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हरियाणाः टोल पर फास्टैग के नाम पर अवैध वसूली, बैंक का नाम लेकर 700 रुपये में बेच रहे थे
Tue, 17 Dec 2019 03:07 PM IST
खुशबू गोयल
जितेंद्र नरवाल, अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
जितेंद्र नरवाल, अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 17 Dec 2019 03:07 PM IST
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फाइल फोटो
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सरकारी हिदायतों के बाद हरियाणा में पानीपत टोल पर भी फास्टैग बनवाने वालों की लंबी कतारें लगना शुरू हो गई हैं। यहां कुछ बैंक व प्रावइेट एजेंसियों भी पहुंच चुकी हैं, जो डेढ़ सौ से लेकर सात सौ रुपये तक फास्टैग बनाने का काम करती है। इनमें से कुछ अपने आप को बैंक कर्मचारी बताकर भी अवैध वसूली का काम करने पर जुटे थे। इस मामले की जांच पड़ताल करने के लिए सोमवार को टोल प्लाजा पर अमर उजाला टीम ने स्टिंग किया, जिसमें इनकी हकीकत सामने आ गई।
पड़ताल के दौरान पानीपत टोल पर बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम बताकर कुछ लोग 100 रुपये की वैल्यू डालकर 700 रुपये में फास्टैग बेचते हुए कैमरे में कैद हो गए। जब इनसे बैंक प्रबंधक से बात करवाने के लिए कहा गया तो उन्होंने एक युवक से बतौर बैंक प्रबंधक बात भी करवाई। जिसने अपने आप को बैंक मैनेजर बताया। उन्होंने कहा कि कुछ प्राइवेट लोगों को बैंक से इस काम के लिए ठेका दिया हुआ है। वे तो केवल सेवा भाव से ये काम कर रहे हैं। जब इस बारे में बैंक की करनाल क्षेत्रीय ब्रांच से पूछा गया तो पता चला कि फास्टैग बेचने वाले ये कर्मचारी बैंक के नहीं थे।
फास्टैग बेचने वाले का कहना था कि उन्होंने बैंक से डीलरशिप ली हुई है, लेकिन बैंक ने बताया कि उन्होंने किसी को डीलरशिप भी नहीं दी। अमर उजाला की पड़ताल की सूचना मिलते ही असल बैंक अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने तुंरत कार्रवाई करते हुए जालसाजों के खिलाफ पुलिस को शिकायत भी दी। वहीं टोल प्लाजा पर अन्य कई फास्टैग बनवाने वालों से पूछताछ की गई तो उन्होंने कोई भी सूचना देने से पहले गाड़ी की आरसी मांगी, इसके बाद ही अलग-अलग रेट बतानी की बात कही।
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जिससे एक बात तो तय हो गई है कि पानीपत टोल पर फास्टैग के नाम पर धांधली जोरों से चल रही है। यहां 150 रुपये से शुरुआत थी। फास्टैग बनाने वालों ने इसे जल्द बनवाने का डर भी दिखाया। उन्होंने बताया कि यह फीस केवल आज तक सीमित है। इसके बाद केवल फास्टैग बनवाने की कीमत पांच सौ रुपये निर्धारित हो जाएगी।
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पड़ताल के दौरान पानीपत टोल पर बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम बताकर कुछ लोग 100 रुपये की वैल्यू डालकर 700 रुपये में फास्टैग बेचते हुए कैमरे में कैद हो गए। जब इनसे बैंक प्रबंधक से बात करवाने के लिए कहा गया तो उन्होंने एक युवक से बतौर बैंक प्रबंधक बात भी करवाई। जिसने अपने आप को बैंक मैनेजर बताया। उन्होंने कहा कि कुछ प्राइवेट लोगों को बैंक से इस काम के लिए ठेका दिया हुआ है। वे तो केवल सेवा भाव से ये काम कर रहे हैं। जब इस बारे में बैंक की करनाल क्षेत्रीय ब्रांच से पूछा गया तो पता चला कि फास्टैग बेचने वाले ये कर्मचारी बैंक के नहीं थे।
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फास्टैग बेचने वाले का कहना था कि उन्होंने बैंक से डीलरशिप ली हुई है, लेकिन बैंक ने बताया कि उन्होंने किसी को डीलरशिप भी नहीं दी। अमर उजाला की पड़ताल की सूचना मिलते ही असल बैंक अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने तुंरत कार्रवाई करते हुए जालसाजों के खिलाफ पुलिस को शिकायत भी दी। वहीं टोल प्लाजा पर अन्य कई फास्टैग बनवाने वालों से पूछताछ की गई तो उन्होंने कोई भी सूचना देने से पहले गाड़ी की आरसी मांगी, इसके बाद ही अलग-अलग रेट बतानी की बात कही।
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जिससे एक बात तो तय हो गई है कि पानीपत टोल पर फास्टैग के नाम पर धांधली जोरों से चल रही है। यहां 150 रुपये से शुरुआत थी। फास्टैग बनाने वालों ने इसे जल्द बनवाने का डर भी दिखाया। उन्होंने बताया कि यह फीस केवल आज तक सीमित है। इसके बाद केवल फास्टैग बनवाने की कीमत पांच सौ रुपये निर्धारित हो जाएगी।
आधे घंटे में ही पहुंच गई टीम, तुंरत करवाया बंद, पुलिस को दी शिकायत
बैंक ऑफ बड़ौदा की करनाल ब्रांच को मामले की सूचना मिलते ही बैंक अधिकारियों की एक टीम तुंरत मौके पर पहुंच गई। जिसके बाद उन्होंने बैंक का नाम लेकर फास्टैग बेचने वालों को हटावा दिया व इसकी शिकायत भी पुलिस को दे दी। शाम तक बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने फास्टैग बेचने वालों से जांच पड़ताल शुरू कर दी थी। वहीं बैंक अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने ऐसे युवकों को हिरासत में भी ले लिया है,जो बैंक का नाम लेकर फास्टैग बेच रहा था।
सीधी बातचीत
रिपोर्टर- कौन से बैंक से हो ?
कर्मचारी- बैंक ऑफ बड़ौदा, पानीपत।
रिपोर्टर- कितने में फास्टैग बना रहे हो ?
कर्मचारी- 700 रुपये में ।
रिपोर्टर- इसमें कितनी वैल्यू मिलेगी ?
कर्मचारी- 100 रुपये।
रिपोर्टर- ये तो कम है ? ज्यादा चार्ज है, कैसे ?
कर्मचारी- इसमें 100 रुपये वैल्यू, 150 कार्ड की फीस, 50 रुपये एक्टिवेशन फीस, 200 रुपये एसएमएस फीस, 200 रुपये बैंक सिक्योरिटी, कुल मिलाकर 700 रुपये।
रिपोर्टर- लेकिन, दूसरे तो सस्ता बना रहे है।
कर्मचारी- जहां से सस्ता है वहां से ले लो।
रिपोर्टर- अपने मैनेजर से बात करवा सकते हो ?
कर्मचारी- हां जरूर। ये कहकर कर्मचारी ने अपने बैंक मैनेजर और उनका नंबर दे दिया।
सीधी बातचीत
रिपोर्टर- कौन से बैंक से हो ?
कर्मचारी- बैंक ऑफ बड़ौदा, पानीपत।
रिपोर्टर- कितने में फास्टैग बना रहे हो ?
कर्मचारी- 700 रुपये में ।
रिपोर्टर- इसमें कितनी वैल्यू मिलेगी ?
कर्मचारी- 100 रुपये।
रिपोर्टर- ये तो कम है ? ज्यादा चार्ज है, कैसे ?
कर्मचारी- इसमें 100 रुपये वैल्यू, 150 कार्ड की फीस, 50 रुपये एक्टिवेशन फीस, 200 रुपये एसएमएस फीस, 200 रुपये बैंक सिक्योरिटी, कुल मिलाकर 700 रुपये।
रिपोर्टर- लेकिन, दूसरे तो सस्ता बना रहे है।
कर्मचारी- जहां से सस्ता है वहां से ले लो।
रिपोर्टर- अपने मैनेजर से बात करवा सकते हो ?
कर्मचारी- हां जरूर। ये कहकर कर्मचारी ने अपने बैंक मैनेजर और उनका नंबर दे दिया।
अपने आप को बैंक मैनेजर बताने वाले आदमी से बातचीत
इसके बाद कर्मचारी द्वारा दिए गए बैंक मैनेजर के नंबर से बातचीत की गई तो सामने वाले ने जवाब दिया कि वह बैंक मैनेजर ही बात कर रहा है। उन्होंने फास्टैग देने के लिए प्राइवेट लोगों को डीलरशिप दी हुई है। ये तो समाजसेवा का काम है। इससे लोगों को बैंक में धक्के नहीं खाने पड़ते। अगर आपको फास्टैग बनवाना है तो आपसे सौ रुपये कम लिए जा सकते हैं।
क्षेत्रीय ब्रांच अधिकारी बोले, हमारे कर्मचारी नहीं
इस बारे में जब बैंक की क्षेत्रिय ब्रांच करनाल में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ये हमारे कर्मचारी नहीं थे। फास्टैग केवल बैंक परिधी में बेचा जा सकता है। इस प्रकार की डीलरशिप उन्होंने किसी को भी नहीं दी है। हालांकि इस मामले में पुलिस को शिकायत दी जा चुकी है। जिसमें एक को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। जब संबंधित सुपरवाइजर या डीलर से बात की गई तो उसने भी यही बताया कि उसने डीलरशिप ली है। अब उसने कब और कहां से डीलरशिप ली है तो उसकी हमें जानकारी नहीं है। इस बारे में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
बैंक का नाम बदनाम करने की कोशिश
बैंक अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा ये बैंक को बदनाम करने की कोशिश की गई है। उन्होंने क्षेत्रिय ब्रांच या चंडीगढ़ मुख्यालय से किसी को ऐसी डीलरशिप या ठेका ही नहीं दिया। बताया जा रहा है कि संबंधित आदमी भोपाल से डीलरशिप लेकर आया हो, अगर ऐसा है तो उसे वहां की डीलरशिप वहीं चलानी चाहिए थी। जो भी इसकी जांच की जाएगी।
क्षेत्रीय ब्रांच अधिकारी बोले, हमारे कर्मचारी नहीं
इस बारे में जब बैंक की क्षेत्रिय ब्रांच करनाल में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ये हमारे कर्मचारी नहीं थे। फास्टैग केवल बैंक परिधी में बेचा जा सकता है। इस प्रकार की डीलरशिप उन्होंने किसी को भी नहीं दी है। हालांकि इस मामले में पुलिस को शिकायत दी जा चुकी है। जिसमें एक को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। जब संबंधित सुपरवाइजर या डीलर से बात की गई तो उसने भी यही बताया कि उसने डीलरशिप ली है। अब उसने कब और कहां से डीलरशिप ली है तो उसकी हमें जानकारी नहीं है। इस बारे में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
बैंक का नाम बदनाम करने की कोशिश
बैंक अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा ये बैंक को बदनाम करने की कोशिश की गई है। उन्होंने क्षेत्रिय ब्रांच या चंडीगढ़ मुख्यालय से किसी को ऐसी डीलरशिप या ठेका ही नहीं दिया। बताया जा रहा है कि संबंधित आदमी भोपाल से डीलरशिप लेकर आया हो, अगर ऐसा है तो उसे वहां की डीलरशिप वहीं चलानी चाहिए थी। जो भी इसकी जांच की जाएगी।
कहीं डेढ़ सौ तो कहीं सात सौ में फास्टैग
पानीपत टोल प्लाजा पर कई बैंक व प्रावइेट एजेंसियों के कर्मचारी फास्टैग बेचने के लिए पहुंचे हुए थे। वहां बैंक व एजेंसी डेढ़ सौ, पांच सौ व सात सौ रुपये तक फॉस्टैैग बनवाने पर जुटे हुए थे। वहीं कुछ अन्य बैंक गाड़ियों के हिसाब किताब को देखते हुए अपने अलग अलग रेट भी बता रहे थे। एक बैंक अधिकारी ने बताया कि फास्टैग गाड़ी के साइज के हिसाब से बनाया जाता है। उसने पहले गाड़ी की आरसी मांगी जिसके बाद ही फीस बताने की शर्त रखी।
मामला संज्ञान में है, मौके पर जाकर पुलिस को दी शिकायत
मामला हमारे संज्ञान में है। इस पर बैंक ने कार्रवाई करते हुए तुंरत टीम को मौके पर भेजा, जिसके बाद संबंधित फास्टैग बेचने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दी है। -सत्यप्रकाश, क्षेत्रिय बैंक प्रबंधक, करनाल
मैं आज बाहर हूं। ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
- अनिल कुमार, थाना प्रभारी, सेक्टर 13-17, पानीपत।
मामला संज्ञान में है, मौके पर जाकर पुलिस को दी शिकायत
मामला हमारे संज्ञान में है। इस पर बैंक ने कार्रवाई करते हुए तुंरत टीम को मौके पर भेजा, जिसके बाद संबंधित फास्टैग बेचने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दी है। -सत्यप्रकाश, क्षेत्रिय बैंक प्रबंधक, करनाल
मैं आज बाहर हूं। ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
- अनिल कुमार, थाना प्रभारी, सेक्टर 13-17, पानीपत।