{"_id":"61c23eefbc6da61f6c68197c","slug":"incomplete-notification-of-senate-issued-14-representatives-not-named-in-the-list-chandigarh-news-pkl4368379149","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीनेट की अधूरी अधिसूचना जारी, 14 प्रतिनिधियों का सूची में नाम नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीनेट की अधूरी अधिसूचना जारी, 14 प्रतिनिधियों का सूची में नाम नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की सोमवार देर रात आधी-अधूरी अधिसूचना जारी की गई। पीयू चांसलर और उपराष्ट्रपति ऑफिस की ओर से पीयू सीनेट को लेकर जारी अधिसूचना के अनुसार नई गठित सीनेट का कार्यकाल 31 अक्तूबर 2024 तक रहेगा।
पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव जीतने वाले सभी सदस्यों की सीनेट सदस्य के तौर पर अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार फैकल्टी वर्ग और एफिलिएटेड आर्ट्स कॉलेजों के चुने गए शिक्षकों की अधिसूचना जारी नहीं होने का कारण दोनों वर्गों के खिलाफ याचिका दायर करना है, इसलिए इनकी अधिसूचना में देरी होगी। इन दोनों वर्गों में कुल 14 प्रतिनिधि है, जिनका नाम सूची में नहीं है।
पीयू चांसलर दफ्तर की ओर से ई-गजट अधिसूचना में विभिन्न सीटों पर चुनाव जीतने वाले 35 प्रतिनिधियों को सीनेट के सदस्य के रूप में मंजूरी दी गई है। इसमें 15 स्नातक वर्ग के प्रतिनिधियों के अलावा पंजाब के दो विधायक हरप्रताप सिंह अजनाला और दलबीर सिंह गोल्डी का नाम भी शामिल है। इसके अलावा प्रोफेसर वर्ग के प्रो. जितेंद्र ग्रोवर, प्रो. रजत संधीर, एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग के डॉ. प्रवीण गोयल, डॉ. दिनेश कुमार, टेक्निकल एजूकेशन से टीचर और प्रिंसिपल के चयनित सदस्यों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं। अभी तक सीनेट की अधिसूचना दो बार हो गई है और अभी विवादित बचे हुए वर्गों के सदस्यों के लिए तीसरी बार की जाएगी। ऐसा पहली बार है कि सीनेट की अधिसूचना तीन बार की जाएगी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण कॉलेज शिक्षकों की सूची रुकी
आर्ट्स कॉलेजों के आठ शिक्षकों का सूची में नाम शामिल नहीं होने का कारण इसी वर्ग के चुने गए सदस्य डॉ. तरुण घई का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित होना है। इसके साथ ही डॉ. घई ने चांसलर दफ्तर को भी याचिका दी थी कि जब तक उनका मामला हल नहीं होता, तब तक इस वर्ग की अधिसूचना रोकी जाए। वहीं अदालत में याचिका दायर करने वाले डॉ. मनोज ने बताया कि बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई है, तब इस पर कोई फैसला आएगा। वहीं फैकल्टी वर्ग की अधिसूचना जारी नहीं होने का कारण राजनीतिक रंजिश बताया जा रहा है, क्योंकि फैकल्टी वर्ग में चुनाव जीतने वाले अधिकांश सदस्य कांग्रेसी हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा खेमे के किसी सदस्य ने चुने गए प्रतिनिधि में से किसी एक के खिलाफ चांसलर को याचिका दी है, इसलिए इसकी अधिसूचना रोकी गई है।
कोट्स :
1.
अधिसूचना जारी नहीं होने का लगा रहे पता
फैकल्टी चुनाव के जीते हुए प्रतिनिधियों की अधिसूचना जारी क्यों नहीं की गई है, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है। किसी फैकल्टी का कोई लीगल केस भी लंबित नहीं है और न ही हमारी तरफ से कोई शिकायत की गई है। ऐसा जरूर हो सकता है कि भाजपाइयों की ओर से कोई लीगल पेच फंसाया गया हो, जिससे हमारी अधिसूचना जारी नहीं हो। - प्रो. नवदीप गोयल, फैकल्टी चुनाव से जीते प्रतिनिधि
2.
तकनीकी कारण रहा होगा
चांसलर दफ्तर की ओर से जारी सूची में नाम नहीं होने का कोई तकनीकी कारण हो सकता है। अभी हम बैठक कर इस पर चर्चा करेंगे। उम्मीद है जल्द ही फैकल्टी की अधिसूचना भी जारी होगी। - प्रो. रौनकी राम, फैकल्टी चुनाव से जीते प्रतिनिधि
3.
याचिका के कारण फैकल्टी की अधिसूचना रुकी : फैकल्टी चुनाव में जीते हुए प्रतिनिधियों में किसी के खिलाफ याचिका दायर की गई है। इसलिए चांसलर दफ्तर की ओर से फैकल्टी की अधिसूचना रोकी गई है। - विक्रम नय्यर, रजिस्ट्रार, पीयू
विज्ञापन
पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव जीतने वाले सभी सदस्यों की सीनेट सदस्य के तौर पर अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार फैकल्टी वर्ग और एफिलिएटेड आर्ट्स कॉलेजों के चुने गए शिक्षकों की अधिसूचना जारी नहीं होने का कारण दोनों वर्गों के खिलाफ याचिका दायर करना है, इसलिए इनकी अधिसूचना में देरी होगी। इन दोनों वर्गों में कुल 14 प्रतिनिधि है, जिनका नाम सूची में नहीं है।
विज्ञापन
पीयू चांसलर दफ्तर की ओर से ई-गजट अधिसूचना में विभिन्न सीटों पर चुनाव जीतने वाले 35 प्रतिनिधियों को सीनेट के सदस्य के रूप में मंजूरी दी गई है। इसमें 15 स्नातक वर्ग के प्रतिनिधियों के अलावा पंजाब के दो विधायक हरप्रताप सिंह अजनाला और दलबीर सिंह गोल्डी का नाम भी शामिल है। इसके अलावा प्रोफेसर वर्ग के प्रो. जितेंद्र ग्रोवर, प्रो. रजत संधीर, एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग के डॉ. प्रवीण गोयल, डॉ. दिनेश कुमार, टेक्निकल एजूकेशन से टीचर और प्रिंसिपल के चयनित सदस्यों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं। अभी तक सीनेट की अधिसूचना दो बार हो गई है और अभी विवादित बचे हुए वर्गों के सदस्यों के लिए तीसरी बार की जाएगी। ऐसा पहली बार है कि सीनेट की अधिसूचना तीन बार की जाएगी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण कॉलेज शिक्षकों की सूची रुकी
आर्ट्स कॉलेजों के आठ शिक्षकों का सूची में नाम शामिल नहीं होने का कारण इसी वर्ग के चुने गए सदस्य डॉ. तरुण घई का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित होना है। इसके साथ ही डॉ. घई ने चांसलर दफ्तर को भी याचिका दी थी कि जब तक उनका मामला हल नहीं होता, तब तक इस वर्ग की अधिसूचना रोकी जाए। वहीं अदालत में याचिका दायर करने वाले डॉ. मनोज ने बताया कि बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई है, तब इस पर कोई फैसला आएगा। वहीं फैकल्टी वर्ग की अधिसूचना जारी नहीं होने का कारण राजनीतिक रंजिश बताया जा रहा है, क्योंकि फैकल्टी वर्ग में चुनाव जीतने वाले अधिकांश सदस्य कांग्रेसी हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा खेमे के किसी सदस्य ने चुने गए प्रतिनिधि में से किसी एक के खिलाफ चांसलर को याचिका दी है, इसलिए इसकी अधिसूचना रोकी गई है।
कोट्स :
1.
अधिसूचना जारी नहीं होने का लगा रहे पता
फैकल्टी चुनाव के जीते हुए प्रतिनिधियों की अधिसूचना जारी क्यों नहीं की गई है, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है। किसी फैकल्टी का कोई लीगल केस भी लंबित नहीं है और न ही हमारी तरफ से कोई शिकायत की गई है। ऐसा जरूर हो सकता है कि भाजपाइयों की ओर से कोई लीगल पेच फंसाया गया हो, जिससे हमारी अधिसूचना जारी नहीं हो। - प्रो. नवदीप गोयल, फैकल्टी चुनाव से जीते प्रतिनिधि
2.
तकनीकी कारण रहा होगा
चांसलर दफ्तर की ओर से जारी सूची में नाम नहीं होने का कोई तकनीकी कारण हो सकता है। अभी हम बैठक कर इस पर चर्चा करेंगे। उम्मीद है जल्द ही फैकल्टी की अधिसूचना भी जारी होगी। - प्रो. रौनकी राम, फैकल्टी चुनाव से जीते प्रतिनिधि
3.
याचिका के कारण फैकल्टी की अधिसूचना रुकी : फैकल्टी चुनाव में जीते हुए प्रतिनिधियों में किसी के खिलाफ याचिका दायर की गई है। इसलिए चांसलर दफ्तर की ओर से फैकल्टी की अधिसूचना रोकी गई है। - विक्रम नय्यर, रजिस्ट्रार, पीयू