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अदालत के आदेश का पालन संभव न हो तो नहीं बनता अवमानना का मामला
Fri, 08 Jan 2021 12:41 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 08 Jan 2021 12:41 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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न्यायालय द्वारा दिए किसी आदेश का पालन यदि संभव ही न हो तो उस स्थिति में न्यायालय की अवमानना का मामला नहीं बनता है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न करवाने में विफल रहने पर सेशन कोर्ट फरीदाबाद के अधिकारियों द्वारा दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है।
चंडीगढ़ निवासी आशीष पर फरीदाबाद ट्रायल कोर्ट में हमला हुआ था और उसकी शिकायत पर मामला भी दर्ज किया गया था। नवंबर 2014 को हुए हमले के बाद दिसंबर 2015 को आशीष ने न्यायालय परिसर की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करवाने की मांग की थी। न्यायालय द्वारा आरटीआई के माध्यम से सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार करने के बाद याची ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि सीसीटीवी फुटेज न तो निजी है और न ही इसके देने से किसी भी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरा है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने जिला और सत्र न्यायालय फरीदाबाद के अधिकारियों को आशीष को सीसीटीवी फुटेज प्रदान करने का आदेश भी दिया था।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी आशीष को सीसीटीवी फुटेज नहीं दी गई। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई की मांग की गई।
इस पर जिला और सत्र न्यायालय फरीदाबाद के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि वे संबंधित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने में विफल रहे थे। इसका कारण यह था कि सीसीटीवी फुटेज को केवल 20 दिन तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद यह अपने आप मिट जाती है। इसे रिकवर करने का भी कोई साधन नहीं है।
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चंडीगढ़ निवासी आशीष पर फरीदाबाद ट्रायल कोर्ट में हमला हुआ था और उसकी शिकायत पर मामला भी दर्ज किया गया था। नवंबर 2014 को हुए हमले के बाद दिसंबर 2015 को आशीष ने न्यायालय परिसर की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करवाने की मांग की थी। न्यायालय द्वारा आरटीआई के माध्यम से सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार करने के बाद याची ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी आशीष को सीसीटीवी फुटेज नहीं दी गई। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई की मांग की गई।
इस पर जिला और सत्र न्यायालय फरीदाबाद के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि वे संबंधित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने में विफल रहे थे। इसका कारण यह था कि सीसीटीवी फुटेज को केवल 20 दिन तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद यह अपने आप मिट जाती है। इसे रिकवर करने का भी कोई साधन नहीं है।