चंडीगढ़ का ये हाल: अब तक नहीं बना बच्चों का कोविड अस्पताल, तीसरी लहर से कैसे लड़ेंगे
जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि काम पूरी रफ्तार से चल रहा है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि यह काम कब तक चलेगा और कब पूरा होगा।
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कोरोना की तीसरी लहर ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग तैयारियां पूरी करने की बजाय सुस्त पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार तीसरी लहर में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर आने वाला है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को बच्चों के लिए अलग कोविड-19 आईसीयू हॉस्पिटल बनाने का निर्देश दिया था। बजट स्वीकृत हुए भी कई महीने गुजर गए हैं। 15 नवंबर तक बच्चों के कोविड-19 आईसीयू हॉस्पिटल का काम पूरा हो जाना था, लेकिन यहां स्थिति कुछ और ही है। 15 नवंबर के बाद से कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन विभाग का रवैया अब भी शिथिल बन हुआ है।
जीएमएसएच-16 के नर्सिंग हॉस्टल के भवन में प्रस्तावित बच्चों के आईसीयू वाले अस्पताल को लेकर अभी तक कोई कार्यवाही शुरू नहीं की गई है जबकि उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया 3 महीने पहले ही शुरू कर दी गई थी। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि काम पूरी रफ्तार से चल रहा है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि यह काम कब तक चलेगा और कब पूरा होगा।
बने बनाए भवन में स्थापित होने हैं आईसीयू
बच्चों के कोविड डेडीकेटेड आईसीयू वाले अस्पताल के लिए अलग से भवन बनाने की भी जरूरत नहीं है। इसे जीएमएसएच- 16 स्थित नर्सिंग हॉस्टल के खाली पड़े भवन में ही स्थापित किया जाना है। स्वास्थ्य विभाग को केवल आईसीयू की व्यवस्था के अनुरूप भवन की आंतरिक बनावट को बदलना है, लेकिन इस छोटे से काम को 3 से 4 महीने में पूरा नहीं किया जा सका है।
- 3 करोड़ के इस योजना के अंतर्गत अस्पताल में 32 बेड के आईसीयू वाले अलग कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल तैयार करना था
- अस्पताल परिसर स्थित नर्सिंग हॉस्पिटल के भवन को डेडिकेटेड हॉस्पिटल का देना था रूप, अब तक व्यवस्था पहले जैसी
- उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया 3 महीने से चल रही
बच्चों के लिए कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाने का काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा। -डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच-16