पराली को लेकर हरियाणा के किसानों ने दिखाया दम, पिछले साल से आंकड़े आए कम
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पिछले साल की अपेक्षा इस साल हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है। हरियाणा और पंजाब दोनों ही राज्यों की सरकारें पराली को लेकर गंभीर हैं। इस बार सरकार ने सख्ती कम, बल्कि किसानों को जागरूक बनाने का प्रयास ज्यादा किया। एक खास अभियान के तहत इस बार हरियाणा के गांवों में सैकड़ों जागरूकता जागरूकता शिविर लगाएं गए।
नतीजा यह रहा कि इस साल पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई, जो कि पिछले साल के अपेक्षाकृत करीब 35 फीसद कम है। जबकि इस बार एफआईआर भी सिर्फ 2 किसानों पर ही दर्ज की गई। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का मानना है कि खेतों में पराली न जलाने का ये सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो केवल फिजा में प्रदूषण कम होगा, बल्कि माटी का उपजाऊपन भी बरकरार रहेगा, जोकि खेतों में ही पराली जलाने से प्रभावित हो रहा था।
इस सीजन में कम रिकार्ड हुए 4565 केस
हरियाणा में इस खरीफ सीजन में लगभग 13 लाख हेक्टेयर पर धान बोया गया था। लेकिन इस सीजन में धान कटाई के बाद पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। वर्ष 2017 में 15 नवंबर तक हरियाणा में पराली जलाने के मामले 12700 थे। लेकिन वर्ष 2018 में 15 नवंबर तक 8135 जगह ही पराली जली। इस साल जिन जिलों में किसानों ने खेतों में पराली जलाई, उनमें करनाल में 923, कैथल में 1426, सिरसा में 986, कुरुक्षेत्र में 737, अंबाला में 349, रोहतक में 12, नूहं में 2, फरीदाबाद में 2, गुरुग्राम में 2, पलवल में 230, पंचकूला में 16, पानीपत में 27, भिवानी 14, झज्जर में 13, हिसार में 148, यमुनानगर में 190, भिवानी 14, जींद में 794 व फतेहाबाद में सबसे ज्यादा 2250 केस पकड़े गए। रेवाड़ी, चरखीदादरी, महेंद्रगढ़ व सोनीपत में इस बार पराली जलने के बहुत ही कम मामले दर्ज किए गए। जो कि पिछले साल के केसों से अपेक्षाकृत 4565 केस कम हैं।
एनजीटी ने दिए प्रयास और तेज करने के निर्देश
हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी एस. नारायणनन के अनुसार इस सीजन में वाकई किसानों ने अपनी जागरूकता का परिचय दिया है। इस साल पराली जलाने के मामले में एफआईआर भी सिर्फ2 जगह की गई है। नारायणनन बताते हैं कि हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने सीजन से पहले ही गांवों में किसानों के लिए सैंकड़ों जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया था।
इसके अलावा केंद्र व राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत अनुदान पर पराली प्रबंधन के लिए किसानों को उपकरण भी सस्ती दरों पर बेचे। उन्होंने बताया कि एनजीटी में भी गत दिवस हरियाणा सरकार ने पराली जलाने के मामले में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। एनजीटी ने समीक्षा करते हुए इस दिशा में किए गए साकारात्मक प्रयासों को और तेज करने निर्देश दिए हैं।