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Chandigarh News: एसटीए में अधिकारी नहीं तो कर्मचारी हुए बेलगाम, सलाहकार धर्मपाल को शिकायत

Thu, 12 Oct 2023 01:42 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Oct 2023 01:42 AM IST
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If not officers then employees became unruly in STA, complaint to advisor Dharampal
चंडीगढ़। शहर के सभी व्यावसायिक वाहनों पर नजर रखने वाला स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) पिछले कई वर्षों से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। विभाग के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। अब इसे लेकर कई टैक्सी ऑपरेटर्स ने मिलकर यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, परिवहन व गृह सचिव नितिन यादव को लिखित में शिकायत भेजी है। टैक्सी ऑपरेटर्स ने एसटीए के वर्क कल्चर पर कई सवाल उठाए हैं। कहा है कि जब भी कोई व्यक्ति किसी काम के लिए सेक्टर-18 स्थित एसटीए दफ्तर जाता है तो अधिकतर कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं होते हैं। वह अपनी मर्जी से ऑफिस आते हैं और जाते हैं। कई बार देखा गया है कि सरकारी ड्यूटी के समय में भी वह अपने निजी काम कर रहे होते हैं। उनमें वरिष्ठ अधिकारियों का कोई डर नहीं बचा है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि एसटीए में कभी भी न सचिव, लॉ ऑफिसर, न एमवीआई और न ही अकाउंट ऑफिसर होते हैं। जूनियर कर्मचारियों पर पूरा दफ्तर छोड़ा हुआ है, जिसकी वजह से कई महत्वपूर्ण फाइलें वर्षों से लटकी हुई हैं। कोई काम समय पर नहीं होता है क्योंकि कर्मचारियों में अधिकारियों का डर ही नहीं रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के नहीं होने से सभी कर्मचारी बेलगाम हो गए हैं। प्रशासन ने ई-ऑफिस लागू किया ताकि कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सके लेकिन एसटीए में वह भी पूरी तरह से फेल है। बिना कोई कारण बताए, कर्मचारियों ने कई फाइलें महीनों से लटका रखी हैं। कोई वरिष्ठ अधिकारी भी नहीं है, जो फाइलों के साइन नहीं होने का किसी कर्मचारी से कारण पूछ सके। इन सब की वजह से लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। उन्होंने जल्द इस पर ध्यान देने की मांग की है।
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2019 से खाली है अतिरिक्त सचिव का पद
एसटीए में सचिव रूपेश कुमार हैं लेकिन उनके पास एडीसी समेत कई अन्य विभागों के चार्ज हैं, जिसकी वजह से वह एसटीए दफ्तर के बजाय डीसी ऑफिस में बैठते हैं। इसके अलावा अप्रैल 2019 से एसटीए के अतिरिक्त सचिव का पद खाली है। 2010 से बाद से सहायक सचिव की भी तैनाती नहीं की गई है। किसी समय जहां एसटीए में छह सीनियर असिस्टेंट होते थे, अब सिर्फ एक रह गया है। अन्य पदों के हालात भी ऐसे ही हैं। एसटीए एक बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है, जो सभी कॉमर्शियल वाहनों को नियंत्रित करता है। साथ ही उनके चालान की राशि को भी देखता है। हर चालान की कीमत हजारों में होती है। ऐसे में कर्मियों की कमी और अधिकारियों की गैरमौजूदगी में कभी भी कोई बड़ी गड़बड़ी हो सकती है।
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स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को इस मामले को गंभीरता से देखना चाहिए। मेरे पास शिकायत आई थी। मैंने परिवहन विभाग को मार्क की है। इस बारे में अपडेट लिया जाएगा।
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- धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक
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