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Highcourt: दोष साबित करने के लिए साक्ष्य पर्याप्त तो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को साबित करना आवश्यक नहीं

Sat, 21 Sep 2024 06:24 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 21 Sep 2024 06:24 AM IST
सार

गुरुग्राम में डकैती करने के लिए कंपनी के गार्ड की हत्या करने के दोषियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर याचिकाकर्ताओं को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। 
 

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If evidence is sufficient to prove guilt, it is not necessary to prove electronic evidence: High Court
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हत्या व डकैती के मामले में पांचों दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य ठोस साक्ष्यों की मौजूदगी हो तो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साबित करने में साक्ष्य अधिनियम का पालन न करने के आधार पर सजा रद्द नहीं की जा सकती।
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याचिका दाखिल करते हुए शंकर, अजय, रफीक, रणजीत और लाला राम ने उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। केस के अनुसार उन्होंने गुरुग्राम में डकैती करने के लिए कंपनी के गार्ड की हत्या की थी। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि पांच से छह लोग दीवार फांद कंपनी में घुसे और गार्ड लक्ष्मण सिंह की हत्या की। ट्रायल कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर याचिकाकर्ताओं को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। 
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याची पक्ष ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष सीसीटीवी फुटेज पर आधारित है, लेकिन साक्ष्य के रूप में उक्त सीसीटीवी फुटेज को पेश करते समय सर्टिफिकेट नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज की सीडी द्वितीयक साक्ष्य है, क्योंकि मूल सर्वर या कंप्यूटर जिसमें सीसीटीवी फुटेज संग्रहीत किया गया था, उसे पेश नहीं किया गया। अभियुक्तों से लूटी गई वस्तुओं की बरामदगी अहम कारक है। 
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रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से यह साबित होता है कि लक्ष्मण की हत्या की थी। लूटे गए कपड़ों के बंडलों, अपराध को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन की बरामदगी और लूटे सामानों की बिक्री से प्राप्त आय साक्ष्यों की श्रृंखला स्पष्ट जुड़ती है। इससे पता चलता है कि याचिकाकर्ताओं ने ही हत्या को अंजाम दिया था। चूंकि फुटेज बिना प्रमाण पत्र के पेश किया गया था, इसलिए यह स्वीकार्य साक्ष्य नहीं है, लेकिन अन्य पुष्टि करने वाले साक्ष्यों की मौजूदगी दोषसिद्धि को साबित करने के लिए पर्याप्त है।
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