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Haryana: मानवाधिकार आयोग को ही न्याय की दरकरार, चेयरमैन और सदस्य न होने से लंबित छह हजार से ज्यादा केस

Fri, 21 Jun 2024 03:37 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 21 Jun 2024 03:37 PM IST
सार

हरियाणा मानवाधिकार आयोग में बीते साल अप्रैल चेयरमैन जस्टिस एके मित्तल का कार्यकाल समाप्त होने पर आयोग के ही सदस्य दीप भाटिया को कार्यवाहक चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने सितंबर तक आयोग का कार्यकाल संभाला। इस दौरान उन्होंने कई केस सुनें और पीड़ितों को न्याय भी दिलाया। सितंबर में उनका भी कार्यकाल खत्म हो गया।

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Human Rights Commission of Haryana has neither chairman nor member
हरियाणा मानवाधिकार आयोग में चेयरमैन की पोस्ट खाली - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

शोषित और पीड़ितों को न्याय दिलाने वाले हरियाणा के मानवाधिकार आयोग को खुद न्याय की दरकरार है। बीते साल सितंबर से आयोग में सुनवाई ठप पड़ी है। आयोग में आखिरी सुनवाई सितंबर के पहले हफ्ते में हुई थी। 

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आयोग के पास न तो चेयरमैन और न ही सदस्य हैं। पिछले दस महीने से पीड़ित आयोग के चक्कर काट रहे हैं। न्यास की आस में आने वाले पीड़ितों को सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही हैं। करीब छह हजार केस लंबित पड़े हैं। इनमें ढाई हजार केस पुराने हैं, जबकि बाकी नए केस हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि नियुक्ति के प्रयास चल रहे हैं। चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति जल्द कर दी जाएगी।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग में बीते साल अप्रैल चेयरमैन जस्टिस एके मित्तल का कार्यकाल समाप्त होने पर आयोग के ही सदस्य दीप भाटिया को कार्यवाहक चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने सितंबर तक आयोग का कार्यकाल संभाला। इस दौरान उन्होंने कई केस सुनें और पीड़ितों को न्याय भी दिलाया। सितंबर में उनका भी कार्यकाल खत्म हो गया। उसके बाद से सरकार ने आयोग में किसी भी सदस्य व चेयरमैन की नियुक्ति नहीं की है। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि राज्य सरकार ने अभी तक माननीय अध्यक्ष/माननीय सदस्यों की नियुक्ति नहीं की है। लिहाजा सभी को सुनवाई के लिए निर्धारित मामलों में तारीखें दी जाएंगी।
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हाईकोर्ट में लिखित आश्वासन के बावजूद नहीं की नियुक्तियां
मानवाधिकार आयोग में सुनवाई नहीं होने पर एक पीड़ित शिवचरण ने हाईकोर्ट में अपील की। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा तो सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि मानवाधिकार आयोग में 31 मार्च 2024 तक नियुक्तियां कर दी जाएगी, मगर आश्वासन के बावजूद नियुक्तियां नहीं हुईं। इस पर पीड़ित ने फिर से हाईकोर्ट ने दरवाजा खटखटाया तो सरकार ने कहा कि आचार संहिता है, इसलिए नियुक्तियां नहीं कर सकते। बाद में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आचार संहिता हटने के 21 दिन के अंदर नियुक्ति कर दी जाए। आचार संहिता हटे 14 दिन बीत गए हैं। अब मात्र छह दिन बचे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियां की सारी प्रक्रिया 2023 में हो गई थी। बस सरकार को नियुक्ति पर फैसला करना है, मगर अफसर फाइलों को इधर से उधर लटकाने में जुटे हैं।

जून व सितंबर में निकाला था विज्ञापन, आवेदन लेकर रख लिए गए
चेयरमैन के रिटायरमेंट के बाद हरियाणा सरकार ने जून और फिर सितंबर में आयोग में नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला। आवेदन भी आए और सरकार की ओर से उनकी जांच परख करने के बाद रख लिया गया है। बताया गया कि सरकार ने कुछ लोगों के नाम भी फाइनल कर रखे हैं। अब पैनल के सदस्यों को बैठक कर नियुक्ति करनी है। आयोग में चेयरमैन और सदस्य की नियुक्ति पैनल करता है। पैनल में हरियाणा सीएम, विधानसभा स्पीकर, गृहमंत्री और नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं। सीएम के पास ही गृह मंत्री का चार्ज है। इसलिए पैनल में तीन सदस्य ही शामिल होंगे। आयोग का चेयरमैन रिटायर्ड चीफ जस्टिस या हाईकोर्ट का जज हो सकते हैं। एक सदस्य हाईकोर्ट का रिटायर्ड जज या जिला सेशन का रिटायर्ड जज (सात सात का अनुभव) हो सकते हैं, जबकि दूसरे सदस्य कोई ऐसा व्यक्ति जिसके पास मानवाधिकार का व्यवहारिक अनुभव और ज्ञान हो।


गरीब पीड़ितों के लिए सबसे बड़ा न्याय का मंदिर
मानवाधिकार आयोग गरीबों के लिए सबसे बड़ा न्याय का मंदिर है। इसमें सुनवाई के लिए कोई पैसा नहीं लगता। पीड़ित सादे कागज या मेल पर शिकायत भेज सकता है। आयोग इस पर ही केस दर्ज कर सुनवाई करता है। सबसे बड़ी बात है कि आयोग तीन से छह महीने के भीतर केसों का निपटारा भी कर देता है।

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