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प्रशासन का सवाल : पानी की दर घटाने पर घाटा कैसे पूरा करेगा निगम

Sat, 15 May 2021 07:46 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 15 May 2021 07:46 PM IST
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How corporation recover loss by reducing the rate of water
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन नगर निगम से एक बार फिर पूछेगा कि पानी की दर घटाने पर घाटा कैसे पूरा करेगा। नगर निगम का जबाव आने के बाद पानी की दर घटाने या फिर वही रखने पर विचार किया जाएगा। इससे पहले भी प्रशासन ने यही आपत्ति लगाकर फाइल वापस भेज दी थी। मार्च माह की सदन की बैठक में फिर से दर घटाकर एजेंडा प्रशासन को भेज दिया गया था।
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चंडीगढ़ में पानी की बढ़ी दर को घटाने वाली फाइल को अधिकारियों ने फुटबॉल बना दिया है। नगर निगम यूटी प्रशासन के पास और प्रशासन नगर निगम के पाले में बॉल फेंक रहा है। फिलहाल अभी लोगों को पानी की बढ़ी दर के हिसाब से बिलों का भुगतान करना होगा। निगम आयुक्त केके यादव ने कहा है कि निगम को हर साल 105 करोड़ का घाटा हो रहा है। यह स्थिति सदन के सामने रखी गई, लेकिन सदन ने पानी की दर कम करने का ही प्रस्ताव पास किया।
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नगर निगम ने साल 2019 में पानी की बढ़ी दर का एजेंडा सदन में पास कर प्रशासन के पास भेज दिया था। बीते साल अगस्त में प्रशासन ने इसका ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया। फरवरी की बैठक में भाजपा पार्षद पानी की दरों में संशोधन के लिए टेबल एजेंडा ले आए। इसे लेकर निगम आयुक्त और पार्षद अरुण सूद में काफी बहस भी हुई। इसके बाद एजेंडा पास कर प्रशासन को भेज दिया गया। हालांकि, निगम आयुक्त ने इस पर आपत्ति लगा दी थी।
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245 करोड़ का खर्च, 140 करोड़ लाने का लक्ष्य
नगर निगम इस साल पानी की आपूर्ति पर 245 करोड़ खर्च करेगा। निगम ने पानी की बढ़ी दर के आधार पर 140 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य रखा है। वहीं, निगम को 105 करोड़ खुद वहन करना होगा। निगम आयुक्त का कहना है कि साल 2011 के बाद से शहर में पानी की दर नहीं बढ़ी है, इसलिए रेट बढ़ाना जरूरी था, जिस पर सदन ने सहमति दी थी।
दोपहर की आपूर्ति बंद करने का प्रस्ताव ठुकराया
नगर निगम आयुक्त ने सदन में भाजपा की ओर से दी गई दो स्लैब को कम करने के साथ दोपहर की आपूर्ति बंद करने का प्रस्ताव दिया था। इससे निगम को हो रहा 12 करोड़ का घाटा बच सकता था, लेकिन सदन ने आपूर्ति बंद न करके साथ सीवर सेस पर भी रुपये घटा दिए। इस पर आयुक्त ने आपत्ति लगा दी।

क्या कहते हैं अधिकारी
प्रशासक की ओर से हम निगम से यही पूछेंगे कि इतना घाटा वह पूरा कैसे करेगा। पानी की दर बढ़ाने के बावजूद निगम को घाटा हो रहा है तो दाम घटाने के बाद होने वाले घाटे की भरपाई कैसे होगी।
-अरुण गुप्ता, गृह सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन
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