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विश्व मधुमेह दिवस: डायबिटीज में लिवर हो सकता है फेल, पीजीआई ने दी सलाह-किडनी और आखों की तरह रखें ख्याल

Tue, 14 Nov 2023 01:06 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 14 Nov 2023 01:06 PM IST
सार

इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि डायबिटीज किडनी, आंख और हड्डियों के साथ ही लिवर के लिए भी खतरनाक है। इसकी पुष्टि के लिए ओपीडी में आने वाले 500 मरीजों पर शोध किया गया। डायबिटीज के कारण लिवर में भी रजिस्टेंस होने लगता है। उनका मोटापा बढ़ने लगता है। जिससे लिवर में फैट जमा होने लगता है।

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Negligence can lead to liver failure in Diabetic patients
डायबिटीज - फोटो : istock

विस्तार

अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो किडनी और आंखों के साथ अपने लिवर का भी ख्याल रखें क्योंकि अनदेखी से लिवर फेल हो सकता है। पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने शोध कर यह बात साबित किया है कि डायबिटीज लिवर भी फेल कर सकता है। 

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इंडोक्राइनोलॉजी विभाग की ओपीडी में आए डायबिटीज के मरीजों पर किए गए शोध में 70 प्रतिशत के लिवर खतरे में मिले। इस शोध के परिणाम के आधार पर उन मरीजों पर नई दवा का उपयोग शुरू कर दिया गया है। विशेषज्ञों को इससे सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
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इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि डायबिटीज किडनी, आंख और हड्डियों के साथ ही लिवर के लिए भी खतरनाक है। इसकी पुष्टि के लिए ओपीडी में आने वाले 500 मरीजों पर शोध किया गया। जिसमें उन्हें दो वर्गों में बांटा गया। एक वर्ग में 5 साल से ज्यादा समय से डायबिटीज ग्रस्त 250 मरीजों को शामिल किया गया। जबकि दूसरे वर्ग में नए 250 मरीजों को रखा गया। 
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स्क्रीनिंग के दौरान पाया गया कि 250 पुराने मरीजों में से 70 प्रतिशत के लिवर में फैट जमा था। जिससे उन्हें कई तरह की परेशानी भी हो रही थी। वहीं दूसरे वर्ग में शामिल 250 मरीजों में से 10 प्रतिशत के लिवर में फैट पाया गया। डॉ. संजय का कहना है कि डायबिटीज के कारण लिवर में भी रजिस्टेंस होने लगता है। उनका मोटापा बढ़ने लगता है। जिससे लिवर में फैट जमा होने लगता है। पुराने मरीजों की स्थिति पर नियंत्रण के लिए उन्हें एक नई दवा भी दी जा रही है। उम्मीद है कि उस दवा का बेहतर परिणाम आएगा।

डायबिटीज के प्रकार आप भी जान लें
टाइप-1 डायबिटीज : ये बीमारी आमतौर पर बच्चों और किशोरों में अधिक देखने को मिलती है। मरीज में इंसुलिन बहुत कम बनता है या नहीं बनता है। ऐसे मरीजों को रक्त में ग्लूकोज का स्तर संतुलित रखने के लिए नियमित इंसुलिन की खुराक देनी पड़ती है।
टाइप-2 डायबिटीज : कुल मरीजों में 90 फीसदी इसी से ग्रसित। ऐसे मरीजों में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है। खाने वाली दवाओं के साथ इंसुलिन की मदद से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। व्यायाम बहुत जरूरी है।
जेस्टेशनल डायबिटीज : गर्भावस्था में रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होने की स्थिति को जेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं। इससे मां-बच्चा दोनों प्रभावित होते हैं। आमतौर पर प्रसव बाद तकलीफ ठीक हो जाती हैं। बच्चे को टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका रहती है।

ये लक्षण है गंभीर
अधिक यूरिन होना, खासकर रात में। बार-बार प्यास लगना, वजन कम होना, बहुत अधिक भूख लगना, धुंधला दिखना, हाथ या पैरों में कंपन होना, बहुत अधिक थकान महसूस करना, त्वचा रुखी रहना, घाव का न सूखना, बार-बार संक्रमण होना।

जरा इसपर गौर करें
इंटरनेशनल डायबिटीज फाउंडेशन (आईडीएफ) के अनुसार, मधुमेह के कारण 2021 में 67 लाख लोगों की मौत हुई, और अनुमान है कि उसी वर्ष 53.7 करोड़ (10 में से 1) लोग इस बीमारी के साथ जी रहे थे और एक संकेत है और यह संख्या बढ़ेगी 2030 में 64.3 करोड़ और 2045 तक 78.3 करोड़।


शुगर रखना है नियंत्रित तो ऐसा करें

  • चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के सेवन से बचें
  • एक समय में भोजन का थोड़ा-थोड़ा हिस्सा खाने का अभ्यास करें
  • खाने में ऐसे फाइबर और भोजन शामिल करें जिनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो
  • धूम्रपान न करें, दिन में कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करने की आदत बनाएं
  • ब्लड कोलेस्ट्रॉल स्तर पर नजर रखें (आदर्श स्तर 200 से नीचे होना चाहिए)। एलडीएल (कम घनत्व लिपोप्रोटीन) 100 से नीचे, एचडीएल (उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन) 20 से ऊपर और ट्राइग्लिसराइड्स 150 से नीचे
  • अपने रक्तचाप का उचित प्रबंधन करें, जो 130/80 या उससे कम होना चाहिए
  • अतिरिक्त चीनी वाले अन्य पेय पदार्थों के सेवन से बचें
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