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HSPGC: हरियाणा सरकार भी नहीं मानेगी हार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Jul 2014 09:44 PM IST
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हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) मामले मे केंद्र के दखल से नाराज हरियाणा सरकार भी दो-दो हाथ करने को मैदान में उतर आई है।
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मोदी सरकार की सलाह को दरकिनार कर हरियाणा सरकार ने उल्टा केंद्र सरकार को ही अपना पत्र वापस लेने का आग्रह किया है। प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर आश्चर्य जताया कि केंद्र सरकार एचएसजीपीसी कानून को लेकर पंजाब सरकार के रवैये पर खामोश क्यों है?
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सुरजेवाला ने राजनाथ को छह पेज का पत्र लिखकर कहा कि हरियाणा विधानसभा से पारित एचएसजीपीसी कानून पूरी तरह से वैध है और केंद्रीय गृह सचिव की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव को 18 जुलाई को लिखा पत्र देश के संघीय ढांचे और लोकतंत्र का अपमान है।
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केंद्र सरकार ने यह पत्र लिखकर हरियाणा के ढाई करोड़ लोगों और उनके चुने प्रतिनिधियों का घोर अपमान किया है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री के निर्देश पर उनकेमंत्री, सांसद, विधायकों से लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुने सदस्य हरियाणा के विभिन्न गुरुद्वारे का दौरा कर और वहां डेरा जमाकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था खराब करने में लगे हैं।
उन्होंने आश्चर्य जताया कि केंद्र सरकार मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनकी पार्टी की इन गतिविधियों पर खामोश क्यों हैं। सुरजेवाला ने कहा कि गृह मंत्रालय को खुद ही पंजाब और हरियाणा में जारी इन गतिविधियों को लेकर अपनी केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने के साथ समुचित उपाय भी करने चाहिए थे।
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा विधानसभा ने यह कानून बनाकर कोई गलत कार्य नहीं किया है। बल्कि प्रदेश के सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा किया है। उनको गुरु सेवा का अधिकार दिया है।
उन्होंने कहा कि यह कानून पंजाब पुनर्गठन कानून 1966 की धारा 77 के तहत बनाया गया है और जिस 1925 के सिख गुरुद्वारा कानून का हवाला केंद्रीय गृह सचिव ने हरियाणा के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में दिया था, उसमें खुद 1953 से 1961 के बीच 14 संसोधन हो चुके हैं। वैसे भी यह कानून आजादी से पहले का है और हरियाणा के पूर्ण राज्य बन जाने के बाद उसे इस तरह का कानून बनाने का अधिकार है।
सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार को याद रखना चाहिए कि दिल्ली के गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए अलग कानून है और इसी तरह महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्तश्री हजूर साहिब और बिहार के तख्त श्री पटना साहिब के लिए भी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर का 1925 का कानून अमल में नहीं आता है। इसलिए हरियाणा सरकार ने कोई भी गलत कार्य नहीं किया है।