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Chandigarh News: एचएसवीपी ने कालका ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के लिए अलॉट की 7.94 एकड़ भूमि
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-लघु सचिवालय के लिए भी 10.26 एकड़ भूमि अलॉट करने की हाईकोर्ट को दी जानकारी
-25 प्रतिशत राशि जमा न करवाने के चलते पहले रद्द कर दी गई थी दोनों की अलॉटमेंट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि दोनों के लिए भूमि अलॉट कर दी गई है। ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के लिए जहां 7.94 एकड़ तो वहीं लघु सचिवालय के लिए 10.26 एकड़ भूमि अलॉट की गई है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल ने याचिका दाखिल करते हुए लघु सचिवालय और ज्यूडिशियल कांप्लेक्स का निर्माण कराने की मांग की थी। एचएसवीपी ने जवाब दाखिल करते हुए बताया है कि ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और आवासीय परिसर के लिए 7.94 एकड़ भूमि अलॉट की गई है। लघु सचिवालय व अधिकारियों के आवास के लिए 10.26 एकड़ जमीन अलॉट की गई है। इससे पहले गृह एवं जेल विभाग द्वारा पॉलिसी अनुसार 25 प्रतिशत राशि जमा न करवाने के चलते अलॉटमेंट रद्द कर दी गई थी। 28 मार्च 2024 को रिवाइज्ड डिमार्केशन प्लान मंजूर किया गया है। हालांकि एचएसवीपी ने इमारतों के निर्माण को उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर बताया। इससे पूर्व 25 मार्च को निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू कर इसे समय से पूरा करने की मांग को लेकर लीगल नोटिस भी भेजा था जिसके बावजूद कोई कार्यवाही न होने पर अब विजय बंसल ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स कालका अभी मार्किट कमेटी पंचकूला के सब यार्ड कार्यालय में कार्यरत है। यहां न तो वकीलों के लिए और न ही आम लोगों के लिए कोई सुविधा है। जगह के अभाव के चलते ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स का कार्य भी प्रभावित होता है। 2013 में अस्थाई रूप से ही कालका मंडी में कोर्ट चल रही है। प्रमुख रूप से कालका में अस्थाई रूप से कार्यरत न्यायिक परिसर में न तो लॉयर्स चैंबर्स हैं और न ही लिटिगेंट हाल। परिसर में बार रूम, लाइब्रेरी और सही पार्किंग तक नहीं है।
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-25 प्रतिशत राशि जमा न करवाने के चलते पहले रद्द कर दी गई थी दोनों की अलॉटमेंट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि दोनों के लिए भूमि अलॉट कर दी गई है। ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के लिए जहां 7.94 एकड़ तो वहीं लघु सचिवालय के लिए 10.26 एकड़ भूमि अलॉट की गई है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल ने याचिका दाखिल करते हुए लघु सचिवालय और ज्यूडिशियल कांप्लेक्स का निर्माण कराने की मांग की थी। एचएसवीपी ने जवाब दाखिल करते हुए बताया है कि ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और आवासीय परिसर के लिए 7.94 एकड़ भूमि अलॉट की गई है। लघु सचिवालय व अधिकारियों के आवास के लिए 10.26 एकड़ जमीन अलॉट की गई है। इससे पहले गृह एवं जेल विभाग द्वारा पॉलिसी अनुसार 25 प्रतिशत राशि जमा न करवाने के चलते अलॉटमेंट रद्द कर दी गई थी। 28 मार्च 2024 को रिवाइज्ड डिमार्केशन प्लान मंजूर किया गया है। हालांकि एचएसवीपी ने इमारतों के निर्माण को उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर बताया। इससे पूर्व 25 मार्च को निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू कर इसे समय से पूरा करने की मांग को लेकर लीगल नोटिस भी भेजा था जिसके बावजूद कोई कार्यवाही न होने पर अब विजय बंसल ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स कालका अभी मार्किट कमेटी पंचकूला के सब यार्ड कार्यालय में कार्यरत है। यहां न तो वकीलों के लिए और न ही आम लोगों के लिए कोई सुविधा है। जगह के अभाव के चलते ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स का कार्य भी प्रभावित होता है। 2013 में अस्थाई रूप से ही कालका मंडी में कोर्ट चल रही है। प्रमुख रूप से कालका में अस्थाई रूप से कार्यरत न्यायिक परिसर में न तो लॉयर्स चैंबर्स हैं और न ही लिटिगेंट हाल। परिसर में बार रूम, लाइब्रेरी और सही पार्किंग तक नहीं है।