बेटी तुझे सलाम! पैसा नहीं था, फिर भी बनी आईएएस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो सारी बाधाएं रेड कार्पेट बनकर आपका स्वागत करने कदमों बिछ जाती हैं। चंडीगढ़ में स्पेशल सेक्रेटरी फाइनेंस के पद पर तैनात आईएएस भावना गर्ग और उनकी तीन बहनों ने कुछ ऐसी ही मिसाल कायम कर लोगों को बेटियों की वास्तविक अहमियत को बताया है।
भावना गर्ग के जन्म के बाद उनका परिवार जालंधर कैंट से कपूरथला शिफ्ट हो गया। वहीं से सफलता का सफर शुरू हुआ। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते जब कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने का सपना साकार नहीं हुआ तो भावना गर्ग ने अपनी कक्षा में टॉप कर कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला लिया।
न केवल दाखिला लिया बल्कि अपनी बहनों के लिए भी रास्ते बनाती चली गईं। उनकेनक्शे कदम पर चलते हुए तीन छोटी बहनों रचना, इति और मिताली ने भी टॉप कर कॉन्वेंट स्कूल में स्कॉलरशिप लेकर पढ़ाई की। भावना गर्ग ने कॉन्वेंट के बाद 11वीं की पढ़ाई गवर्नमेंट स्कूल से की।
बिना कोचिंग लिए मिला आईआईटी में दाखिला
भावना गर्ग ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं रही की वह कोचिंग ले पातीं। जालंधर में पढ़ते हुए आईआईटी केबारे में सुना और अप्लाई कर दिया। 642वीं रैंक आने पर आईआईटी कानपुर में दाखिला लेने का फैसला किया।
320 स्टूडेंट्स केबैच में सिर्फ 10 ही लड़कियां थीं। जिसके चलते कुछ लोगों ने कानपुर भेजने पर एतराज जताते हुए पेरेंट्स को चंडीगढ़ ‘पैक’ में दाखिला दिलाने को कहा। लेकिन मेरी लगन और जज्बा देख पैरेंट्स ने मुझे कानपुर जाने की परमिशन दी।
आईएएस में किया ऑल इंडिया टॉप
आईआईटी करने के बाद 1999 में भावना गर्ग ने आईएएस में ऑल इंडिया टॉप किया। जिसकेबाद पंजाब कैडर में चुनी गईं। बिना कोचिंग केखुद ही लक्ष्य बनाकर उसको भेदा। चंडीगढ़ में स्पेशल सेक्रेटरी फाइनेंस केजिस पद पर पहले भावना गर्ग केपति आईएएस अजॉय शर्मा तैनात रहे, उनकेपंजाब लौटने केबाद वह उसी पद पर आसीन हैं।
चारों बहनें मिसाल
भावना ने अपनी छोटी बहन रचना को खुद कोचिंग दी। चार बहन और एक भाई में से सबसे होशियार रचना अपने बैच की मेडिकल टॉपर रहीं। वह दिल्ली एम्स में रेडियोलॉजिस्ट केपद पर कार्यरत हैं।
रचना से छोटी बहन इति दिल्ली आईआईटी और कोलकाता आईआईएम से पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेश में सेटल हो गईं। सबसे छोटी मिताली ने बीकॉम किया। भाई अंकित इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
एक ही कमरे में रहकर पली बढ़ी चारों बहनें
उन्होंने बताया कि चारों बहनें एक ही कमरें में रहकर पली-बढ़ीं। एक बार उनकी दोस्त ने कहा कि आखिर कैसे चारों बहनें एक ही कमरें में रहकर पढ़ती हैं। वह भी बिना इन्वर्टर व जनरेटर जैसी सुविधा के। अपना खर्च निकालने केलिए वह आईआईटी में भी बच्चों कोचिंग देती रही। साथ ही छुट्टियों में जालंधर लौटने पर 11वीं व 12वीं केबच्चों को पढ़ाया।
कपड़ों की बजाए बुक खरीदीं
उनकेपरिवार का रहन सहन बिल्कुल साधारण था। पिता आनंद कुमार गर्ग जेई केपद पर रहे। मां राधा गर्ग गृहणी हैं। आर्थिक स्थिति को देखते हुए चारों बहने कपड़े इत्यादि पर खर्च करने की बजाए किताबें खरीदने को तरजीह देते रहे।
मेड की बेटियों को पढ़ा रहीं
भावना गर्ग की दो बेटियां हैं। 10 वर्ष की खुशी और 7 वर्ष की सुहानी। बेटियां आज सब कुछ करने में सक्षम हैं। वह अपनी मेड की तीन बेटियों को भी पढ़ने में सहयोग कर रही हैं।