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'वाटर मैन' राजेंद्र सिंह बोले- नदियों को समझेंगे और सहेजेंगे नहीं तो सभ्यता व संस्कृति भी नहीं बचेगी

Tue, 05 Nov 2019 01:13 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 05 Nov 2019 01:13 PM IST
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water man rajendra singh lecture in punjab university chandigarh
वाटर मैन राजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़। मैगसेसे पुरस्कार विजेता एवं वाटरमैन के नाम से मशहूर डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति का सीधा संबंध नदियों से होता है। यदि नदियों को नहीं समझेंगे, नहीं सहेजेंगे, नहीं संवारेेंगे तो हमारी सभ्यता और संस्कृति भी नष्ट होने से नहीं बच सकेगी। पूरे कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र सिंह शिक्षक की भूमिका में नजर आए।
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पीयू के हिंदी विभाग के कही-अनकही विचार मंच की ओर से ‘मानो तो मैं गंगा मां हूं’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस व्याख्यान में पर्यावरण एवं जल संरक्षण पर फोकस किया गया। वाटरमैन डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदियां हमारा पोषण करती हैं, इसलिए हम उन्हें मां कहते हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि गंगा-जमुना तहजीब और संस्कृति को जन्म देने वाली गंगा आज अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। यह इसलिए क्योंकि हमने उसे मां न समझकर केवल मैला ढोने वाली गाड़ी समझ लिया है।
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उन्होंने विद्यार्थियों को शपथ दिलवाई कि वह नदियों की सफाई और संरक्षण के लिए प्रयास करेंगे। डॉ. राजेंद्र सिंह ने भगवान शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि भ से भगवान, ग से गगन, व से वायु, अ से अग्नि और न से नदी होता है। इनमें भी सबसे अधिक महत्व नदी का ही है।
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इससे पहले डॉ. राजेंद्र सिंह का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने कहा कि आज के युग की सबसे बड़ी चुनौती जल प्रबंधन की है, जिसमें राजेंद्र सिंह जैसे व्यक्ति समाज का नेतृत्व कर सकते हैं। व्याख्यान में प्रो. सत्यपाल सहगल, डॉ. अशोक कुमार और सामाजिक कार्यकर्ता राजीव रंजन मौजूद रहे।


गंगा साक्षरता यात्रा के बारे में दी जानकारी
वाटरमैन डॉ. राजेंद्र सिंह ने वीसी प्रो. राजकुमार से मुलाकात की। उन्होंने जल संरक्षण के संबंध में अपनी गंगा साक्षरता यात्रा के बारे में वीसी को बताया। वीसी ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में पीयू के संबंधित विभागों के साथ एक कार्य योजना बनाने के लिए भी वह उनकी सहायता लेंगे। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे।
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