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बहन-भाई एक ही शहर में हैं तो..
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चंडीगढ़। कोरोना के कारण रक्षाबंधन पर बहनें भाई को राखी बांधने में भी संक्रमण के डर से भयभीत हैं। कोई एक शहर से दूसरे शहर की दूरी तय करने में डर रहा है, तो कोई संक्रमित इलाके से अपने भाई या अपनी बहन के घर जाकर रक्षा के इस पर्व को मनाने से कतरा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बहन भाई एक ही शहर में हैं तो फिर डर की बात नहीं है।
होम्योपैथी के विशेषज्ञ डॉ. एचके खरबंदा का कहना है कि लेटेस्ट स्टडी के अनुसार यदि मीटिंग 30 मिनट से कम व दोनों द्वारा मास्क सहित हो तो करोना फैलने का खतरा कम होता है इसलिए दोनों को मास्क लगाकर 10 से 20 मिनट में इस पवित्र बंधन को बांध लेना चाहिए, सबसे अधिक सेफ तो यह है कि आप बाहर बरामदे में ही बैठकर व मास्क पहनकर इस रस्म को निभाएं ताकि बोलते या छींकते वक्त माइक्रो ड्राप्लेट से बच पाएं व सरफेस कांटेक्ट भी कम से कम हो, यदि कमरे के अंदर हों तो खिड़कियां खोल दें ताकि क्रॉस वेंटिलेशन की वजह से ड्राप्लेट हवा के बहाव के जरिए कमरे से निकल जाएं।
शारीरिक दूरी का पालन भी जरूरी
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते शारीरिक दूरी का पालन जरूरी हो गया है। जो लोग दूसरे शहरों या कोविड-19 के हाईलोड इलाकों से आ रहे हैं, उन्हें अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। अपनी, अपनों और समाज की सुरक्षा के लिए यह जरूरी भी है। अच्छी बात यह है कि कोरोना के संकट के दौर में भी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र सजाने के लिए बहनों के उत्साह में किसी भी तरह की कमी नहीं आई है। कोरोना से बचाव के मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित राखी मनाई जा सकती है।
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होम्योपैथी के विशेषज्ञ डॉ. एचके खरबंदा का कहना है कि लेटेस्ट स्टडी के अनुसार यदि मीटिंग 30 मिनट से कम व दोनों द्वारा मास्क सहित हो तो करोना फैलने का खतरा कम होता है इसलिए दोनों को मास्क लगाकर 10 से 20 मिनट में इस पवित्र बंधन को बांध लेना चाहिए, सबसे अधिक सेफ तो यह है कि आप बाहर बरामदे में ही बैठकर व मास्क पहनकर इस रस्म को निभाएं ताकि बोलते या छींकते वक्त माइक्रो ड्राप्लेट से बच पाएं व सरफेस कांटेक्ट भी कम से कम हो, यदि कमरे के अंदर हों तो खिड़कियां खोल दें ताकि क्रॉस वेंटिलेशन की वजह से ड्राप्लेट हवा के बहाव के जरिए कमरे से निकल जाएं।
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शारीरिक दूरी का पालन भी जरूरी
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते शारीरिक दूरी का पालन जरूरी हो गया है। जो लोग दूसरे शहरों या कोविड-19 के हाईलोड इलाकों से आ रहे हैं, उन्हें अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। अपनी, अपनों और समाज की सुरक्षा के लिए यह जरूरी भी है। अच्छी बात यह है कि कोरोना के संकट के दौर में भी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र सजाने के लिए बहनों के उत्साह में किसी भी तरह की कमी नहीं आई है। कोरोना से बचाव के मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित राखी मनाई जा सकती है।
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