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मानवाधिकार कार्यकर्ता बोले- कश्मीर में हालात इमरजेंसी से भी बदतर, धारा 370 हटाना असांविधानिक
Mon, 16 Sep 2019 09:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 16 Sep 2019 09:17 AM IST
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हाल-ए-कश्मीर
- फोटो : अमर उजाला
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कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35-ए हटाए जाने के विरोध में रविवार को मोहाली से चंडीगढ़ तक निकाले जाने वाले रोष मार्च की अनुमति न मिलने की यहां पहुंचे कुछ लोगों ने निंदा की। रोष मार्च में शामिल होने पहुंचे इन लोगों ने मोहाली प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करते हुए कश्मीर पर लिए गए फैसले को असांविधानिक बताया। इन लोगों का कहना था कि कश्मीर में हालात इमरजेंसी से भी बदतर हैं।
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दिल्ली से आई मानवाधिकार कार्यकर्त्ता डॉ. नवशरन ने केंद्र सरकार पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सिर्फ दो व्यक्ति इस समय न्यायपालिका व संविधान का दुरुपयोग कर पूरे देश पर मनमर्जी थोप रहे हैं। उन्होंने अपनी बात रखने के लिए जमा होने वाले लोगों पर पाबंदी लगाने पर पंजाब सरकार को भी मानवाधिकारों का विरोधी बताया।
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नाटककार डॉ. साहिब सिंह ने कहा कि अगर सरकारें इसी तरह लोगों को अपनी बात कहने से रोकेंगी तो वह सरकारों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर गीत गाएंगे। शिक्षक नेता यशपाल ने कहा कि मोहाली प्रशासन उल्टी-सीधी दलीलें देकर रैली पर पाबंदी को जायज ठहरा रहा है।
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तर्कशील नेता राम सरवन लक्खोवाली व मुंबई से आए हर्ष ठाकुर ने भी रैली में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की। इन लोगों के अलावा जरनैल सिंह क्रांति, डॉ. मेघा सिंह व सतनाम सिंह दाऊं भी मौजूद थे।
कश्मीरी 40 दिन से घरों में बंद, सरकार उनके खुश होने का कर रही झूठा प्रचार
कबायली हकों के लिए काम करने वाले गांधीवादी कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार ने कहा कि कश्मीर को लेकर भारत सरकार का फैसला असांविधानिक है। कश्मीर के लोग पिछले 40 दिनों से अपने घरों में बंद हैं। सरकार कश्मीरियों के खुश होने का प्रचार कर रही है, लेकिन उनके अस्तित्व की चिंता किसी को नहीं है। कश्मीर में पिछले 40 दिनों से अखबार और इंटरनेट सहित संचार सेवाएं ठप हैं। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जमीन खरीदने पर पाबंदी तो सभी पहाड़ी राज्यों में है, फिर कश्मीर को लेकर इस तरह के अटपटे तर्क क्यों दिए जा रहे हैं।
मजदूरों व किसानों का कश्मीर मुद्दे पर आना अच्छा संकेत
पंजाब लोक सभ्याचारक मंच के प्रधान अमोलक सिंह का कहना था कि लोग कश्मीर मुद्दे पर अपनी भावना जाहिर करना चाहते थे, लेकिन पंजाब में सरकार ने उन्हें रोककर अपना लोक विरोधी चेहरा जाहिर किया है। कश्मीर के लिए मजदूरों व किसानों द्वारा आवाज उठाए जाने को उन्होंने अच्छा संकेत मानते हुए कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग को इसके लिए आगे आना चाहिए।
कबायली हकों के लिए काम करने वाले गांधीवादी कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार ने कहा कि कश्मीर को लेकर भारत सरकार का फैसला असांविधानिक है। कश्मीर के लोग पिछले 40 दिनों से अपने घरों में बंद हैं। सरकार कश्मीरियों के खुश होने का प्रचार कर रही है, लेकिन उनके अस्तित्व की चिंता किसी को नहीं है। कश्मीर में पिछले 40 दिनों से अखबार और इंटरनेट सहित संचार सेवाएं ठप हैं। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जमीन खरीदने पर पाबंदी तो सभी पहाड़ी राज्यों में है, फिर कश्मीर को लेकर इस तरह के अटपटे तर्क क्यों दिए जा रहे हैं।
मजदूरों व किसानों का कश्मीर मुद्दे पर आना अच्छा संकेत
पंजाब लोक सभ्याचारक मंच के प्रधान अमोलक सिंह का कहना था कि लोग कश्मीर मुद्दे पर अपनी भावना जाहिर करना चाहते थे, लेकिन पंजाब में सरकार ने उन्हें रोककर अपना लोक विरोधी चेहरा जाहिर किया है। कश्मीर के लिए मजदूरों व किसानों द्वारा आवाज उठाए जाने को उन्होंने अच्छा संकेत मानते हुए कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग को इसके लिए आगे आना चाहिए।