संजीव वर्मा VS अशोक खेमका: अब वर्मा ने सरकार को लिखे छह पत्र, कहा- पुलिस पर दबाव, CBI जांच में सामने आएगा सच
संजीव वर्मा ने भी अशोक खेमका के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। वर्मा का आरोप है कि 12 साल पहले हरियाणा वेयर हाउसिंग कोरपोरेशन के पूर्व प्रबंध निदेशक रहते हुए अशोक खेमका ने नियुक्तियों में गड़बड़ी की थी। इस मामले में हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जोड़ने से पहले सरकार की अनुमति नहीं लेने की बात कही थी।
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पहले से दर्ज केस में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जुड़ने पर रोहतक मंडलायुक्त आईएएस संजीव वर्मा दोनों मामलों की जांच सीबीआई से कराने पर अड़े हैं। आईएएस संजीव वर्मा का दावा है कि वह मामले की सीबीआई से जांच कराने को लेकर अब तक छह पत्र मुख्य सचिव को लिख चुके हैं। वह दोबारा से हरियाणा सरकार से इस बारे में अपील करेंगे कि आईएएस अशोक खेमका और उन पर दर्ज दोनों मामलों को सीबीआई को सौंपा जाए। सीबीआई जांच में ही सच और झूठ का पता सकेगा।
अब यह सरकार के ऊपर है कि वह सीबीआई जांच करवाए या न। आमतौर पर सीबीआई जांच उन मामलों में करवाई जाती है। जिन मामलों में राज्य पुलिस जांच करने में सफल साबित नहीं होती। ऐसे मामलों में जांच सीबीआई को सौंपने में राज्य सरकार की किरकिरी भी होगी। हालांकि मुख्य सचिव कार्यालय तक आईएएस वर्मा के यह पत्र पहुंच चुके हैं। जिसमें यह लिखा गया है कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच करवानी है तो सीबीआई से करवाई जाए। छोटी-मोटी जांच से बेहतर है कि सरकार सीबीआई जांच करवा कर दूध का दूध और पानी का पानी करे।
मालूम हो संजीव वर्मा ने भी अशोक खेमका के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। वर्मा का आरोप है कि 12 साल पहले हरियाणा वेयर हाउसिंग कोरपोरेशन के पूर्व प्रबंध निदेशक रहते हुए अशोक खेमका ने नियुक्तियों में गड़बड़ी की थी। इस मामले में हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जोड़ने से पहले सरकार की अनुमति नहीं लेने की बात कही थी।
हरियाणा सरकार ने कोर्ट में कहा था कि आईएएस खेमका के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज करने से पहले सरकार से मंजूरी लेना जरूरी था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया था। बल्कि बाद में सरकार को इसके लिए पत्र लिखा था, जिसे सरकार ने इनकार कर दिया था। इससे अशोक खेमका को बड़ी राहत मिल गई थी।
वहीं, अभिलेखागार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खेमका द्वारा संजीव वर्मा के खिलाफ पंचकूला के सेक्टर 5 थाने में केस दर्ज कराया गया था। अब एफआईआर में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जोड़ दी गई है। खेमका ने वर्मा पर उत्पीड़न और मानहानि का आरोप लगाया था। इसी केस में नई धारा जुड़ते ही आईएएस संजीव वर्मा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वर्मा का कहना है कि पहले से दर्ज एफआईआर में अब भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जोड़ दी गई लेकिन इसका आधार क्या है, ये नहीं बताया गया है। दोनों ही अधिकारियों में पिछले काफी समय से विवाद चल रहा है। दोनों अधिकारियों में ट्वीट वार भी चलता रहता है।
मैं पहले दिन से मेरी खुद की भी जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहा हूं। साथ ही आईएएस अशोक खेमका और मेरे मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए मुख्य सचिव को छह पत्र लिख चुका है। सीबीआई जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। इसलिए सरकार को ये दोनों ही मामले सीबीआई को सौंप देने चाहिए। संजीव वर्मा, मंडलायुक्त, रोहतक।