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Chandigarh News: जल है तो कल है... जरा सोचिए! चंडीगढ़ में हर साल डेढ़ मीटर तक नीचे जा रहा भूजल स्तर

Fri, 22 Mar 2024 03:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2024 03:22 AM IST
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If there is water, there is tomorrow... just think! Ground water level in Chandigarh is going down by one and a half meter every year.
चंडीगढ़। शहर के भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल शहर का भूजल स्तर 0.32 से 1.55 मीटर नीचे जा रहा है। यह गिरावट न केवल भविष्य के लिए खतरा है बल्कि यह शहर के वर्तमान जल आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि शहर में अभी भी करीब 230 ट्यूबवेलों से 20 एमजीडी पानी निकाला जा रहा है।केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2019 के बीच चंडीगढ़ के भूजल स्तर में 18.66 मीटर से 15.02 मीटर तक की गिरावट आई है। कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से सेक्टर-10 में गिरावट 16 मीटर तो सेक्टर-31 में गिरावट 10 मीटर से अधिक रही है। चंडीगढ़ एनविस सेंटर के डाटा से पता चलता है कि वर्ष 1991 और 2001 के बीच चंडीगढ़ के भूजल स्तर में ज्यादा गिरावट नहीं आई। माना गया कि इस दौरान भूजल स्थिर रहा लेकिन 2001 के बाद इसमें गिरावट देखी जाने लगी।
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वर्ष 2006 तक गिरावट कम रही लेकिन उसके बाद स्थितियां बदल गईं और अब हर साल शहर में भूजल स्तर 0.32 से 1.55 मीटर नीचे जा रहा है। पिछले एक दशक में कुछ रिपोर्टों में 28.5 फीसदी तक की गिरावट का संकेत दिया गया है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट पूरे शहर में एक समान नहीं है। सेक्टर-10 जैसे उत्तरी भागों में 15 वर्षों में 16 मीटर से अधिक की गिरावट देखी गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में 5-8 मीटर की गिरावट देखी गई है।
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प्रति व्यक्ति खपत पूरे देश में सबसे ज्यादा, लीकेज भी 38 फीसदी
एक तरफ जहां देश में प्रति व्यक्ति पानी की खपत के मामले में चंडीगढ़ सबसे आगे है, वहीं दूसरी तरफ करीब 38 फीसदी पानी लीकेज के जरिए बर्बाद हो रहा है। वर्तमान में चंडीगढ़ में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 245 लीटर पानी की खपत है, जो देश में सबसे ज्यादा है। औसतन यह 150 लीटर होना चाहिए। 38 फीसदी पानी लीकेज में बर्बाद होना भी बड़ा आंकड़ा है। इसे 15 फीसदी तक ही होना चाहिए। इसके पीछे का बड़ा कारण 1960 में बिछाई गई पानी की पाइप लाइनें हैं। हाल यह है कि कई बार लीकेज ढूंढने में ही कई घंटे लग जाते हैं। वर्ष 2019 से 2022 के बीच लीकेज के 25131 केस आए। उन्हें ठीक करने पर ही करीब 47 करोड़ रुपये खर्च हो गए।
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सप्लाई बढ़ाना हल नहीं, जागरूकता लाकर पानी की बर्बादी को रोकना अहम
अधिकारियों का कहना है कि इस साल जून में मनीमाजरा में 24 घंटे पानी की परियोजना शुरु हो जाएगी और साल 2029 के अंत तक पूरे शहर में 24 घंटे पानी की सप्लाई का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इससे पानी से जुड़ी कई समस्याओं का हल हो जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ 24 घंटे पानी की सप्लाई देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। लोगों में जागरूकता लाकर पानी की बर्बादी को रोकना भी उतना ही जरूरी है। चंडीगढ़ के लिए पानी की बर्बादी कम करना और जल संरक्षण की आदत डालना समय की मांग है।


भूजल स्तर गिरने का सबसे बड़े कारण हैं ट्यूबवेल
भूजल स्तर में गिरावट के पीछे मुख्य कारण रोजाना चलने वाले 230 ट्यूबवेल हैं, जिससे 20 एमजीडी पानी निकाला जा रहा है। यह पानी ही शहर के एक बड़े हिस्से की जरूरतों को पूरा करते हैं। अन्य कारणों में बढ़ रही शहर की जनसंख्या, अधिक दोहन और सबसे अहम वर्षा जल संचयन की कमी है। चंडीगढ़ के भूजल स्तर में गिरावट एक गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जल संरक्षण के उपायों को तत्काल लागू करने की आवश्यकता है। भूजल शहर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और हमें इसके संरक्षण के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
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