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‘खुदाई एक तरफ और 'मजीठिया' एक तरफ’

Mon, 21 Apr 2014 05:30 PM IST
सतिन्द्र बैंस/अमर उजाला, अमृतसर
सतिन्द्र बैंस/अमर उजाला, अमृतसर Updated Mon, 21 Apr 2014 05:30 PM IST
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In Amritsar Majithia also a major election issue

ड्रग्स, रेत और बजरी इस बार पूरे पंजाब में लोकसभा चुनाव के अहम मुद्दे हैं, लेकिन इन सब मुद्दों के साथ ही पंजाब के जनसंपर्क मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया अमृतसर लोकसभा चुनाव में खुद भी एक बड़ा मुद्दा बन गए हैं। इसे लेकर भाजपा के उम्मीदवार अरुण जेटली से लेकर सीएम प्रकाश सिंह बादल तक सभी परेशान हैं।

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बस एक मजीठिया ही हैं, जो अभी तक परेशान नहीं हैं। मजीठिया पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साले हैं। इसीलिए उन पर बादल परिवार की नज़र-ए-इनायत बनी रहती है। हालांकि, जेटली अपनी चुनावी मीटिंगों में मजीठिया को साथ बैठाने से हिचकते हैं। उधर, कांग्रेस के उम्मीदवार कैप्टन अमरिंदर सिंह और आम आदमी पार्टी ने मजीठिया को भी मुख्य चुनावी मुद्दा बना रखा है।

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माफियाओं की छवि से शिरोमणि अकाली दल में बेचैनी

In Amritsar Majithia also a major election issue

मजीठिया के राजनीतिक विरोधी उनका नाम पंजाब में पनप रहे ड्रग माफिया, रेत और बजरी माफिया के साथ जोड़ रहे हैं। इसके साथ ही उन्हे गुंडा तत्वों को संरक्षण देने के लिए भी ज़िम्मेदार बताया जा रहा है।

मजीठिया की इस ‘लोकप्रियता’ को लेकर शिरोमणि अकाली दल में बेचैनी है। मजीठिया ने बादल के सामने जेटली को जिताने की ज़िम्मेदारी ली थी, लेकिन अमरिंदर सिंह के मैदान में आने से बात बिगड़ती देख अब बादल उन लोगों के पास भी जा रहे हैं, जिनके लिए शिअद के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके थे। बादल के लिए अमृतसर सीट पर जीत या हार क्या मायने रखती है, इस बात का अंदाज़ा अभी मजीठिया को नहीं है।

अमृतसर में बादल परिवार की इज्जत दांव पर

In Amritsar Majithia also a major election issue

जेटली की परेशानी को बादल खूब समझते हैं और वह जानते हैं कि अमृतसर हारे, तो पंजाब हारे। अभी तक बठिंडा सीट के लिए ही कहा जाता था कि यहां बादल परिवार की इज़्ज़त दांव पर लगी है, लेकिन अब अमृतसर उस से भी बड़ी चुनौती बन गया है। इन हालात को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी भांप लिया है। तभी तो वे सभी जनसभाओं में एक बात जरूर कहते हैं, ‘जेटली को वोट देने का मतलब मजीठिया को वोट देना है। यदि जेटली जीते तो मजीठिया आपको और तंग करेगा।’

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अमृतसर सीट के लिए रूठों को मनाने में जुटे बादल

In Amritsar Majithia also a major election issue

ज़रा अंदाज़ा लगाइए कि सात वर्ष पहले मजीठिया से अनबन होने पर ब्यास विधानसभा हलके के पूर्व विधायक मनजिंदर सिंह को पार्टी से जलील कर निकाल दिया गया था और कंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि उनकी जान को मजीठिया से ख़तरा है।

पिछले सात साल में शिअद को कभी कंग की ज़रूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन कल अचानक बादल अपने साथ मजीठिया को लेकर कंग के घर जा पहुंचे। सूत्रों की मानें तो उन्होंने अपनी इज़्जत का वास्ता देकर कंग को वापस शिअद में शामिल होने का आह्वान किया। यही बात जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में बादल से पूछी गई तो उन्होंने दो टूक कह दिया कि मेरी तो किसी से लड़ाई नहीं। यह तो मजीठिया का ही झगड़ा था।

सीएम बादल ने मजीठिया को सुनाई थी खरी-खोटी

In Amritsar Majithia also a major election issue

यह पहली बार नहीं है, जब मजीठिया ने बादल के लिए परेशानी खड़ी की। बादल देखते और समझते सब हैं, लेकिन बेबस नज़र आते हैं। वह बोलते तभी हैं, जब पानी सिर के ऊपर से गुजर जाए। इससे पहले पंजाब सरकार द्वारा जालंधर में करवाए गए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में बादल ने मजीठिया को खुले मंच से खरी-खोटी सुनाई थी।

उन्होंने मजीठिया से पूछा था कि क्या वह कभी जेल गए हैं। मैंने 17 साल जेल में काटे हैं। मजीठिया को सब कुछ थाली में परोसा हुआ मिल गया है और अब वह मेरी कुर्सी पर ही क़ब्ज़ा करना चाहते हैं। बादल ने मजीठिया को मेहनत करने की नसीहत देते हुए कहा था कि लोगों का ध्यान रखोगे, तभी सरकार बनेगी।

‘सारी खुदाई एक तरफ, ज़ोरू का भाई एक तरफ़’

In Amritsar Majithia also a major election issue

इसी सम्मेलन में बादल ने सुखबीर को भी सलाह दी थी कि सिर्फ डेवलपमेंट से ही सरकार नहीं चलती, सभी वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलना पड़ता है।

बादल की सलाह तब न तो सुखबीर को समझ आई, न ही मजीठिया को। सुखबीर अपनी कामयाबी के लिए ज़्यादातर मजीठिया पर ही निर्भर रहते हैं। शायद यही कारण है वे मजीठिया की बहुत सी बातें नज़रअंदाज़ कर देते हैं और उन्हीं को अपना सच्चा सारथी मानते हैं। कहने वाले तो यह भी कहते हैं, ‘सारी खुदाई एक तरफ, ज़ोरू का भाई एक तरफ़।’

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