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पति की शर्मनाक करतूत, इलाज के नाम पर पत्नी की किडनी निकलवा कर बेच दी

Sat, 24 Mar 2018 12:49 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 24 Mar 2018 12:49 PM IST
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Husband Sold Wife Kidney for Dowry, Petition filed in Punjab Haryana Highcourt
Court case
एक पति की शर्मनाक करतूत सामने आई है, उसने पति की किडनी निकलवा कर बेच दी। मामले में हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। पति ने दहेज के लिए पत्नी की किडनी इलाज के नाम पर निकलवा कर बेच दी। मामले की जानकारी मिलने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के सभ्य समाज में कोई कैसे इतना गिर सकता है।
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कोर्ट ने केंद्र सरकार को केंद्र व राज्यों के ऑर्गन ट्रांसप्लांट, कितने सफल कितने असफल, कितने डोनर आदि की जानकारी केस में नियुक्त एमिकस क्यूरी अल्का सरीन को सौंपने के आदेश दिए हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अल्का सरीन ने बताया कि उनकी जानकारी में मामला आया है जहां पति ने पत्नी के इलाज के नाम पर दहेज के लिए किडनी निकलवा कर बेच दी।
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हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि आज के समाज में ऐसा कैसे संभव है। कैसे बिना किसी की अनुमति के उसके अंग को निकाला जा सकता है। एमिकस क्यूरी ने कहा कि उन्हें देश में कितने ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए, कितने सफल, कितने असफसल और कितने डोनेशन हुए यह ब्यौरा सौंपा जाए। हाईकोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को यह पूरी जानकारी मुहैया करवाने के आदेश दिए हैं।
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याचिका में यह जानकारी दी गई

Husband Sold Wife Kidney for Dowry, Petition filed in Punjab Haryana Highcourt
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ के एडवोकेट रंजन लखनपाल ने कहा था कि देश में पहला अंग प्रत्यारोपण 1970 में हुआ था और 1994 में मानव अंग प्रत्यारोपण एक्ट को लागू किया गया। बाद में इसे बदल कर ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एंड टिश्यू एक्ट बनाया गया।

याची ने कहा कि हाल ही में उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट करवाया और इस दौरान पाया कि किसी व्यक्ति को अंग की आवश्यकता हो तो उसे भाग्य पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हरियाणा, पंजाब और यूटी में केवल पीजीआई ही ऐसा संस्थान है जहां अंगों का ट्रांसप्लांट संभव है। लेकिन यहां डाक्टरों की कमी है और ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक उपकरण व आर्गंस को रखने के लिए उचित व्यवस्था भी नहीं है।

तमिलनाडु में सबसे ज्यादा आर्गन ट्रांसप्लांट
याची ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिस प्रकार की व्यवस्था है उसी का नतीजा है कि तमिलनाडु में सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट होते हैं। याची ने कहा कि हर साल एक्सीडेंट में 70 हजार लोगों की मौत हो जाती है जो ब्रेन डेड की वजह से होती है। यदि इन लोगों के परिजनों की काउंसलिंग की जाए तो इनमें से प्रत्येक के अंगों को दान कर 9 लोगों को जीवन दिया जा सकता है।

याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि अंग दान की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए और साथ ही अंग अलॉट करने की स्थितियों को भी स्पष्ट किया जाए। इसके साथ ही हरियाणा और पंजाब में ऐसे हॉस्पिटल स्थापित किए जाएं जहां अंगों का प्रत्यारोपण हो सके। हर हास्पिटल में नोडल ऑफिसर की नियुक्ति हों और साथ ही अंगों के पूल का पूरा ब्योरा नेशनल लेवल पर तैयार किया जाए ताकि आवश्यकता के समय इस पूल से अंग उपलब्ध करवाए जा सकें।

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देश में 2 लाख लोगों को पड़ती है किडनी की जरूरत
लखनपाल ने याचिका में कहा कि देश में हर वर्ष करीब 2 लाख लोग ऐसे होते हैं जिन्हें किडनी की जरूरत होती है लेकिन करीब 5 हजार को ही उपलब्ध हो पाती है। वहीं लीवर की जरूरत हर वर्ष करीब 1 लाख लोगों को होती है लेकिन इनमें से केवल 1 हजार को सही समय पर मिल पाता है। दिल के मामले में भी स्थिति को ज्यादा बेहतर नहीं है। हर वर्ष करीब 50 हजार लोगों को दिल का ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत होती है लेकिन केवल 10 हजार को ही मिल पाता है।

 
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