फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Amritsar News ›   How did situation reached Operation Blue Star, ten main reason

आखिर, ऑपरेशन ब्लू स्टार तक कैसे पहुंची नौबत, 10 प्रमुख कारण

Mon, 06 Jun 2016 09:34 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़।
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Mon, 06 Jun 2016 09:34 AM IST
How did situation reached Operation Blue Star, ten main reason
स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई 'ऑपरेशन ब्लूस्टार"
सिख धर्म के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई 'ऑपरेशन ब्लूस्टार" से पंजाब की समस्या विश्व के प्रमुख समाचार माध्यमों की सुर्खियों में आई।


 पंजाब समस्या की शुरुआत 1970 के दशक के अंत में अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित मांगों को लेकर शुरू हुई थी। 1978 में पंजाब की मांगों पर अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया।


इसके मूल प्रस्ताव में सुझाया गया था कि भारत की केंद्र सरकार का केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर अधिकार हो जबकि अन्य सब विषयों पर राज्यों के पास पूर्ण अधिकार हों। वे ये भी चाहते थे कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले।
विज्ञापन

अकालियों से निरंकारियों से झड़प

How did situation reached Operation Blue Star, ten main reason
ऑपरेशन ब्लू स्टार - फोटो : फाइल फोटो
अकालियों की पंजाब संबंधित मांगें ज़ोर पकड़ने लगीं। अकालियों की प्रमुख मांगें थीं-चंडीगढ़ पंजाब की ही राजधानी हो, पंजाबी भाषी क्षेत्र पंजाब में शामिल किए जाएं, नदियों के पानी के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय की राय ली जाए।

विश्लेषकों के मुताबिक इंदिरा गांधी की सरकार ने तीन बार मसला सुलझाने के लिए बात की थी। इसके साथ वे यह भी चाहते थे कि 'नहरों के हेडवर्क्स' और पन-बिजली बनाने के मूलभूत ढाँचे का प्रबंधन पंजाब के पास हो, फ़ौज में भर्ती क़ाबिलियत के आधार पर हो और इसमें सिखों की भर्ती पर लगी कथित सीमा हटाई जाए और अखिल भारतीय गुरुद्वारा क़ानून बनाया जाए।

इस बीच अकाली कार्यकर्ताओं और निरंकारियों के बीच अमृतसर में 13 अप्रैल 1978 को हिंसक झड़प हुई। इस घटना को पंजाब में चरमपंथ की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है। विश्लेषक मानते हैं कि शुरुआत में सिखों पर अकाली दल के प्रभाव को कम करने के लिए कांग्रेस ने सिख प्रचारक जरनैल सिंह भिंडरावाले को परोक्ष रूप से प्रोत्साहन दिया।

उनका मानना है कि कांग्रेस का मकसद था कि अकालियों के सामने सिखों की मांगें उठाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति को खड़ा किया जाए जो उनको मिलने वाले समर्थन में सेंध लगा सके।

केंद्र सरकार पर उठे सवाल
अकाली दल भारत की राजनीतिक मुख्यधारा में रहकर पंजाब और सिखों की मांगों की बात कर रहा था, लेकिन उसका रवैया ढुलमुल माना जाता था। उधर इन्हीं मुद्दों पर जरनैल सिंह भिंडरावाले ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए केंद्र सरकार को दोषी ठहराना शुरू किया।

वे विवादास्पद राजनीतिक मुद्दों और धर्म और उसकी मर्यादा पर नियमित तौर पर भाषण देने लगे। जहां बहुत से लोग उनके भाषणों को भड़काऊ मानते थे वहीं अन्य लोगों का कहना था कि वे सिखों की जायज़ मांगों और धार्मिक मसलों की बात कर रहे हैं।

तीन जून 1984 तक भारतीय सेना स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर चुकी थी। पंजाब में हिंसक घटनाएं बढ़ने लगीं। सितंबर 1981 में हिंद समाचार-पंजाब केसरी अख़बार समूह के संपादक लाला जगत नारायण की हत्या हुई। जालंधर, तरन तारन, अमृतसर, फ़रीदकोट और गुरदासपुर में हिंसक घटनाएं हुईं और कई लोगों की जान गई। (साभार: बीबीसी)

1981 में पंजाब में हुई थी व्यापक हिंसा

How did situation reached Operation Blue Star, ten main reason
ऑपरेशन ब्लू स्टार - फोटो : फाइल फोटो
भिंडरावाले के ख़िलाफ़ लगातार हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगने लगे, लेकिन कांग्रेस सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने इस बारे में कम से कम दो बार इन घटनाओं में उनका हाथ न होने की बात कही।

कांग्रेस पर लगातार ये आरोप लगते रहे कि उसकी केंद्र और राज्य सरकारों ने भिंडरावाले के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना तो दूर उन्हें रोकने की भी कोई कोशिश नहीं की।

सितंबर 1981 में ही भिंडरावाले ने महता चौक गुरुद्वारे के सामने गिरफ़्तारी दी, लेकिन वहां एकत्र भीड़ और पुलिस के बीच गोलीबारी हुई और ग्यारह व्यक्तियों की मौत हो गई।

 पंजाब में हिंसा का दौर शुरू हो गया। लोगों को भिंडरावाले के साथ जुड़ता देख अकाली दल के नेताओं ने भी भिंडरावाले के समर्थन में बयान देने शुरू कर दिए। अक्तूबर 1981 में भिंडरावाले को रिहा कर दिया गया।


लगातार जारी था विरोध
1982 में वे चौक महता गुरुद्वारा छोड़ पहले स्वर्ण मंदिर परिसर में गुरु नानक निवास और इसके बाद सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त से अपने विचार व्यक्त करने लगे।

अकाली दल ने सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने के ख़िलाफ़ जुलाई 1982 में अपना 'नहर रोको मोर्चा' छेड़ रखा था, जिसके तहत अकाली कार्यकर्ता लगातार गिरफ़्तारियां दे रहे थे।

लेकिन स्वर्ण मंदिर परिसर से भिंडरावाले ने अपने साथी ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फ़ैडरेशन के प्रमुख अमरीक सिंह की रिहाई को लेकर नए मोर्चे या अभियान शुरू किया। अकालियों ने अपने मोर्चे का भिंडरावाले के मोर्चे में विलय कर दिया और धर्म युद्ध मोर्चे के तहत गिरफ़्तारियां देने लगे। उन्होंने भिंडरावाले की मांगें भी अपना लीं। (साभार: बीबीसी)

1983 में डीआईजी अटवाल की हत्या

How did situation reached Operation Blue Star, ten main reason
ऑपरेशन ब्लू स्टार - फोटो : फाइल फोटो
उधर पंजाब में हिंसक घटनाएं लगातार बढ़ती चली गईं। यहां तक कि पटियाला के पुलिस उपमहानिरीक्षक के दफ़्तर में भी बम विस्फोट हुआ। पंजाब के उस समय के मुख्यमंत्री दरबारा सिंह पर हमला हुआ।

फिर अप्रैल 1983 में एक अभूतपूर्व घटना घटी। पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक एएस अटवाल की दिन दहाड़े स्वर्ण मंदिर परिसर में गोली मारकर तब हत्या कर दी गई जब वे वहाँ माथा टेक कर बाहर निकल रहे थे।

पुलिस के मनोबल की दशा इससे पता चलती है कि मामले की जांच करते हुए बाद में पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल ने पाया कि उस समय घटनास्थल के आसपास लगभग सौ पुलिसकर्मी थे और उनमें से आधे हथियारों से लैस थे। लेकिन अटवाल का शव इस घटना के करीब दो घंटे बाद तक वहीं पड़ा रहा।

कुछ ही महीने बाद जब पंजाब रोडवेज़ की एक बस में घुसे बंदूकधारियों ने पहली बार हिंदुओं को मार डाला तो इंदिरा गांधी सरकार ने पंजाब में दरबारा सिंह की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर दिया और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।


पंजाब में बिगड़े हालात
पंजाब में स्थिति बिगड़ती चली गई और 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार से तीन महीने पहले हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 298 हो गई थी।

अकाली राजनीति के जानकारों के अनुसार, ऑपरेशन ब्लूस्टार से पहले इंदिरा गांधी सरकार की अकाली नेताओं के साथ तीन बार बातचीत हुई। आख़िरी चरण की बातचीत फ़रवरी 1984 में तब टूट गई जब हरियाणा में सिखों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई।

एक जून को भी स्वर्ण मंदिर परिसर और उसके बाहर तैनात पुलिसकर्मियों के बीच गोलीबारी हुई, लेकिन तब तक वहाँ ये आम बात बन गई थी।

दो जून को परिसर में हज़ारों श्रद्धालुओं ने आना शुरू कर दिया था क्योंकि गुरु अरजन देव का गुरुपर्व शुरू होने वाला था। जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश को संबोधित किया तो ये स्पष्ट हो गया कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि भारत सरकार कोई कार्रवाई कर सकती है। (साभार: बीबीसी)

रेल-बस सेवा रोकी, कार्रवाई और सिखों में रोष

How did situation reached Operation Blue Star, ten main reason
ऑपरेशन ब्लू स्टार - फोटो : फाइल फोटो
पंजाब से आने-जाने वाली रेलगाड़ियों और बस सेवाओं पर रोक लग गई, फ़ोन कनेक्शन काट दिए गए और विदेशी मीडिया को राज्य से बाहर कर दिया गया।

तीन जून तक भारतीय सेना अमृतसर में प्रवेश कर स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर चुकी थी। चार जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी, लेकिन चरमपंथियों की ओर से इतना तीखा जवाब मिला कि पांच जून को बख़्तरबंद गाड़ियों और टैंकों का इस्तेमाल किया गया।

भीषण ख़ून-ख़राबा हुआ, अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया। स्वर्ण मंदिर पर भी गोलियां चलीं और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पुस्तकालय बुरी तरह जल गया।

भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया।

सिख संगठनों का विरोध
लेकिन इन सब आंकड़ों को लेकर अब तक विवाद चल रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हज़ारों में है। इसका भारत सरकार खंडन करती आई है।

इस कार्रवाई से सिख समुदाय को बहुत ठेस पहुंची। कई प्रमुख सिख बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाए कि स्थिति को इतना ख़राब क्यों होने दिया गया कि ऐसी कार्रवाई करने की ज़रूरत पड़ी।

सिखों और कांग्रेस पार्टी के बीच दरार पैदा हो गई जो उस समय और गहरा गई जब दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी।

इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से कांग्रेस और सिखों की बीच की खाई और चौड़ी हो गई। शिरोमणि अकाली दल के साथ-साथ कट्टरपंथी सिख पार्टियां धार्मिक और राजनीतिक मंच पर बार-बार ऑपरेशन ब्लू स्टार के घाव की चर्चा करने लगे। (साभार: बीबीसी)

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed