{"_id":"650baead24d3deb2ae0e8f4a","slug":"if-you-want-to-avoid-alzheimer-in-old-age-then-play-mind-games-2023-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व अल्जाइमर दिवस: वृद्धावस्था में भी खेलिए माइंड गेम, याददाश्त नहीं होगी कमजोर, पीजीआई का सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व अल्जाइमर दिवस: वृद्धावस्था में भी खेलिए माइंड गेम, याददाश्त नहीं होगी कमजोर, पीजीआई का सर्वे
Thu, 21 Sep 2023 08:18 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 21 Sep 2023 08:18 AM IST
सार
पीजीआई ने अल्जाइमर ग्रस्त मरीजों के फॉलोअप में की जा रही अनदेखी के कारणों की जांच के लिए 2022 में एक सर्वे किया। डॉ. कार्तिक ने बताया कि सर्वे में अल्जाइमर के 100 मरीजों के परिजनों से प्रश्नावली भरवाई गई। उनसे मरीज को फॉलोअप में न लाने के कारणों के बारे में सवाल पूछे गए।
विज्ञापन
pgi chandigarh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सेवानिवृत्त होने के बाद घर में एकांतवास करने की सोच रहे हैं तो यह आइडिया जल्द से जल्द बदल दें, क्योंकि उस उम्र का एकातंवास आपको अल्जाइमर का शिकार बना सकता है। आपकी याददाश्त तो कमजोर होगी ही, साथ ही कई अन्य तरह की परेशानियां भी तेजी से बढ़ेंगी। ऐसे में उस गंभीर स्थिति से बचना चाहते हैं तो माइंड गेम खेलिए।
खाली समय में गणित के सवाल हल कीजिए, पजल्स और नंबर गेम में मन लगाइए क्योंकि ये खेल आपको एल्जाइमर की चपेट में आने से बचाएंगे। पीजीआई न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ भी इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को क्लीनिकल की बजाय कॉग्नेटिव रिहैबिलीटेशन पर फोकस करने की सलाह दे रहे हैं।
पीजीआई न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. कार्तिक विनय महेश ने बताया कि इस मर्ज के होने के कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। इसलिए बचाव के लिए इलाज नहीं है। मर्ज होने पर उसका प्रबंधन किया जा सकता है। उसके लिए दवा और रिहैबिलीटेशन थेरेपी की मदद ली जाती है।
विज्ञापन
डॉ. कार्तिक ने बताया कि अगर मर्ज शुरुआती दौर में सामने आ जाए तो उस बढ़ने से रोका जा सकता है, लेकिन रेफरल सेंटर होने के कारण पीजीआई में ज्यादातर मामले अंतिम स्टेज में आते हैं। इस मर्ज में मरीज के दिमाग को व्यस्त रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए उन्हें प्रॉब्लम सॉल्वर के रूप में काम करने की सलाह दी जाती है। ऐसा कर उनके न्यूरॉन्स को सक्रिय करने का प्रयास होता है।
वाद्य यंत्र बजाना और नंबर गेम है खास
डॉ. कार्तिक ने बताया कि यह मर्ज 50 से 70 साल के बीच सक्रिय होता है। इसलिए इस उम्र में खुद को दिमागी तौर पर ज्यादा सक्रिय रखने का प्रयास होना चाहिए। वाद्य यंत्र बजाना सीखना इसमें बेहद कारगर है। इसके अलावा संगीत सुनना, अखबार पढ़ना, समाचार सुनना, बागवानी करना, दिमागी करसत से जुड़े गेम खेलना लाभदायक हो सकता है।
अपने ही इलाज में कर रहे अनदेखी
पीजीआई ने अल्जाइमर ग्रस्त मरीजों के फॉलोअप में की जा रही अनदेखी के कारणों की जांच के लिए 2022 में एक सर्वे किया। डॉ. कार्तिक ने बताया कि सर्वे में अल्जाइमर के 100 मरीजों के परिजनों से प्रश्नावली भरवाई गई। उनसे मरीज को फॉलोअप में न लाने के कारणों के बारे में सवाल पूछे गए। 90 प्रतिशत परिजनों ने इसके लिए आर्थिक स्थिति प्रभावित होना, व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होना, तनाव के बढ़ते स्तर, मरीज की देखभाल में कठिनाई और परिवार को समय न दे पाना मुख्य कारण बताया।
डॉ. कार्तिक का कहना है कि आधे से ज्यादा मरीज अपने परिजनों की इन समस्याओं के कारण फॉलोअप में नहीं आते। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए एक विशेष क्लीनिक खोलने की तैयारी है। इसमें ऐसे मरीजों को कॉग्नेटिव रिहैबिलीटेशन का प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे वे इस मर्ज से अपने स्तर पर प्रबंधन सुनिश्चित कर सकें। वहीं, डॉक्टरों और पैरोमेडिकल स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी करने की तैयारी है।
अल्जाइमर क्या है... आप भी जान लें
अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। इसके कारण मरीज की याददाश्त कमजोर हो जाती है और उसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है। आमतौर पर यह वृद्धावस्था में दिमाग के ऊतकों को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। यह डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की याद्दाश्त, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है।
अल्जाइमर के लक्षण
- चीजों को भूलना
- सोचने-समझने में मुश्किल होना
- खासतौर पर शाम के समय मानसिक रूप से भ्रमित होना
- एकाग्रता में कमी, नई चीजें सीखने की क्षमता में कमी
- लोगों को पहचानने में मुश्किल होना
- चीजें रखकर भूल जाना
- रास्ता भूल जाना
- बात और प्रश्नों को बार-बार दोहराने की आदत
- तस्वीर या छवि पहचानने में परेशानी
- बातचीत के दौरान शब्दों को खोजने में कठिनाई
इस पर करें गौर
- व्यायाम की कमी
- मोटापा
- धूम्रपान और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आना
- उच्च रक्तचाप
- उच्च कोलेस्ट्रॉल
- टाइप 2 मधुमेह
अल्जाइमर दे रहा ये भी मर्ज
- अवसाद
- उदासीनता
-समाज से दूरी
- दूसरों पर अविश्वास
- चिड़चिड़ापन और आक्रामकता
- नींद में कमी
- भ्रम की स्थिति
बुजुर्ग इसका रखें ध्यान
- धूम्रपान से बचें
- नियमित रूप से व्यायाम करें
- दिमागी कसरत से जुड़ी गतिविधि करें
- हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें
- अधिक एंटीऑक्सीडेंट लें
- सक्रिय सामाजिक जीवन बनाए रखें
विज्ञापन
खाली समय में गणित के सवाल हल कीजिए, पजल्स और नंबर गेम में मन लगाइए क्योंकि ये खेल आपको एल्जाइमर की चपेट में आने से बचाएंगे। पीजीआई न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ भी इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को क्लीनिकल की बजाय कॉग्नेटिव रिहैबिलीटेशन पर फोकस करने की सलाह दे रहे हैं।
विज्ञापन
पीजीआई न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. कार्तिक विनय महेश ने बताया कि इस मर्ज के होने के कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। इसलिए बचाव के लिए इलाज नहीं है। मर्ज होने पर उसका प्रबंधन किया जा सकता है। उसके लिए दवा और रिहैबिलीटेशन थेरेपी की मदद ली जाती है।
विज्ञापन
डॉ. कार्तिक ने बताया कि अगर मर्ज शुरुआती दौर में सामने आ जाए तो उस बढ़ने से रोका जा सकता है, लेकिन रेफरल सेंटर होने के कारण पीजीआई में ज्यादातर मामले अंतिम स्टेज में आते हैं। इस मर्ज में मरीज के दिमाग को व्यस्त रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए उन्हें प्रॉब्लम सॉल्वर के रूप में काम करने की सलाह दी जाती है। ऐसा कर उनके न्यूरॉन्स को सक्रिय करने का प्रयास होता है।
वाद्य यंत्र बजाना और नंबर गेम है खास
डॉ. कार्तिक ने बताया कि यह मर्ज 50 से 70 साल के बीच सक्रिय होता है। इसलिए इस उम्र में खुद को दिमागी तौर पर ज्यादा सक्रिय रखने का प्रयास होना चाहिए। वाद्य यंत्र बजाना सीखना इसमें बेहद कारगर है। इसके अलावा संगीत सुनना, अखबार पढ़ना, समाचार सुनना, बागवानी करना, दिमागी करसत से जुड़े गेम खेलना लाभदायक हो सकता है।
अपने ही इलाज में कर रहे अनदेखी
पीजीआई ने अल्जाइमर ग्रस्त मरीजों के फॉलोअप में की जा रही अनदेखी के कारणों की जांच के लिए 2022 में एक सर्वे किया। डॉ. कार्तिक ने बताया कि सर्वे में अल्जाइमर के 100 मरीजों के परिजनों से प्रश्नावली भरवाई गई। उनसे मरीज को फॉलोअप में न लाने के कारणों के बारे में सवाल पूछे गए। 90 प्रतिशत परिजनों ने इसके लिए आर्थिक स्थिति प्रभावित होना, व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होना, तनाव के बढ़ते स्तर, मरीज की देखभाल में कठिनाई और परिवार को समय न दे पाना मुख्य कारण बताया।
डॉ. कार्तिक का कहना है कि आधे से ज्यादा मरीज अपने परिजनों की इन समस्याओं के कारण फॉलोअप में नहीं आते। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए एक विशेष क्लीनिक खोलने की तैयारी है। इसमें ऐसे मरीजों को कॉग्नेटिव रिहैबिलीटेशन का प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे वे इस मर्ज से अपने स्तर पर प्रबंधन सुनिश्चित कर सकें। वहीं, डॉक्टरों और पैरोमेडिकल स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी करने की तैयारी है।
अल्जाइमर क्या है... आप भी जान लें
अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। इसके कारण मरीज की याददाश्त कमजोर हो जाती है और उसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है। आमतौर पर यह वृद्धावस्था में दिमाग के ऊतकों को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। यह डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की याद्दाश्त, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है।
अल्जाइमर के लक्षण
- चीजों को भूलना
- सोचने-समझने में मुश्किल होना
- खासतौर पर शाम के समय मानसिक रूप से भ्रमित होना
- एकाग्रता में कमी, नई चीजें सीखने की क्षमता में कमी
- लोगों को पहचानने में मुश्किल होना
- चीजें रखकर भूल जाना
- रास्ता भूल जाना
- बात और प्रश्नों को बार-बार दोहराने की आदत
- तस्वीर या छवि पहचानने में परेशानी
- बातचीत के दौरान शब्दों को खोजने में कठिनाई
इस पर करें गौर
- व्यायाम की कमी
- मोटापा
- धूम्रपान और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आना
- उच्च रक्तचाप
- उच्च कोलेस्ट्रॉल
- टाइप 2 मधुमेह
अल्जाइमर दे रहा ये भी मर्ज
- अवसाद
- उदासीनता
-समाज से दूरी
- दूसरों पर अविश्वास
- चिड़चिड़ापन और आक्रामकता
- नींद में कमी
- भ्रम की स्थिति
बुजुर्ग इसका रखें ध्यान
- धूम्रपान से बचें
- नियमित रूप से व्यायाम करें
- दिमागी कसरत से जुड़ी गतिविधि करें
- हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें
- अधिक एंटीऑक्सीडेंट लें
- सक्रिय सामाजिक जीवन बनाए रखें