फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   If there is job security in sports then there will be a flood of medals

Chandigarh News: खेल में जॉब सिक्योरिटी हो तो मेडल की लग जाएगी झड़ी

Wed, 30 Jul 2025 12:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 12:14 AM IST
विज्ञापन
If there is job security in sports then there will be a flood of medals

विज्ञापन
चंडीगढ़। यदि खिलाड़ियों को खेल में बेहतर भविष्य की गारंटी मिले तो देश के लिए मेडल लाने वालों की कतार लग सकती है। अमर उजाला कार्यालय सेक्टर-9 में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में महिला खिलाड़ियों और कोचों ने खेल जगत में महिलाओं की भागीदारी, चुनौतियां, सुविधाओं और संभावनाओं पर खुलकर बात की।
कार्यक्रम में खासतौर पर महिला खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं और उनमें सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में स्पेशल ओलंपिक, बॉक्सिंग, फेंसिंग, इनलाइन हॉकी सहित विभिन्न खेलों से जुड़ी महिला कोच और खिलाड़ी शामिल हुईं। सभी ने अपने अनुभव साझा किए और खेल के क्षेत्र में महिलाओं के लिए बेहतर वातावरण बनाने के लिए सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि खेल सिर्फ मैदान में मेहनत करने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ जुड़ी नीतियां, सुविधाएं, जॉब सिक्योरिटी भी जरूरी है। अगर महिला खिलाड़ियों को सही माहौल, प्रशिक्षक व भविष्य की गारंटी मिले तो देश का खेल मानचित्र और चमक सकता है और पदकों की झड़ी लग सकती है।
विज्ञापन


स्पेशल बच्चों को मिले अलग स्पोर्ट्स सेंटर
स्पेशल ओलंपिक भारत चंडीगढ़ चैप्टर की एरिया डायरेक्टर शीतल नेगी ने कहा कि विशेष बच्चों को समझने और सिखाने में थोड़ा अधिक समय जरूर लगता है लेकिन वे सामान्य बच्चों से भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। ऐसे बच्चों के लिए अलग स्पोर्ट्स सेंटर की व्यवस्था होनी चाहिए, जहां उन्हें अनुकूल माहौल मिल सके। उन्होंने बताया कि वह 2027 में लैटिन अमेरिका में होने वाले पैन अमेरिकन गेम्स की तैयारी में जुटी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि स्पेशल बच्चों के लिए विशेष अवॉर्ड की व्यवस्था की जाए ताकि उनका मनोबल और आत्मविश्वास बढ़े।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन्फ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन मेंटेनेंस नहीं
पूर्व अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर और इंटरनेशनल रेफरी डॉ. सोनिया कंवर ने कहा कि खेल इंफ्रास्ट्रक्चर तो है, लेकिन उसके रखरखाव का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। कहा कि जब खिलाड़ी अभ्यास या प्रतियोगिता के लिए किसी मैदान या स्टेडियम में जाते हैं तो वहां स्वच्छ वॉशरूम मिलना बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने यह भी बताया कि आज भी कई खेल ऐसे हैं जिनमें महिला कोच की भारी कमी है। डॉ. कंवर ने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम के चलते खिलाड़ियों को खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। खेल भी प्रभावित होता है। सुझाव दिया कि खिलाड़ियों के लिए वार्षिक परीक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए ताकि वे खेल पर पूरा ध्यान दे सकें।

प्रशासन की पॉलिसी अच्छी
फेंसिंग कोच चरणजीत कौर ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन की खेल नीति ने काफी बदलाव लाया है। प्रशिक्षण के जरिए बच्चे आगे बढ़ रहे हैं। यह भी जरूरी है कि पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों को रोजगार मिले। उन्होंने बताया कि महिला खिलाड़ी जब नेशनल खेलने के लिए बाहर जाती हैं तो वॉशरूम की समस्या बहुत बड़ी चुनौती बन जाती है। इसमें तत्काल सुधार की जरूरत है।


मेडल नहीं तो खिलाड़ी दरकिनार
इनलाइन हॉकी खिलाड़ी रुचि चंदन ने कहा कि खेलों में जॉब सिक्योरिटी न होने के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आगे चलकर खेल छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं खुद खिलाड़ी हूं। अगर मेडल मिल जाए तो सराहना मिलती है लेकिन जो खिलाड़ी थोड़ा पीछे रह जाते हैं उनके लिए कोई योजना नहीं होती। क्या वे खिलाड़ी जरूरी नहीं हैं। क्या उनके पास करिअर की कोई गारंटी नहीं होनी चाहिए। कहा कि यदि खेलों में भी नौकरी और स्थिरता की गारंटी दी जाए, तो युवा ज्यादा संख्या में खेल की ओर रुख करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed