाया और विरोध स्वरूप विज्ञान भवन के फर्श पर बैठकर खाया। इन किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठाने को राजी नहीं होती तब तक वे सरकारी भोज स्वीकार नहीं करेंगे।