सौ फुट की दूरी पर अवैध निर्माण, शोरूम की जगह पर बन रही थीं दुकान, प्रशासन पर कई सवाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेराबस्सी और जीरकपुर में अवैध निर्माण का धंधा दिनों-दिन लगातार बढ़ता जा रहा है। इमारत मालिक अपने फायदे के लिए नगर काउंसिल के अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध निर्माण का कार्य धड़ल्ले से कर रहे हैं लेकिन उन पर कोई लगाम लगाने वाला नहीं है। जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जिंदगी देकर भुगतना पड़ रहा है।
चाहे जीरकपुर के चंडीगढ़-अंबाला हाईवे के आसपास निर्माण की बात करें या फिर यहां की कॉलोनियों में इमारत के निर्माण की बात करें। हर जगह बिल्डिंग बायलॉज के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए अवैध निर्माण जारी है, अब सवाल यह उठता है कि नगर काउंसिल इन सब बातों को जानते हुए भी अनजान क्यों बना है। ऐसे में नगर काउंसिल के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं, कि क्या उन्हीं की सह पर तो नहीं अवैध निर्माण कार्य चल रहे। बहरहाल लोगों को अब इस हादसे से जुड़ी 10 दिनों के भीतर आने वाली रिपोर्ट का इंतजार है, जिसमें लापरवाह अधिकारियों की पोल खुलने की संभावना है।
किसकी शह पर चल रहा था अवैध निर्माण....
किसी भी शोरूम या फिर इमारत को बनाने से पहले नगर काउंसिल के बिल्डिंग ब्रांच, जेई, एसडीओ एक्सईएन और ईओ और एमई की टेबल से फाइलें गुजरती है। इसके साथ ही इन सभी अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि नक्शे में पास किए गए डिजाइन के मुताबिक मौके पर निर्माण हो रहा है या नहीं, इसे सुनिश्चित करें। हैरानी की बात है कि नगर काउंसिल कार्यालय जहां ये सभी अधिकारी बैठते हैं, उससे महज सौ फीट की दूर पर अवैध निर्माण चल रहा था। यहां सवाल ये है कि किस अधिकारी की सह पर इमारत मालिक बेखौफ होकर दो शोरूम के बजाय बीस दुकानों का निर्माण कार्य करवा रहा था।
नगर काउंसिल के अधिकारियों के बीच चलती रही कानाफूसी...
पहले तो नगर काउंसिल की टीम घटना स्थल पर देरी से पहुंची। उसके बाद सभी अधिकारी एक दूसरे से इमारत के नक्शे को लेकर बात कर रहे थे, कि आखिर किसकी लापरवाही के चलते दो शोरूम के बजाय बीस दुकानों का निर्माण करवाया जा रहा था, सिर्फ यही नहीं मौके पर ही नगर काउंसिल के निचले तबके के अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। अब देखना यह है कि आखिर इस लापरवाही का सेहरा किस अधिकारी के सिर पर बांधा जाएगा।
साल 2000 में पास करवाए थे नक्शे
पुरानी बनी इन दुकानों के नक्शे साल 2000 में पास करवाए गए थे। दोनों भाइयों की तरफ से दुकानों के पीछे बने अपने पुराने घर को पहले तोड़कर साल 2020 मार्च में नगर काउंसिल से दोनों छोटी दुकानों के नक्शे को रिव्यू करवाकर 100 -100 फुट के दो शोरूम के नक्शे पास करवाए गए थे।
जबकि दोनों दुकानों के बीच स्थित तीसरी दुकान को तोड़कर अपने-अपने शोरूम के बीच साझे तौर पर एक गली छोड़ दी थी। दोनों भाइयों की तरफ से 100-100 फुट के दो शोरूमों का निर्माण पूरा होने के बाद में अब इसके बीच छोड़ी गली की तरफ मुंह कर अपने-अपने शोरूम में दस-दस दुकानें नाजायज तौर पर बनाई जा रही थी।
इस मौके पर दो शोरूमों की जगह 20 दुकानों की मार्केट तैयार की जा रही थी। जबकि नियम के मुताबिक 20 दुकानों की मार्केट पास करवाने के लिए 60 फुट चौड़ी सड़क के अलावा पार्किंग के लिए उचित प्रबंध सहित अन्य नियमों का पालना करना जरूरी है। लेकिन काउंसिल अधिकारियों की मिली भगत के चलते दो शोरूमों के नक्शे पास करवा नाजायज तौर पर 20 दुकानों का निर्माण धड़ल्ले के साथ जारी था। इस मौके पर एक भाई के 100 फुट के शोरूम में दस दुकानें बनकर तैयार हो गई थीं। जबकि दूसरे भाई की इमारत का काम अभी जारी था। जिसका लेंटर खोलते हुए यह हादसा हुआ।
बिना पिलर बना दी इमारत
जानकारी के मुताबिक आज सुबह मजदूर इमारत के बाहर की तरफ पुरानी छोटी दुकान की दीवार निकाल रहे थे। इसी दौरान इमारत गिर गई। यहां एक तरफ की तैयार दस दुकानों की बेस भी कमजोर होने के कारण उस में दरारें साफ दिखाई दे रहीं हैं। इमारत मालिक की तरफ से जहां दो शोरूमों में अवैध तौर पर बीस दुकानें तैयार की जा रही थीं। वहां 100 फुट लंबे लैंटर को रोकने के लिए कोई भी पिलर नहीं दिया गया था, बल्कि इमारत बनाने के लिए पुरानी ईंटों और पुरानी सरिया इस्तेमाल में लाया गया, जो इमारत का भार सह नहीं सका और इमारत गिर गई।
क्या कहते हैं ईओ
नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी जगजीत सिंह जज ने बताया कि उनके पद संभालने से पहले ही इसके नक्शे पास हुए हैं। उन्होंने माना कि दो शोरूमों के नक्शे रिव्यू हुए हैं। यहां दो शोरूमों के नक्शे रिव्यू करवाए थे। लेकिन उनको नहीं पता था कि यहां दस-दस, कुल बीस दुकानें कैसे तैयार की जा रही थीं, जो कि गैरकानूनी है।
पीरमुछल्ला में हो चुका ऐसा ही हादसा
इससे पहले अप्रैल 2018 में जीरकपुर नगर काउंसिल के अधीन आने वाले पीरमुछल्ला में तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई थी लेकिन गनीमत रही कि कोई भी इमारत में नहीं था। उसके बाद इसी क्षेत्र में 2019 में एक निर्माणाधीन शोरूम का लेंटर डालते हुए गिर गया था, जिसमें दो मजदूर घायल हुए थे। क्षेत्र में एक-एक के बाद बिल्डिंगें गिरने की घटनाएं हो रही हैं। ज्यादा लालच में बिल्डर्स बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी से खिलवाड़ करते हैं, जिसका खामियाजा खरीदने वाले को भी भुगतना पड़ सकता है।
हादसों के बाद बिल्डर या मकान मालिक पर केस दर्ज हो जाता है और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इस हादसों के बाद भी अभी प्रशासन जागा नहीं है। बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कोई पैमाने निर्धारित नहीं हैं। इस कारण यहां पर हर कोई रेंटल इनकम के चक्कर में जैसे चाहे वैसे ही बहुमंजिला इमारतें बनाने की होड़ में लगा हुआ है। इस कारण कंस्ट्रक्शन में हुई चूक के कारण अब लोगों की इमारतें भी गिरने की कगार पर पहुंचने लगी हैं। लेकिन प्रशासन सो रहा है।