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Chandigarh News: इलाज के नाम पर यहां सिर्फ बेड, जांच दवा के लिए जाना पड़ता है जीएमसीएच

Mon, 08 Jul 2024 07:01 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2024 07:01 AM IST
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In the name of treatment, there are only beds here, one has to go to GMCH for tests and medicines
चंडीगढ़। यहां इलाज के नाम पर हमें सिर्फ बेड मिला है। एक्सरे, दवा, खून जांच और यहां तक कि खाने-पीने की चीजों के लिए भी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 से लेकर बाजारों तक के चक्कर काटने पड़ते हैं। दिन ही नहीं रात में भी अपनी जरूरतों के लिए अकेले बाहर निकलना पड़ता है। यह दर्द है सेक्टर-48 में भर्ती मरीजों का। दो साल पहले वर्ष 2022 में सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी और मरीजों को भर्ती करने की शुरुआत हुई थी। तब यहां जीएमसीएच-32 के चार विभागों के मरीजों को शिफ्ट किया गया था। इन विभागों में त्वचा रोग, ओंकोलॉजी, पल्मोनरी और मनोचिकित्सा विभाग शामिल हैं, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी इन चारों विभागों के मरीजों को सेक्टर-48 से जीएमसीएच-32 के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। अब तक यहां मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। यहां भर्ती मरीज दोनों अस्पतालों के बीच पिस रहे हैं, जिससे उनकी सेहत ठीक होने के बजाय और बिगड़ रही है।
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बता दें कि सेक्टर-48 में हॉस्पिटल को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य 45, 46, 47, 49, 50, 51 जगतपुरा, फैदां, रामदरबार और मोहाली की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना था लेकिन सुविधा शुरू होने के बाद भी इस क्षेत्र की जनता के हाथ निराशा ही लगी है। अब भी चंडीगढ़ के उस क्षेत्र की बड़ी आबादी को इलाज कराने के लिए अपने घर से कई किमी दूर जाना पड़ रहा है। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना कि मरीजों की परेशानी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जाए रहे हैं। जल्द ही बदलाव नजर आएगा।
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दोपहर 12 बजे के बाद बंद हो जाता है सबकुछ : सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी और भर्ती मरीजों के लिए सुबह 10 से 12 बजे तक एक्स-रे की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। खून जांच के लिए सुबह 11 बजे तक ही नमूना लिया जाता है। ईसीजी की सुविधा भी 24 घंटे उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीज की मौत होने पर उसका सत्यापन करने के लिए भी जीएमसीएस-32 से कर्मचारी बुलाना पड़ता है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग सेक्टर-48 के अस्पताल को लेकर बड़े-बड़े दावे तो कर रहा है लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद खराब है। पूर्व स्वास्थ्य सचिव ने सेक्टर 48 अस्पताल में दवा की दुकान शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन उनके जाने के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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