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चश्मे वाली दीदी का कमाल, जच्चा-बच्चा पहलवान

Fri, 02 May 2014 10:12 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 02 May 2014 10:12 AM IST
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Honour to Female Health Worker of PGI

स्लम बस्ती इंदिरा कालोनी में साल 2000 से पहले जन्म लेने वाले नवजात काफी कमजोर होते थे। उनका वजन करीब डेढ़ से दो किलो के बीच में रहता था। मां का एचबी (हीमोग्लोबिन) भी दस ग्राम से कम रहता था, लेकिन जब से इंदिरा कालोनी में चश्मे वाली दीदी की एंट्री हुई है, तब से हर जच्चा-बच्चा तंदुरुस्त होने लगा है।

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अब कालोनी में जन्म लेने वाला बच्चे का वजन कम से कम तीन किलो है और मांओं का एचबी 11, 12, 14, या फिर 16 रहता है। यहां तक कालोनी की हर युवती और महिला को अच्छी तरह से पता है कि उन्हें आयरन की गोली कब और कैसे खानी है? 27 हजार की आबादी वाली बस्ती के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का श्रेय सुनीता शर्मा को जाता है।
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पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की फीमेल हेल्थ वर्कर सुनीता को कालोनी में लोग चश्मे वाली दीदी के नाम से जानते हैं। वे पिछले 18 साल से कालोनी के बीच रहकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं।
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उनकी इस मेहनत को अब भारत के राष्ट्रपति सम्मान देने जा रहे हैं। 12 मई को उन्हें नेशनल फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड-2014 से नवाजा जाएगा।

जरूरतमंदो की भी मदद
कालोनी में जब भी किसी जरूरतमंद के घर में शादी होती है तो सुनीता उसमें कुछ ने कुछ योगदान जरूर करती हैं। कालोनी में यदि सेनिटेशन की दिक्कत आ जाए या फिर सीनियर सिटीजन की पेंशन में कोई बाधा हो तो लोग सुनीता से ही संपर्क करते हैं।

ऐसे लोगों की मदद के लिए पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर के सहयोग से पुअर पेशंट फंड भी बनाया गया है। इस फंड से कालोनी के लोगों की मदद की जाती है। जरूरतमंदों की सुनीता पहचान करती हैं।


कालोनी का डिलीवरी ट्रेंड बदला
जब मुझे इंदिरा कालोनी की जिम्मेदारी सौंपी गई तो 70 प्रतिशत डिलीवरी घर पर ही होती थी। इससे जच्चा-बच्चा की जिंदगी खतरे में रहती थी। सबसे पहले इस ट्रेंड को बदलने का फैसला लिया। घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं का सर्वे किया। फिर हास्पिटल में रजिस्ट्रेशन कराया। अब स्थिति यह है कि कालोनी की 98 प्रतिशत डिलीवरी सरकारी हास्पिटल में होती है। दो प्रतिशत वो डिलीवरी हैं, जो गर्भवती होने के बाद अपने गांव चली जाती हैं।
-सुनीता शर्मा, फीमेल हेल्थ वर्कर, पीजीआई

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