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अच्छी पहल: खेलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस का होगा इस्तेमाल, खिलाड़ियों का ऐसे प्रदर्शन निखारेगा IIT मद्रास
Mon, 06 Jun 2022 05:56 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 06 Jun 2022 05:56 PM IST
सार
इस कार्य में आईआईटी के पांच प्रोफेसर की टीम लगी हुई है। उनके साथ एक सीईओ भी कार्य कर रहे हैं। नए मॉडल के तहत बॉयो और परफॉर्मेंस मॉर्कर के आधार पर खिलाड़ियों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
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ताऊ देवीलाल स्टेडियम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
देश में अब खिलाड़ियों का प्रदर्शन विदेश की तर्ज पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस से निखारा जाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के प्रोफेसर की टीम इसमें लगी हुई है। उनका मकसद ऐसा मॉडल विकसित करना है, जिसका फायदा छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को भी मिल सके। चूंकि, अत्याधुनिक तकनीक उनकी पहुंच से बाहर हैं।
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पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में खेलो इंडिया यूथ गेम्स के दौरान सोमवार को हरियाणा सरकार, राष्ट्रीय खेल विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एससीएसएसआर) नई दिल्ली ने खिलाड़ियों को परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए नई-नई तकनीक बताईं। आईआईटी मद्रास के एनालिटिक्स सेंटर के प्रोफेसर महेष पंचाग्नुला व प्रोफेसर नंदन ने बताया कि अक्सर बड़े खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए विदेश जाते हैं, वहां कोचिंग भी लेते हैं। इसकी बड़ी वजह वहां खेलों से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस है। यह सब अब देश में ही खिलाड़ियों को आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए आईआईटी मद्रास की टीम काम कर रही है।
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तीन मकसद से काम कर रहा एनालिटिक्स सेंटर
प्रोफेसर महेष पंचाग्नुला ने बताया कि एनालिटिक्स सेंटर तीन मकसद लेकर कार्य कर रहा है। पहला मकसद एथलीट के लिए ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम का इंतजाम करना है, जिसमें वह आसानी से तकनीक के माध्यम से अपनी योग्यता को पहचान कर कमियों को दूर कर सकें। दूसरा मकसद एथलीट की परफॉर्मेंस को साइंस व एआई के माध्यम से बढ़ाना है। इसके लिए मॉडल तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले छह महीने से एक साल के अंदर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा खेलों से जुड़ी नई-नई तकनीक के लिए नए-नए स्टॉर्टअप को बढ़ावा देकर ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जिससे तकनीक सस्ती हो।
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पांच प्रोफेसर और एक सीईओ टीम में शामिल
इस कार्य में आईआईटी के पांच प्रोफेसर की टीम लगी हुई है। उनके साथ एक सीईओ भी कार्य कर रहे हैं। नए मॉडल के तहत बॉयो और परफॉर्मेंस मॉर्कर के आधार पर खिलाड़ियों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। उनका मकसद खिलाड़ियों को खेल के दौरान लगने वाली चोट को भी कम करना है ताकि कम से कम ड्रॉप आउट हों।
राष्ट्रीय खेल विज्ञान और अनुसंधान केंद्र के निदेशक ब्रिगेडियर विभु कल्याण नायक ने कहा कि सोमवार को कार्यक्रम में एक छत के नीचे पुराने कोच और वरिष्ठ खिलाड़ी इकट्ठा हुए। इसमें अंजु बॉबी जॉर्ज और डॉ. अजय कुमार बंसल जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी पहुंचे। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। कल्याण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 300 करोड़ रुपये खर्च कर राष्ट्रीय खेल विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र बनाया जा रहा है।