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Hindi News ›   Chandigarh ›   Home Minister Amit Shah Statement on Beant Singh Murderer Balwant Singh Rajoana

संसद में गृहमंत्री अमित शाह का बयान- बलवंत सिंह राजोआना को कोई माफी नहीं दी गई

Tue, 03 Dec 2019 02:01 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 03 Dec 2019 02:01 PM IST
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Home Minister Amit Shah Statement on Beant Singh Murderer Balwant Singh Rajoana
गृहमंत्री अमित शाह, बलवंत सिंह राजोआना - फोटो : फाइल फोटो
केंद्र सरकार ने पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को माफ नहीं किया है। लोकसभा में मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह ने इससे संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा कि किसी की सजा माफ नहीं की गई है।
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गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। चूंकि राजोआना उम्रकैद की सजा पूरी कर चुके हैं, ऐसे में उनकी जल्द रिहाई होगी। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पंजाब के कांग्रेस सांसद व बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टु ने यह मामला उठाया।
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उन्होंने कहा, एक पूर्व सीएम के हत्यारे की सजा को माफ करना उचित नहीं है। इस पर शाह ने उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स पर ध्यान न देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, इस संबंध में मीडिया में जो कहा जा रहा है उस पर विश्वास मत कीजिए। सरकार ने किसी की सजा माफ नहीं की है। दरअसल, कहा गया था कि पंजाब सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने जिन 8 कैदियों की रिहाई को मंजूरी दी थी, उनमें राजोआना भी शामिल हैं।
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पंजाब पुलिस के कांस्टेबल राजोआना को पंजाब सचिवालय के बाहर 1995 में हुए धमाके में दोषी पाया गया था। इस धमाके में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हो गई थी। राजोआना को विशेष अदालत ने 2007 में मौत की सजा सुनाई थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में उनकी मौत की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। राजोआना इस समय पटियाला की जेल में बंद है।

राजोआना को चंडीगढ़ में सीबीआई की विशेष अदालत ने 1 अगस्त, 2007 को फांसी की सजा सुनाई थी। 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय में एक बम धमाके में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। इस हत्याकांड में पंजाब पुलिस के एक अधिकारी दिलावर सिंह ने सुसाइड बॉम्बर की भूमिका निभाई थी।

रची गई साजिश में यह तय हुआ था कि अगर दिलावर सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या करने में असफल रहता है तो उसके बाद राजोआना सुसाइड बॉम्बर की भूमिका निभाएगा। बेअंत सिंह की हत्या के पीछे राजोआना ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का हवाला दिया था। राजोआना को 31 मार्च, 2012 को फांसी देना तय हुआ था। 28 मार्च, 2012 को गृह मंत्रालय ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा दायर अपील के बाद राजोआना की फांसी पर रोक लगा दी थी।

राजोआना पर शाह के बयान से सिखों को ठेस पहुंची: सुखबीर बादल

शिरोमणि अकाली दल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में दिए बयान कि बलवंत सिंह राजोआना को माफी नहीं दी गई है, को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पार्टी प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि इससे सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंची है जो यह मान कर चल रहे थे कि 550वें प्रकाश पर्व पर राजोआना की फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो चुकी है।

सुखबीर ने कहा कि पिछले दिनों अखबारों में राजोआना की सजा माफ करने के बयान छपे तो लगा था कि अतीत से बाहर आ गए। पर इस बयान ने सभी को झटका दिया है। लोगों में यह भावना घर कर गई है कि सिखों को इंसाफ नहीं दिया गया। 550वें प्रकाश पर्व पर अपनाई दया की भावना को वास्तव में नहीं लागू किया गया। अकाली दल इस मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने के हक में है। यह केस माफी का हकदार है क्योंकि राजोआना बिना पैरोल के 23 साल जेल में सजा काट चुका है।

शाह से मिलेगा शिअद का प्रतिनिधिमंडल
सुखबीर ने कहा कि अकाली दल सैद्धांतिक तौर पर भी मौत की सजा के खिलाफ है, इस बारे में राष्ट्रपति से मिल चुका है। पार्टी राजोआना को राहत दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखेगी। जल्द ही उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री शाह से मिल कर उन्हें सिखों की भावनाओं से अवगत कराएगा। पंजाब विधानसभा ने भी इसे सर्व-सम्मति से पास किया था। बेअंत सिंह के पोते गुरकीरत कोटली ने इसका समर्थन किया था। सुखबीर ने कहा कि सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मामले में दोहरा खेल खेला है। केंद्र को भेजी सूची में राजोआना का नाम नहीं था। सीएम यह बताएं कि उन्होंने राजोआना के नाम की सिफारिश क्यों नहीं की।

राजोआना की सजा बरकरार को लेकर अकाली दल भाजपा में बढ़ेगी खटास

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लोकसभा में राजोआना को फांसी की सजा बरकरार रखने के बयान पर एक बार फिर से सियासत गर्मा गई है। सबसे बड़ी दिक्कत केंद्र में सत्तासीन पार्टी भाजपा के साथ सांझीदार शिरोमणि अकाली दल के लिए खड़ी हो गई है। अकाली दल बादल काली सूची को खत्म करने का श्रेय लेकर स्टेजों पर पीएम मोदी व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का धन्यवाद करते थक नहीं रहा था कि राजोआना के मामले ने उनको बैकफुट पर खड़ा कर दिया है।पंथक वोट बैंक की वापसी की आस लगाये बैठे शिरोमणि अकाली दल को गहरा झटका लगा है।

सियासी माहिरों का मानना है कि अकाली दल व भाजपा में खटास बढ़ सकती है क्योंकि राजोआना का मामला खुद एसजीपीसी उठाकर चलती आई है। बलवंत सिंह राजोआना की रिहाई के लिए कई सिख संगठन, अकाली दल और सिख राजनेता पिछले कई सालों से लगातार मांग उठा रहे थे। इस मामले में बलवंत सिंह राजोआना को माफी देने के लिए एसजीपीसी की ओर से याचिका पंजाब और केंद्र सरकार को भेजी गई थी। अकाली दल बादल इसकी पूरी पैरवी कर रहा था।

केंद्र सरकार द्वारा 314 में से 312 सिखों को काली सूची से निकाला गया तो अकाली दल ने इसका जोर शोर से प्रचार कर खुद श्रेय लिया। यहां तक कि सूबे के पांच बार सीएम रहे प्रकाश सिंह बादल ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने दयालु और शालीन हैं कि पंजाब और खासतौर पर देशभक्त सिखों से संबधित सभी मसलों के बारे में वह हमेशा मुझसे व्यक्तिगत तौर पर सलाह मशविरा करते रहते हैं। लोग शायद भूल गए हों, पर मोदी जी ने 2013 में अहमदाबाद में हुए एक अंतरराष्ट्रीय समागम में बहादुर और देश भक्त सिख भाईचारे का सम्मान बहाल करवाने के लिए सार्वजनिक तौर से वादा किया था।

हरियाणा के चुनावों के दौरान अकाली दल बादल व भाजपा के रिश्तों में खटास जरूर आई। खटास उस समय भी देखने को मिली जब एसजीपीसी द्वारा श्री सुल्तानपुर लोधी में अलग स्टेज लगायी गयी थी। जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पहुंचना था लेकिन उनहोंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। वह एसजीपीसी की स्टेज पर नहीं पहुंचे तो कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी। हालांकि कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के समीकरण में अमित शाह काफी व्यस्त हो गये हैं।

दरअसल, 2017 के विधानसभा चुनावों में अकाली दल का जनाधार पंजाब में काफी खिसक गया था। जिस पंथक वोट बैंक से सहारे अकाली दल ने 25 साल सूबे में राज किया, वह पंथक वोट अकाली दल से किनारा कर चुका था। अकाली दल के लिए यह आशा की किरण थी कि वह राजोआना समेत आठ सिख कैदियों की रिहाई, श्री करतारपुर साहब कोरिडोर, काली सूची को खत्म करने के फैसलों को जनता के बीच ले जाकर अपना पंथक वोट वापस ला सकते हैं।

लेकिन मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अकाली दल को पूरी तरह से बैकफुट पर ला दिया है। अकाली दल के लिए दिक्कत यह भी है कि वह सत्तासीन है और खुलकर अपनी सरकार के खिलाफ बयानबाजी भी नहीं कर सकते हैं।

अगर बीबी हरसिमरत में जमीर जिंदा है तो तत्काल मोदी सरकार से बाहर निकले

बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा बरकरार रखने का मामला अकाली दल के गले की फांस बन गया है। अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल के विरोधी नेताओं ने साफ कहा है कि अगर जमीर जिंदा है तो अकाली दल की तरफ से केंद्र में मंत्री हरसिमरत कौर बादल को अब सरकार से बाहर आ जाना चाहिए।

अकाली दल टकसाली के सेवां सिंह सेखवां का कहना है कि राजोआना की फांसी की सजा को केंद्र सरकार ने माफ कर दिया था, वह भी श्री गुरुनानक देव जी के 550 प्रकाशोत्सव पर। फिर अब राजोआना को फांसी की सजा देने की बात करना ही पाप है। अकाली दल सिखों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है। अगर इतना ही दर्द है तो हरसिमरत कौर को इस्तीफा दे देना चाहिए, फिर सामने आएगा कि अकाली दल के दिल में सिखों के लिए प्रति हमदर्दी है।

सेखवां ने कहा कि उनके पास पूरे दस्तावेज हैं कि केंद्र सरकार ने राजोआना की सजा माफ की है। एसजीपीसी सदस्य किरणजोत कौर का कहना है कि केंद्र की मंशा ही साफ नहीं है। अकाली दल सिखों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहा है। पहले केंद्र सरकार ने सजा माफ की बात की, अब सजा बरकरार रखना, यह सिखों के आंसूओं के साथ खिलवाड़ है और जख्मों को कुरेदा जा रहा है।

राजोआना मामले पर कांग्रेस ने साधी चुप्पी

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री भीम सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा माफ नहीं किए जाने के रहस्योद्घाटन ने पंजाब की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर चुप्पी साध ली है। राजोआना की सजा पर स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते सांसद रवनीत बिट्टू लगातार विरोध कर रहे थे।

उन्होंने ने सिर्फ प्रदेश कांग्रेस बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का ऐलान भी किया था। बिट्टू सजा माफी के ऐलान ऐलान को संसद में उठाने का मन भी बना चुके थे। इसी बीच मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री के बयान ने उन्हें तो राहत दी। फिलहाल बिट्टू केंद्र के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देने के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।

बीते दिनों बिट्टू ने राजोआना की सजा के मामले में बयान जारी कर कहा था कि पंजाब सरकार की ओर से सजा माफी के लिए राजोआना का नाम नहीं भेजा गया, लेकिन इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बयान जारी कर कहा था कि सरकार ने 10 सिख कैदियों के बीच राजोआना कैदियों के बीच राजोआना की सजा माफी का नाम भी केंद्र को भेजा है।

विवाद में रही सिख कैदियों की सूची

अकाली दल की ओर से मंगलवार को आरोप लगाया गया कि कैप्टन सरकार ने ने सजा माफी के लिए जिन सिख कैदियों की सूची केंद्र को भेजी थी उसमें राजोआना का नाम नहीं है।

राज्य सरकार की ओर से जिन 10 कैदियों के नाम भेजे गए थे उनमें राजोआना भी शामिल है। हालांकि बाकी नौ कैदियों में से पांच ऐसे हैं, जिन्हे कई साल पहले रिहा किया जा चुका है और उनमें से एक की रिहाई के बाद मौत भी हो चुकी है। इनमें बाग सिंह 2015 में अमृतसर जेल से रिहा हुए और 2017 में उनका देहांत हो गया।

बाकी कैदियों में, हरदीप सिंह भी 2016 में अमृतसर जेल से रिहा हो चुके हैं जबकि वरियाम सिंह को यूपी सरकार ने 2015 में रिहा कर दिया था। सरवन सिंह को 2017 और दिलबाग सिंह बाग्गा को 2018 में रिहा किया जा चुका है। केंद्र की सूची में केवल तीन नाम- भाई दिलबाग सिंह, सुदेव सिंह और भाई आनंद सिंह ही ऐसे हैं, जो अपनी सजा पूरी होने के बाद भी अब तक जेलों में बंद हैं।

केंद्र घटा चुका है राजोआना की सजा

31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के बाहर मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। आतंकियों ने उनकी कार को बम से उड़ा दिया था। इस घटना में 16 अन्य लोगों की भी जान गई थी। पंजाब पुलिस के कर्मचारी दिलावर सिंह ने आत्मघाती हमलावर की भूमिका निभाई थी। जांच में यह सामने आया था कि अगर दिलावर सिंह  हमला करने में असफल हुआ तो राजोआना आत्मघाती हमलावर की भूमिका निभाएगा। हत्याकांड की साजिश राजोआना ने ही रखी थी। 

2007 में चंडीगढ़ की विशेष अदालत ने राजोआना को फांसी की सजा सजा सुनाई थी। श्री गुरु नानक देव जी के 550 में प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में पंजाब सरकार की ओर से कई सिख कैदियों की सजा माफ करने संबंधी एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया जिसके तहत 10 सिख कैदियों की सूची भेजी गई थी।

इस सूची में बलवंत सिंह राजोआना का नाम भी शामिल था। पिछले महीने केंद्र सरकार की ओर से राजीव आना की फांसी की सजा कम किए जाने संबंधी पत्र राज्य सरकार और यूटी चंडीगढ़ प्रशासन को भेजा गया था। यूटी प्रशासन ने इस पत्र के आधार पर राजोआना की सजा फांसी से बदलकर उम्र कैद करने की दस्तावेजी प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।
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