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Hindi News ›   Chandigarh ›   If Driver's license is fake, owner is not responsible

ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी तो मालिक जिम्मेदार नहीं: हाईकोर्ट

Sun, 22 Oct 2017 10:49 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 22 Oct 2017 10:49 AM IST
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If Driver's license is fake, owner is not responsible
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
मोटर एक्सीडेंट क्लेम के मामलों में यदि ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी पाया जाता है तो वाहन मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए मोहन फाइबर प्रोडक्ट लिमिटेड को क्लेम राशि का भुगतान करने के पटियाला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को पलट दिया। साथ ही बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश दिए हैं।
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मामला पटियाला में 1994 में हुई एक दुर्घटना से जुड़ा है। पटियाला के अर्बन एस्टेट में मोहन फाइबर प्रोडक्ट लि. के वाहन ने एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी। इसमें स्कूटर सवार स्वर्ण सिंह की मौत हो गई थी। इस टक्कर के बाद स्वर्ण सिंह की विधवा ने क्लेम के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। ट्रिब्यूनल ने पाया था कि ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी है, इसलिए इंश्योरेंस कंपनी भुगतान के लिए बाध्य नहीं है। इसके बाद 60 हजार क्लेम राशि तय करते हुए ड्राइवर और मालिक को समान रूप से भुगतान करने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ मोहन फाइबर और मृतक की पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
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मोहन फाइबर ने क्लेम की राशि को चुनौती देते हुए इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान करने केआदेश जारी करने जबकि मृतक की पत्नी ने क्लेम राशि को बढ़ाने के लिए अपील दाखिल की थी। क्लेम राशि बढ़ाने की अपील हाईकोर्ट ने मृतक की वृद्ध आयु के चलते खारिज कर दी, जबकि मोहन फाइबर की अपील को स्वीकार कर लिया। 
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‘पोते की उम्र 32 तो दादा की आयु 50 कैसे’

If Driver's license is fake, owner is not responsible
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
कोर्ट ने कहा कि वाहन मालिक ने ड्राइविंग टेस्ट लेकर और लाइसेंस देखकर ड्राइवर को नौकरी दी थी। मालिक यदि लाइसेंस के वैध होने को लेकर संतुष्ट है, इतना कानून के नाते काफी है। वाहन मालिक से ड्राइवर के लाइसेंस की वैधता जांचने की अपेक्षा नहीं रखी जा सकती। ऐसे में हाईकोर्ट ने मोहन फाइबर की देनदारी समाप्त करते हुए इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम राशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

‘पोते की उम्र 32 तो दादा की आयु 50 कैसे’
मृतक की पत्नी द्वारा क्लेम राशि के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में अपील करते हुए कहा था कि उसके पति 50 साल के थे और पांच हजार रुपये महीना कमाते थे। इस दलील का विरोध करते हुए इंश्योरेंस कंपनी ने कहा कि मृतक के पोते की उम्र 32 वर्ष है। ऐसे में 32 वर्ष के व्यक्ति का दादा 50 साल का कैसे हो सकता है।

वहीं हाईकोर्ट में क्लेम बढ़ाने की अपील में मृतक की पत्नी का दावा था कि उसकी उम्र 60 वर्ष है और उसके पति उससे दो साल बड़े थे। ऐसे में उसकी आयु 62 वर्ष रही होगी। बीमा कंपनी अपनी दलील पर कायम रही। इस पर हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के निष्कर्ष को सही मानते हुए कहा कि मृतक की आयु अधिक रही होगी और ऐसे में क्लेम की राशि बढ़ाने की अपील खारिज की जाती है। 
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