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हाईकोर्ट ने पूछा- कितने सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामले लंबित?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 09 Jan 2018 10:03 AM IST
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- फोटो : Demo Pics
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=पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा और पंजाब के एडवोकेट जनरल से उनके राज्यों में सांसदों और विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामलों का ब्योरा मांगा है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने दोनो एजी को पत्र जारी कर उनसे यह जानकारी मांगी है।
हाईकोर्ट द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सांसदों और विधायकों पर किस धारा के तहत, किस पुलिस स्टेशन व किसी तिथि को मामला दर्ज किया गया है यह ब्योरा सौंपा जाए। हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई इस जानकारी को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र द्वारा लिए गए स्टैंड से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि दागी सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे के लिए सरकार 12 स्पेशल कोर्ट का गठन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया था कि एक साल में इनका गठन होगा। इसके लिए सरकार ने योजना तैयार कर ली है और वित्त मंत्रालय से इसकी मंजूरी भी मिल गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा था कि कितने सांसद और विधायकों के खिलाफ मामले लंबित हैं इसके आकलन के लिए और समय दिया जाए। राजनीति का अपराधीकरण रोकने की ओर बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह एमपी, एमएलए पर चल रहे आपराधिक केसों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर स्पेशल कोर्ट बनाए और बताए कि इसमें कितना फंड लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा था कि 2014 में जिन 1581 एमएलए, एमपी पर आपराधिक केस दर्ज थे, उनमें से कितनों को सजा हुई और कितने बरी हुए। एडीआर के मुताबिक 1581 सांसदों और विधायकों के खिलाफ साढ़े 13 हजार केस लंबित हैं।
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हाईकोर्ट द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सांसदों और विधायकों पर किस धारा के तहत, किस पुलिस स्टेशन व किसी तिथि को मामला दर्ज किया गया है यह ब्योरा सौंपा जाए। हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई इस जानकारी को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र द्वारा लिए गए स्टैंड से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें केंद्र सरकार ने कहा था कि दागी सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे के लिए सरकार 12 स्पेशल कोर्ट का गठन करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया था कि एक साल में इनका गठन होगा। इसके लिए सरकार ने योजना तैयार कर ली है और वित्त मंत्रालय से इसकी मंजूरी भी मिल गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा था कि कितने सांसद और विधायकों के खिलाफ मामले लंबित हैं इसके आकलन के लिए और समय दिया जाए। राजनीति का अपराधीकरण रोकने की ओर बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह एमपी, एमएलए पर चल रहे आपराधिक केसों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर स्पेशल कोर्ट बनाए और बताए कि इसमें कितना फंड लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा था कि 2014 में जिन 1581 एमएलए, एमपी पर आपराधिक केस दर्ज थे, उनमें से कितनों को सजा हुई और कितने बरी हुए। एडीआर के मुताबिक 1581 सांसदों और विधायकों के खिलाफ साढ़े 13 हजार केस लंबित हैं।
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