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होममेड फूड को लेकर अनोखी रिसर्च, मिलेगा टूरिज्म को बढ़ावा

Sun, 14 Jun 2015 12:23 PM IST
विनीत तोमर /अमर उजाला, रोहतक
विनीत तोमर /अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 14 Jun 2015 12:23 PM IST
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homemade traditional food related research in mdu rohtak

होटलों में पिज्जा और चाइनीज फूड के साथ आपको अन्य व्यवसायिक व्यंजन तो आसानी से मिल जाएंगे, लेकिन हरियाणा के होटलों में जब इनके साथ-साथ घरों का ट्रेडिशनल खाना भी मिले तो बात ही कुछ और होगी।

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इससे न केवल हरियाणा की पहचान होगी, बल्कि पयर्टकों की नजरों में प्रदेश के आतिथ्य में भी चार चांद लगेंगे। इसी उद्देश्य के साथ एमडीयू के आईएचटीएम में पिछले दो साल से चल रही रिसर्च में प्रदेश के घरों में बनने वाले परंपरागत खाने के पर कार्य किया जा रहा है।
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यह है रिसर्च की थीम

homemade traditional food related research in mdu rohtak

एमडीयू के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट में दो वर्ष पूर्व ‘समुदाय उन्मुख राज्य मार्ग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा में मौजूद पाक कला प्रथाओं का मूल्यांकन एवं प्रचार आंकलन’ नाम से रिसर्च शुरू की गई थी। इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. आशीष दहिया के नेतृत्व में चल रही इस रिसर्च में शोधार्थियों ने प्रदेश भर के गांव और घरों में जाकर सर्वे किया।

इसमें हरियाणवी खाने की डाक्यूमेंट्री तैयार की गई, जिसमें देखा गया कि हरियाणा के घरों में बनने वाले भोजन की पाक विधाएं कौन-कौन सी है, किस तरह उन्हें तैयार किया जाता है और सामान्य भोजन को कैसे और बेहतर बनाया जाए होटलों में पर्यटकों को परोसा जा सके। ढाई साल के इस प्रोजेक्ट के लिए यूजीसी की ओर से इंस्टीट्यूट को करीब आठ लाख रुपये की ग्रांट आवंटित हुई थी।

अब तक मिली यह उपलब्धि

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अभी तक चली रिसर्च में इंस्टीट्यूट की टीम ने घरों में बनने वाली 36 तरह की चटनी और 56 भोग मिठाई को होटलों में परोसने के लिए उपयुक्त पाया। इसके बाद इन दोनों खाद्य पदार्थों को होटलों में परोसने के लिए हरियाणा पर्यटन को प्रस्ताव भेजा गया।

हरियाणा पर्यटन ने भी इन दोनों पदार्थों को अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर डाल दिया। हालांकि अभी तक यह होटलों में परोसना शुरू नहीं किया गया। इतनी सफलता के बाद अब इंस्टीट्यूट के शोधार्थी मक्का, चना, गेहूं और बाजरे आदि की रोटी को लेकर रिसर्च कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह रिसर्च भी जल्दी ही पूरी हो जाएगी।

यह होगा लाभ
होटलों में घरों का पारंगत खाना मिलने के बाद क्रेज बढ़ेगा। बाहर से आने वाले पर्यटकों को हरियाणवी खाना परोसा जा सकेगा। इससे हरियाणा पर्यटन के साथ-साथ आम आदमी की आमदनी भी बढ़ेगी और हरियाणावी खाने की पहचान भी दूर-दूर तक होगी।
 
यह एक अच्छी शुरूआत है कि होटलों में भी घरों का परंपरागत खाना मिल सकेगा। इस प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की थीम पर शुरू किया गया है। इससे सभी को फायदा होगा।
-डॉ. आशीष दहिया, डायरेक्टर आईएचटीएम एमडीयू

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