हुड्डा सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं मोदी!
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हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा हरियाणा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एचएसजीपीसी) के गठन के फैसले से पीछे नहीं हटते हैं तो केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ प्रेसिडेंशियल रिफरेंस यानी राष्ट्रपति संदर्भ लाने का कदम उठा सकती है।
इसके तहत राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से इस मसले पर राय मांग सकते हैं। कानून मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को यह राय भी भेजी है कि अगर राज्य सरकार विधानसभा में पारित हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन बिल पर अड़ी रही तो हुड्डा सरकार को बर्खास्त भी किया जा सकता है।
गृह मंत्रालय ने मांगी है कानून मंत्रालय से राय
इस हालात से निबटने के लिए गृह मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से राय मांगी थी। कानून मंत्रालय ने सरकार को तीन राय भेजी है।
उनमें पहली राय यह है कि किसी तरह राज्यपाल को इस बिल को निरस्त करने के लिए मनाया जाए। अगर रास्ता नहीं निकलता है तो केंद्र सरकार प्रेसिडेंशियल रिफरेंस का विकल्प अपनाए।
इससे भी बात न बने तो तीसरे विकल्प के तौर पर राज्य सरकार को बर्खास्त भी किया जा सकता है। गौरतलब है कि एचएसजीपीसी का तीखा विरोध कर रहे पंजाब के अकाली दल का एसजीपीसी पर पूरा दबदबा है। अकाली दल भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का सबसे भरोसेमंद घटक है।
केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के बिना एसजीपीसी में बदलाव संभव नहीं
गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक देश भर के गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एसजीपीसी) का गठन केंद्र में कानून बना कर किया गया था। लिहाजा इसमें कोई भी बदलाव केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के दखल के बिना नहीं किया जा सकता। लेकिन आने वाले विधानसभा चुनाव पर नजर टिकाए कांग्रेसी मुख्यमंत्री हुड्डा ने हरियाणा के लिए अलग प्रबंधन कमेटी के गठन का कानूनी रास्ता अख्तियार किया है।
उधर, अगले महीने रिटायर हो रहे राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया गृह मंत्रालय के बिल को निरस्त करने के अनुरोध पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दे रहे। गौरतलब है कि कांग्रेस के नजदीकी माने जाने वाले राज्यपालों को एक-एक कर हटा रही एनडीए सरकार ने पहाड़िया को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा है क्योंकि उनका कार्यकाल अगले महीने खत्म हो रहा है। सरकारी हलकों में चर्चा है कि इस हालात से केंद्र और राज्य की राजनीति और गरमाएगी।
मामले पर संसद में हुआ जमकर हंगामा
इस मामले में मंगलवार को भी संसद के दोनों सदनों में जमकर हुए हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित हुई। अन्नाद्रमुक ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कांग्रेस और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सफाई की मांग की। जबकि कांग्रेस ने दोनों ही सदनों में जज से जुड़ा मामला होने के कारण इस मुद्दे को उठाने देने पर नाराजगी जाहिर की।
सोमवार को काटजू ने दावा किया था कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने सहयोगी दल के दबाव में न केवल जिला जज को मद्रास हाईकोर्ट में जज बनवाया था, बल्कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी राजनीतिक दबाव के आगे झुक गए थे।
संसद में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2005 में पीएमओ ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम से संबंधित जज के नाम पर विचार करने के लिए कहा था। कॉलेजियम द्वारा यह अनुरोध ठुकराए जाने के बाद कानून मंत्रालय ने इस मामले में एक और नोट भेजा था।
हरियाणा सरकार कुर्बानी को तैयार : चट्ठा
एचएसजीपीसी मामले पर केंद्र के रुख के बाद हरियाणा सरकार ने भी पीछे न हटने का ऐलान किया है। प्रदेश के वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा ने कहा है कि हरियाणा सरकार अब इस मामले में पीछे नहीं हटेगी। सरकार प्रदेश के सिखों के साथ है। अगर एचएसजीपीसी मसले पर केंद्र हरियाणा सरकार को डिसमिस भी कर दे, तो परवाह नहीं है।
सिखों के हक के लिए सरकार इससे भी बड़ी कुर्बानी देने को तैयार है। चट्ठा मंगलवार को अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने सोच समझ कर कानून बनाया है। इस मामले को न तो राज्य सरकार वापस लेगी और न ही रेफरेंस के लिए राष्ट्रपति को भेजेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश सरकार को डराने का काम कर रही है, लेकिन हम डरेंगे नहीं।
एडहाक कमेटी का गठन शीघ्र: हुड्डा
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एचएसजीपीसी की एडहॉक कमेटी का गठन शीघ्र कर दिया जाएगा। मंगलवार को पत्रकारों के साथ औपचारिक बातचीत में उन्होंने इसके संकेत दिए। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस विषय में विस्तार से बात नहीं की, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक अमला इस संदर्भ में बैठकें कर रहा है।