हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बनी सोसाइटियों को बड़ा झटका
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शहर के सेक्टर-49 व 50 में हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बनी सोसाइटी के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से अहम फैसला आया है। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के सोसाइटी में विकास कार्य करवाने जैसे ट्रांसफारमर लगाने के लिए उन्हीं से खर्च वसूलने के फैसले को सही करार दिया है।
आदेशों के तहत सोसाइटी में होने वाले विकास कार्य के लिए सरकार, प्रशासन और विभाग खर्च वसूलने का हकदार है। 16 साल की प्रशासन और सोसाइटी की कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला चंडीगढ़ प्रशासन के हक में आया है और सभी सोसाइटियों की याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
चंडीगढ़ की कई हाउसिंग सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चंडीगढ़ प्रशासन की 14 फरवरी 2000 की अधिसूचना को रद करने की अपील की थी। अधिसूचना के तहत प्रशासन ने हाउसिंग बोर्ड से जमीन पाने वाली सोसाइटी को निर्देश जारी कर सोसाइटी के अंदर बिजली ट्रांसफामर सुविधा लेने के लिए सोसाइटी को राशि जमा करवाने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए प्रशासन के हक में सुनाया फैसला
सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि जब उन्होंने प्रशासन से जमीन ली थी, उस दौरान किए गए समझौते में ऐसा कोई जिक्र नहीं था। ऐसे में इस तरह की कोई राशि वसूल नहीं की जा सकती है।
एडवोकेट विकास चतरथ ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रशासन व इन सोसाइटियों के बीच किसी भी तरह का समझौता हुआ ही नहीं। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड जिसने इन सोसाइटी को जमीन दी, उसके व सोसाइटी के बीच जमीन का समझौता हुआ है, लेकिन सोसाइटी के निर्माण के बाद उसमें बिजली व अन्य उपकरण इंस्टाल करने के लिए सोसाइटी को विभाग को शुल्क अदा करना ही पड़ेगा।
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन की दलील को स्वीकार करते हुए सोसाइटी की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अगर प्रशासन किसी भी हाउसिंग सोसाइटी में बिजली ट्रांसफारमर व अन्य विकास का कोई काम करवाता है तो वह चार्ज वसूल कर सकता है।